30 मिनट तक सोसाइटी की लिफ्ट बनी ‘मौत का बंद कमरा’! चार मासूमों का सहारा बनी हनुमान चालीसा
गैलेक्सी वेगा सोसाइटी की घटना ने उठाया बड़ा सवाल
करोड़ों की हाईराइज सोसाइटियों में आखिर कितनी सुरक्षित हैं आपकी लिफ्टें ?
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
ग्रेटर नोएडा। चमचमाती हाईराइज इमारतें, आधुनिक सुविधाओं के दावे और सुरक्षा के बड़े-बड़े वादे… लेकिन सोमवार रात ग्रेटर नोएडा वेस्ट की गैलेक्सी वेगा सोसाइटी में जो हुआ, उसने इन सभी दावों की हकीकत सामने ला दी। एक लिफ्ट अचानक बीच मंजिल पर रुक गई और उसके भीतर चार मासूम बच्चियां करीब 30 मिनट तक कैद रहीं। बाहर परिवारों की धड़कनें तेज थीं, जबकि भीतर बंद लिफ्ट में भय और अनिश्चितता के बीच गूंज रही थी हनुमान चालीसा।
यह सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि हाईराइज सोसाइटियों की सुरक्षा व्यवस्था पर लगा ऐसा सवाल है, जिसका जवाब हजारों फ्लैट मालिक जानना चाहते हैं।
कुछ सेकेंड में सामान्य सफर बना खौफनाक अनुभव
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, चारों बच्चियां लिफ्ट से अपने फ्लोर की ओर जा रही थीं कि अचानक तेज झटके के साथ लिफ्ट बीच रास्ते में रुक गई। कुछ देर के लिए बिजली भी चली गई और केबिन अंधेरे में डूब गया। बिजली लौट आई, लेकिन लिफ्ट नहीं चली। बंद केबिन में हर मिनट बच्चियों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं था।
जहां घबराहट थी, वहां आस्था ने संभाल लिया मन
करीब आधे घंटे तक लिफ्ट में फंसी बच्चियों ने घबराकर रोने के बजाय एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उनकी मासूम आवाजें केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में अद्भुत मानसिक शक्ति का भी संदेश देती हैं। इस दृश्य ने लाखों लोगों को भावुक कर दिया।
बचाव दल पहुंचा, लेकिन उठ गए कई असहज सवाल
सूचना मिलने के बाद सोसाइटी का स्टाफ मौके पर पहुंचा और काफी प्रयास के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोला गया। सभी बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि कोई शारीरिक चोट नहीं आई, लेकिन घटना ने एक बड़ा प्रश्न छोड़ दिया, यदि रेस्क्यू में और देर हो जाती, तो जिम्मेदारी किसकी होती ?
क्या हाईराइज सोसाइटियां केवल सुविधाओं का सपना बेच रही हैं ?
एनसीआर की कई हाईराइज सोसाइटियों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान लिफ्ट फंसने, अचानक गिरने, तकनीकी खराबी और मेंटेनेंस में लापरवाही की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। इसके बावजूद अधिकांश सोसाइटियों में लिफ्टों का स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट, आपातकालीन रेस्क्यू ड्रिल और नियमित तकनीकी परीक्षण केवल कागजों तक सीमित दिखाई देते हैं।
तकनीकी जानकारों का मानना है कि लिफ्ट केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन सुरक्षा से जुड़ा उपकरण है। इसकी नियमित जांच में जरा-सी लापरवाही भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
अब केवल आश्वासन नहीं, जवाबदेही चाहिए
घटना के बाद सोसाइटी के निवासियों ने सभी लिफ्टों का थर्ड पार्टी सेफ्टी ऑडिट, आपातकालीन अलार्म और इंटरकॉम सिस्टम की कार्यशीलता की जांच, समयबद्ध मेंटेनेंस रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा दोषी एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
निवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर घर खरीदने वाले परिवारों को केवल लग्जरी सुविधाएं नहीं, बल्कि विश्वसनीय सुरक्षा व्यवस्था भी मिलनी चाहिए।
