जिस घर में गूंजती थीं किलकारियां, वहां पसरा मातम! 17वीं मंजिल से गिरा मासूम
आदित्य वर्ल्ड सिटी में दर्दनाक हादसा
एसी की मरम्मत के दौरान खुले वेंट से नीचे गिरा बच्चा, हाईराइज सोसाइटियों में बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक एक नन्हा बच्चा खेल रहा था, वहां अब उसकी किलकारियों की जगह चीख-पुकार है। जिस मां के लिए उसका बच्चा पूरी दुनिया था, उसकी गोद हमेशा के लिए सूनी हो गई। परिवार को शायद अंदाजा भी नहीं था कि घर के भीतर खेलता हुआ उनका तीन साल का मासूम कुछ ही पलों में उनसे इतनी दूर चला जाएगा, जहां से वह कभी लौटकर नहीं आएगा।

आदित्य वर्ल्ड सिटी स्थित सिटी अपार्टमेंट में रविवार रात हुआ यह दर्दनाक हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है। यह उन तमाम परिवारों के लिए भी एक गंभीर सवाल है, जो आसमान छूती बहुमंजिला इमारतों में अपने बच्चों के साथ सुरक्षित जीवन का सपना लेकर रहते हैं।
आखिर आधुनिक सुविधाओं से लैस इन ऊंची इमारतों में हमारे बच्चे कितने सुरक्षित हैं ?
खेलते-खेलते 17वीं मंजिल से नीचे गिरा मासूम

घटना वेव सिटी थाना क्षेत्र स्थित सिटी अपार्टमेंट के टावर K की 17वीं मंजिल पर बने फ्लैट संख्या K-1703 की है। यहां अंशील गोयल अपने परिवार के साथ किराये पर रहते हैं। रविवार रात करीब आठ से नौ बजे के बीच उनका तीन साल का बेटा कमरे में खेलते समय एसी के खुले वेंट से नीचे गिर गया।
परिजन और पड़ोसी तत्काल बच्चे को अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रात करीब 9:35 बजे कविनगर स्थित मणिपाल अस्पताल से पुलिस को घटना की सूचना मिली। पुलिस अस्पताल पहुंची और परिजनों से जानकारी प्राप्त की।
इस हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा है। मां और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस बच्चे की हंसी घर की रौनक थी, उसकी असमय मौत ने परिवार को ऐसा दुख दिया है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।
एसी की मरम्मत के लिए उतारा गया था विंडो एसी

मृतक के ताऊ ने NEWS1UP को बताया कि परिवार गाजियाबाद की पंचवटी कॉलोनी का रहने वाला है और वह स्वयं भी इसी टावर में किराये पर रहते हैं। उनके मुताबिक, कमरे के विंडो एसी में खराबी आने के कारण मैकेनिक को बुलाया गया था। रविवार दोपहर करीब पांच बजे मैकेनिक एसी उतारकर यह कहकर ले गया था कि वह शाम तक उसे ठीक करके वापस लगा देगा।
परिजनों के अनुसार, वेंट के सामने एक कुर्सी लगा दी गई थी, ताकि कोई उसके पास न जाए। ताऊ के तीन बच्चे और अंशील का बेटा एक साथ फ्लैट में खेल रहे थे। इसी दौरान बच्चे उस कमरे में पहुंचे और यह दर्दनाक हादसा हो गया।
आसमान छूती इमारतें, लेकिन बच्चों की सुरक्षा का सवाल बरकरार

गाजियाबाद और नोएडा समेत पूरे एनसीआर में हाईराइज अपार्टमेंट आधुनिक शहरी जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। लिफ्ट, सीसीटीवी, सुरक्षा गार्ड और तमाम सुविधाओं के बीच एक बुनियादी सवाल पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है, क्या इन इमारतों में छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी सावधानी बरती जा रही है ?
खिड़कियां, बालकनी, वेंट और एसी लगाने की जगह जैसे हिस्सों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। खासकर मरम्मत के दौरान, जब किसी उपकरण को हटाने से कोई जगह खुली रह सकती है। ऐसी परिस्थितियों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित इंतजाम आवश्यक हैं।
यह घटना याद दिलाती है कि सुरक्षा केवल सोसाइटी के मुख्य द्वार पर तैनात गार्ड या सीसीटीवी कैमरों तक सीमित नहीं है। घर के भीतर मौजूद संभावित खतरों को पहचानना और उनसे बचाव के उपाय करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
एसीपी ने दी जानकारी
एसीपी वेव सिटी प्रिया श्रीपाल के मुताबिक, 17वीं मंजिल से बच्चे के गिरने की सूचना मिली थी। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मामले की जांच की जा रही है। इस घटना के बाद हाईराइज सोसाइटियों में रहने वाले परिवारों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने घरों की खिड़कियों, बालकनी, वेंट और एसी की जगहों की सुरक्षा की समीक्षा करें। मरम्मत के दौरान खुले हिस्सों को सुरक्षित रखना और छोटे बच्चों की पहुंच को ध्यान में रखना विशेष महत्व रखता है।
तीन साल का बच्चा खतरे और सुरक्षा के बीच का अंतर नहीं समझ सकता। वह तो बस खेलता है, अपनी छोटी-सी दुनिया में मगन रहता है। उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बड़ों की साझा जिम्मेदारी है। यह हादसा एक परिवार के लिए कभी न भरने वाला जख्म है। लेकिन इस घटना से दूसरे परिवारों और सोसाइटी प्रबंधन को बच्चों की सुरक्षा के प्रति अधिक सतर्क होने की प्रेरणा जरूर मिलनी चाहिए।
क्योंकि ऊंची इमारतों की असली पहचान उनकी मंजिलों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से होनी चाहिए कि वहां रहने वाले लोग कितने सुरक्षित हैं।
