पंचशील प्रिमरोज हैंडओवर विवाद: नोटिसों की भरमार, कार्रवाई शून्य
1188 परिवारों के बीच सुरक्षा, रखरखाव और जवाबदेही के सवाल गहराए,
एओए बोली: नियमसम्मत और सुरक्षित हैंडओवर से कम कुछ स्वीकार नहीं
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। गोविंदपुरम अनाज मंडी के सामने स्थित पंचशील प्रिमरोज सोसाइटी आज उत्तर प्रदेश की उस भयावह शहरी व्यवस्था का प्रतीक बन चुकी है, जहाँ बिल्डर मनमानी करता है, प्राधिकरण नोटिस जारी करता है और अंत में पिसता सिर्फ आम नागरिक है। 1188 परिवार वर्षों से अपने ही घरों में असुरक्षा, बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता का दंश झेल रहे हैं।
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की नोटिसों तक सीमित कार्रवाई और पंचशील बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड की मनमानी अब खुलकर सामने आ चुकी है। जब भी अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) जीडीए से संपूर्ण हैंडओवर की मांग करती है, प्राधिकरण बड़े सख्त शब्दों में नोटिस जारी कर देता है, लेकिन उन नोटिसों का परिणाम आज तक शून्य ही रहा है।

नोटिस जारी हुए, लेकिन कार्रवाई का असर कहाँ ?
2 फरवरी 2026 को जीडीए ने पंचशील बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक को नोटिस जारी करते हुए धारा 14(1) के अंतर्गत एक माह के भीतर संपूर्ण हैंडओवर सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि आदेश का पालन न करने पर उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट 2010, लिफ्ट एक्ट 2023, राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम-2023 तथा बीएनएस-2023 की धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई होगी। लेकिन निर्धारित समय सीमा गुजर गई, कार्रवाई कहीं दिखाई नहीं दी और निवासी फिर उसी प्राधिकरण के दरवाजे पर न्याय की भीख मांगते नजर आए।
15 मई 2026 को एओए ने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कर साफ कहा कि बिल्डर खुलेआम जीडीए के आदेशों को ठेंगा दिखा रहा है। एओए ने इसे “हास्यास्पद स्थिति” बताते हुए सवाल उठाया कि आखिर यदि प्राधिकरण अपने ही आदेशों का पालन नहीं करा सकता तो फिर कानून का अस्तित्व किसलिए है ?

चार साल पहले भी हुई थी बैठक
7 अप्रैल 2022 को जीडीए ने बिल्डर और निवासियों के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त बैठक आयोजित की थी। बैठक में सोसाइटी के टावरों और पिलर्स के स्ट्रक्चरल ऑडिट, बेसमेंट लीकेज, वाटरप्रूफिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट रिपेयर जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए थे।
बैठक के दस्तावेजों के अनुसार बिल्डर ने 45 दिनों के भीतर कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया था। निवासियों का कहना है कि पिलर्स पर कुछ कार्य जरूर हुआ, लेकिन बेसमेंट में लगातार सीपेज और रिसाव की समस्या आज भी बनी हुई है।
इसके बाद 22 अप्रैल 2022 को जीडीए ने बिल्डर को तीन माह के भीतर कम्पलीशन सर्टिफिकेट प्राप्त कर एओए को हस्तांतरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार 28 नवंबर 2024 को परियोजना को पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया।
बिजली-पानी बंद करने की चेतावनी से बढ़ी चिंता
22 दिसंबर 2025 को पंचशील बिल्डटेक द्वारा सोसाइटी परिसर में एक नोटिस चस्पा किया गया, जिसमें 1 जनवरी 2026 से मेंटीनेंस सेवाएँ बंद करने की बात कही गई थी। एओए के अनुसार इसमें बिजली सेवाएँ भी शामिल थीं।
इसके जवाब में एओए ने 24 दिसंबर को बिल्डर को पत्र लिखकर कहा कि बिना सुरक्षित और वैधानिक हैंडओवर के बिजली, पानी, सीवर और सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाओं को बंद करना निवासियों के हितों के प्रतिकूल होगा। एओए ने यह भी मांग रखी कि लो-राइज यूनिट्स को हाई-राइज परियोजना में शामिल करने से संबंधित आवश्यक वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएँ।
मामला जिलाधिकारी और पुलिस प्रशासन तक भी पहुँचा। 31 दिसंबर 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट ने संबंधित अधिकारियों को जांच कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

अप्रैल 2026 में फिर नोटिस, लेकिन जमीनी सवाल कायम
2 अप्रैल 2026 को जीडीए के संयुक्त सचिव ने बिल्डर को एक और नोटिस जारी किया। इसमें बेसमेंट रिपेयर, लीकेज समाधान, लिफ्ट सुरक्षा, एसटीपी संचालन, एनजीटी क्लीयरेंस, विभागीय एनओसी, आईएफएमएस फंड और अन्य तकनीकी दस्तावेजों से जुड़े मुद्दों का समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया था।
लेकिन एओए और निवासियों के अनुसार आज भी कई टावरों में प्लास्टर टूटने, सरिया दिखाई देने, सीवर ओवरफ्लो और लिफ्ट सुरक्षा जैसी समस्याएँ बनी हुई हैं। कुछ मामलों में प्लास्टर वाहनों पर गिरने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते व्यापक तकनीकी परीक्षण और मरम्मत कार्य नहीं किए गए, तो भविष्य में गंभीर दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
बिजली भार और सीवर व्यवस्था पर भी उठे सवाल
मामला केवल निर्माण गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। बिजली कनेक्शन में भी कथित भारी अनियमितता सामने आई है। एओए के अनुसार बिल्डर ने लो-राइज प्रोजेक्ट में हाई-राइज के स्वीकृत विद्युत भार का इस्तेमाल किया। इस मामले में बिल्डर पर करीब 26 लाख रुपये की पेनल्टी भी लग चुकी है। शिकायत के अनुसार हाई-राइज के 1188 फ्लैट्स के लिए 3263 किलोवाट का स्वीकृत भार था, जबकि वास्तविक उपयोग इससे काफी अधिक हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार इस मामले में विभागीय स्तर पर जांच जारी है। वहीं निवासियों ने सीवर कनेक्शन को लेकर भी तकनीकी विसंगतियों की शिकायत की है। शिकायत के अनुसार लो राइज प्रोजेक्ट के सीवर को हाई राइज टावर्स की सीवर लाइन जोड़ दिया गया है। जिसके कारण सोसायटी परिसर में आये दिन सीवर का गन्दा और बदबूदार पानी भर जाता है। हालांकि इन मामलों में अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
एओए की अडिगता बनी निवासियों की आवाज
एओए अध्यक्ष नीरज सिंह ने कहा कि-

निवासी वर्षों से सुरक्षा, रखरखाव और वैधानिक हैंडओवर जैसे मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
उनका कहना है कि एओए किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित, कार्यशील और नियमसम्मत हैंडओवर सुनिश्चित कराने के लिए लगातार विभागों और प्राधिकरण के समक्ष अपनी बात रख रही है। उन्होंने कहा कि निवासी केवल औपचारिक नहीं, बल्कि पूर्ण और सुरक्षित हैंडओवर चाहते हैं।
बिल्डर पक्ष ने क्या कहा ?
प्रोजेक्ट हेड अंकुर नागर ने कहा कि-
परियोजना को बने लगभग 15 वर्ष हो चुके हैं, इसलिए समय-समय पर रिपेयर की आवश्यकता स्वाभाविक है और जहाँ जरूरत होगी वहाँ कार्य कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अतिरिक्त विद्युत भार बढ़वाने के लिए विभाग को पत्र भेजा गया है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद हैंडओवर की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। आईएफएमएस और लो-राइज यूनिट्स से जुड़े दस्तावेज भी नियमानुसार सौंपे जाएंगे।
जवाबदेही आखिर तय कब होगी ?
पंचशील प्रिमरोज का मामला अब केवल एक सोसाइटी का विवाद नहीं रह गया है। यदि प्राधिकरण के आदेशों के बाद भी समस्याएँ बनी रहती हैं, यदि तकनीकी शिकायतें वर्षों तक लंबित रहती हैं और यदि निवासी लगातार असुरक्षा महसूस कर रहे हैं, तो यह शहरी नियामक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
