कैमरे में कैद हुआ मकान गिरने का खौफनाक मंजर, वीडियो वायरल: ग्रेटर नोएडा के तिलपता गांव में बड़ा हादसा टला
नाली निर्माण की खुदाई के दौरान भरभराकर गिरा मकान, बिजली के खंभे भी उखड़े
प्राधिकरण की कार्यशैली पर उठे सवाल
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
नोएडा। ग्रेटर नोएडा के तिलपता गांव में प्राधिकरण द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य के दौरान कथित लापरवाही का एक भयावह दृश्य सामने आया। गांव निवासी रमेश भगतजी का मकान देखते ही देखते भरभराकर गिर गया। इस पूरी घटना का वीडियो मौके पर मौजूद एक व्यक्ति के मोबाइल फोन में कैद हो गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में मकान को धूल के गुबार के बीच कुछ ही सेकंड में ढहते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर लोगों में आक्रोश और प्राधिकरण की कार्यशैली पर सवाल और तेज हो गए हैं।
गनीमत यह रही कि हादसे के समय मकान के अंदर कोई मौजूद नहीं था और न ही उस समय कोई राहगीर मकान के सामने से गुजर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ लोग महज कुछ मीटर की दूरी पर थे, जो कुछ ही क्षण बाद उसी रास्ते से गुजरने वाले थे। यदि हादसा कुछ पल बाद होता तो बड़ा जान-माल का नुकसान हो सकता था।
बताया जा रहा है कि प्राधिकरण की ओर से मकान के सामने नाली निर्माण के लिए जेसीबी मशीन से खुदाई कराई जा रही थी। आरोप है कि बिना पर्याप्त तकनीकी सुरक्षा और एहतियात के की गई खुदाई से मकान की नींव कमजोर हो गई, जिसके चलते पूरा मकान अचानक ढह गया।
बिजली के खंभे भी गिरे, क्षतिग्रस्त हुई विद्युत लाइन

मकान गिरने की चपेट में पास में लगे बिजली के खंभे भी आ गए। खंभे उखड़कर गिर पड़े, जिससे पूरी विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इस दौरान तेज धमाकों की आवाज सुनाई दी, जिससे पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। एहतियातन आसपास के लोगों ने क्षेत्र को खाली कराया और बिजली आपूर्ति प्रभावित हो गई।
भारतीय किसान यूनियन मंच ने संभाली कमान

घटना के बाद पीड़ित रमेश भगतजी की सहायता के लिए भारतीय किसान यूनियन मंच आगे आया। संगठन के पदाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्राधिकरण और नाली निर्माण कराने वाले ठेकेदार से वार्ता की। संगठन के हस्तक्षेप के बाद ठेकेदार ने पीड़ित को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई, जिससे तत्काल राहत मिल सकी।
प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
इस घटना ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आबादी वाले क्षेत्रों में निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन किया जाना चाहिए था। यदि खुदाई के दौरान सुरक्षा मानकों और तकनीकी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक मकान गिरने का मामला नहीं है, बल्कि विकास कार्यों में बरती जा रही लापरवाही का गंभीर उदाहरण है। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
