हर्ष फायरिंग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला!!
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लाइसेंसी हथियार जश्न मनाने के लिए नहीं
हर कारतूस का देना होगा हिसाब, नियम तोड़े तो लाइसेंस होगा रद्द

NEWS1UP
भूमेश शर्मा
प्रयागराज। शादी-ब्याह, जन्मदिन या किसी भी समारोह में हर्ष फायरिंग करने वालों के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा और सख्त संदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि शस्त्र लाइसेंस जश्न में गोलियां चलाने का अधिकार नहीं देता। यदि कोई लाइसेंसधारक हर्ष फायरिंग करता है या कारतूसों का सही हिसाब नहीं रखता है, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने कहा कि शस्त्र लाइसेंस एक विशेष अधिकार (Privilege) है, इसका दुरुपयोग किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रत्येक लाइसेंसधारक के लिए खरीदे गए और इस्तेमाल किए गए हर कारतूस का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है।

757 कारतूसों का हिसाब नहीं… और चला गया लाइसेंस
मामले में याचिकाकर्ता अखिलेश कुमार ने प्रशासन द्वारा लाइसेंस निरस्त किए जाने को चुनौती दी थी। जांच में 857 कारतूसों में से 757 कारतूसों का कोई संतोषजनक हिसाब नहीं मिला। इसी आधार पर प्रशासन ने लाइसेंस रद्द किया, जिसे हाई कोर्ट ने पूरी तरह सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
देशभर के लाइसेंसधारकों के लिए बड़ा संदेश
अदालत के इस फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि हर्ष फायरिंग केवल गैर-जिम्मेदाराना हरकत ही नहीं, बल्कि शस्त्र लाइसेंस की शर्तों का गंभीर उल्लंघन भी है। नियमों की अनदेखी करने वालों पर प्रशासन सख्त कार्रवाई कर सकता है।
नोएडा की घटना ने भी बढ़ाई थी चिंता
दिसंबर 2025 में नोएडा के सेक्टर-93 स्थित एक शादी समारोह में पिस्टल लोड करते समय अचानक गोली चलने से अफरा-तफरी मच गई थी। हालांकि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन घटना ने हर्ष फायरिंग के खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया था।
फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण
इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि देशभर में हर्ष फायरिंग की घटनाओं में अब तक कई निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है। शादी-विवाह, जन्मदिन और अन्य समारोहों में जश्न के नाम पर की गई फायरिंग कई बार जानलेवा साबित हुई है। अनेक मामलों में गोली सीधे उन लोगों को लगी, जिनका घटना से कोई लेना-देना नहीं था और वे केवल समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।
