PNB में 10.24 करोड़ की धोखाधड़ी: तीन साल तक ग्राहकों के खातों से निकलती रही रकम! महिला कर्मचारी समेत दो गिरफ्तार
तीन साल तक CBS यूजर आईडी का कथित दुरुपयोग कर बचत खातों और FD से निकाली रकम, एक खाताधारक की शिकायत से खुला फर्जीवाड़ा
NEWS1UP
संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। बैंक में सुरक्षित समझी जाने वाली ग्राहकों की जीवनभर की जमा-पूंजी पर जब बैंक के ही कर्मचारी की नजर पड़ जाए तो भरोसे की बुनियाद हिलना लाजिमी है। ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की पाई शाखा से जुड़ा 10 करोड़ 24 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला इसी गंभीर सवाल को सामने लाता है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले में एक महिला बैंक कर्मचारी और एक निजी व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
CBI की गाजियाबाद स्थित एंटी करप्शन ब्रांच ने 29 अक्टूबर को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, गिरफ्तार महिला आरोपी दीपांशी PNB की पाई शाखा में ऑफिस असिस्टेंट के पद पर कार्यरत थी। आरोप है कि उसने निजी व्यक्ति और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर बैंक के ग्राहकों के खातों से अनधिकृत लेन-देन किए और करीब 10.24 करोड़ रुपये निकाल लिए।
तीन साल तक चलता रहा कथित खेल
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दीपांशी ने कथित तौर पर पिछले तीन वर्षों के दौरान बैंक के अन्य अधिकारियों की CBS (कोर बैंकिंग सिस्टम) यूजर आईडी का दुरुपयोग किया। इसके जरिए ग्राहकों के बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में जमा रकम को अनधिकृत रूप से निकाला गया। इस पूरे घटनाक्रम में बैंक की आंतरिक निगरानी और वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक शिकायत से खुला करोड़ों का खेल
बताया गया है कि 16 सितंबर 2026 को एक खाताधारक ने अपने खाते से संदिग्ध डेबिट लेन-देन होने की शिकायत की थी। इसी शिकायत के बाद कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया और जांच आगे बढ़ी।
CBI ने निजी आरोपी को लेकर पुणे की विशेष CBI अदालत से ट्रांजिट रिमांड भी हासिल की है। फिलहाल जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित घोटाले में और कौन-कौन शामिल था, किन खातों के माध्यम से रकम निकाली गई और करोड़ों रुपये आखिर कहां स्थानांतरित किए गए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ग्राहकों की जमा-पूंजी से तीन साल तक कथित तौर पर करोड़ों रुपये निकलते रहे और बैंक की निगरानी व्यवस्था को इसकी भनक क्यों नहीं लगी ? अब जांच में न केवल आरोपियों की भूमिका, बल्कि बैंक के आंतरिक नियंत्रण और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी अहम होगी।
