जहरीली हवा की गिरफ्त में दिल्ली-NCR, GRAP-2 तत्काल लागू: तंदूर में कोयला-लकड़ी जलाने पर रोक!
प्रतीकात्मक इमेज
AQI 324 पहुंचने के बाद CAQM का बड़ा फैसला
डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर सख्ती, पार्किंग शुल्क बढ़ेगा, सड़कों पर पानी का छिड़काव और मशीनों से सफाई होगी
NEWS1UP
संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इसके साथ ही राजधानी और आसपास के इलाकों में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अतिरिक्त पाबंदियां और उपाय शुरू हो जाएंगे। होटल, रेस्तरां और सड़क किनारे संचालित ढाबों में तंदूर सहित किसी भी काम के लिए कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। वहीं, डीजल जनरेटर के संचालन पर भी सख्ती की जाएगी।
दिल्ली में सोमवार को इस सीजन में पहली बार वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 324 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब‘ श्रेणी में आता है। इससे पहले इस साल 4 फरवरी को AQI 339 दर्ज किया गया था। यानी करीब नौ महीने बाद राजधानी की हवा एक बार फिर इस स्तर तक जहरीली हो गई है।
जहांगीरपुरी में AQI 436, रोहिणी और पंजाबी बाग भी गंभीर श्रेणी में
सोमवार शाम चार बजे जहांगीरपुरी में AQI 436 दर्ज किया गया, जबकि रोहिणी में 415 और पंजाबी बाग में 413 रहा। इन तीनों इलाकों में हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई। दिल्ली के 58 निगरानी केंद्रों में से 37 पर हवा ‘बहुत खराब’, 17 पर ‘खराब’ और तीन केंद्रों पर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई। केवल एक केंद्र पर हवा की गुणवत्ता मध्यम रही।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के मुताबिक, AQI 301 से 400 के बीच होने पर हवा बहुत खराब और 401 से 500 के बीच होने पर गंभीर मानी जाती है। प्रदूषण में PM2.5 की प्रमुख भूमिका है। इसके सूक्ष्म कण सांस के जरिये फेफड़ों तक पहुंचने के साथ रक्तप्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे पैदा होते हैं।
GRAP-2 में क्या-क्या बदलेगा ?
GRAP के दूसरे चरण में पहले चरण के सभी प्रतिबंध जारी रहेंगे। इसके अतिरिक्त निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया जा सकता है। सड़कों पर मशीनों से सफाई का दायरा बढ़ाया जाएगा और धूल को नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाएगा। इसके साथ ही धूल बांधने वाले विशेष पदार्थों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन कराना होगा। डीजल जनरेटर के इस्तेमाल को लेकर भी निर्धारित प्रतिबंध लागू होंगे। इन उपायों का उद्देश्य सड़कों, निर्माण स्थलों और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करना है।
