ब्रेव हार्ट्स सोसाइटी में 19 मतदाताओं के नाम काटने पर डिप्टी रजिस्ट्रार सख्त!
AOA और चुनाव समिति को नोटिस
पेंट के बकाये का हवाला देकर मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप
मेंटेनेंस शुल्क नियमित जमा होने का दावा, तत्कालीन AOA ने बताया पुराना विवाद
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। सोसाइटी में पेंट का पैसा जमा नहीं किया तो वोट देने का अधिकार भी छीन लिया! राजनगर एक्सटेंशन की ब्रेव हार्ट्स सोसाइटी में 19 निवासियों को मतदान से वंचित किए जाने का मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार निखिलेश राजन ने AOA अध्यक्ष, सचिव और चुनाव समिति को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब तलब किया है। मामला केवल मतदाता सूची से नाम हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने सोसाइटियों में AOA के अधिकारों, चुनाव समितियों की निष्पक्षता और फ्लैट मालिकों के मताधिकार पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

सोसाइटी निवासी अजय सक्सेना की शिकायत के मुताबिक, चुनाव के दौरान उनके सहित 19 निवासियों के नाम मतदाता सूची से यह कहकर हटा दिए गए कि उन्होंने पेंट के काम की निर्धारित धनराशि जमा नहीं की है।
सक्सेना का कहना है कि-
हम सोसाइटी के मेंटेनेंस फंड और अन्य नियमित शुल्क समय पर जमा कर रहे हैं। इन मदों में हम पर कोई बकाया नहीं है।
उनके मुताबिक, विवाद केवल पेंट के काम की धनराशि को लेकर है, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत वह पहले ही डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में कर चुके हैं और जांच अभी लंबित है।
सक्सेना का यह भी कहना है कि जांच में पेंट का काम सही और नियमानुसार पाया जाता है तो सभी संबंधित निवासी अपनी देय धनराशि जमा करने को तैयार हैं। इसके बावजूद जांच पूरी होने से पहले ही पेंट शुल्क को आधार बनाकर 19 निवासियों को मतदान से वंचित कर दिया गया। उनका सवाल है कि जब नियमित मेंटेनेंस और अन्य शुल्कों का कोई बकाया नहीं है तो एक विवादित भुगतान को मताधिकार से जोड़ने का आधार क्या है ?
पूर्व पदाधिकारी भी मतदाता सूची से बाहर, चुनावी मंशा पर सवाल
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मतदाता सूची से हटाए गए 19 निवासियों में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो पूर्व में AOA बोर्ड में पदाधिकारी रह चुके हैं। सक्सेना को आशंका है कि इन लोगों के दोबारा चुनाव लड़ने की संभावना को देखते हुए उनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए। पेंट के कथित बकाये पर भारी ब्याज लगाए जाने का आरोप भी उन्होंने लगाया है।

तत्कालीन AOA ने बताया पुराना विवाद, लेकिन सवाल बरकरार
इस मामले में तत्कालीन AOA का कहना है कि यह विवाद नया नहीं है। पहले भी नामित चुनाव अधिकारी की देखरेख में हुए चुनाव के दौरान संबंधित निवासियों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए थे। AOA का यह तर्क उसका पक्ष जरूर सामने रखता है, लेकिन इससे मौजूदा विवाद का समाधान नहीं होता। आखिर पहले चुनाव में नाम शामिल नहीं किए जाने का आधार क्या था ? क्या उस फैसले की वैधानिकता की जांच हुई थी ? और क्या किसी पुराने फैसले को दोहराना उसे स्वतः नियमसम्मत बना देता है ?
पुराने फैसले की निरंतरता, उसकी वैधानिकता का प्रमाण नहीं हो सकती। हर चुनाव में मतदाता सूची का निर्धारण लागू कानून और उपविधियों के अनुरूप होना जरूरी है।
हाईकोर्ट के सवालों के बीच मताधिकार पर गंभीर बहस
हाईराइज सोसाइटियों में मताधिकार को लेकर चल रही कानूनी बहस के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट का 12 अगस्त 2026 का आदेश भी महत्वपूर्ण है। एल्डेको आमंत्रण AOA बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य मामले में न्यायालय ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या मेंटेनेंस, बिजली या सोसाइटी के अन्य बकाये के आधार पर अपार्टमेंट मालिकों को मतदान से वंचित किया जा सकता है और ऐसी व्यवस्था के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या सुरक्षा उपाय होने चाहिए।
इसके अलावा एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने अपार्टमेंट मालिक की कानूनी परिभाषा और उसके प्रतिनिधित्व से जुड़े अधिकारों की व्याख्या की थी। वहीं, 2015 के एक मामले में न्यायालय ने मतदाता सूची को यूपी अपार्टमेंट एक्ट, 2010, नियमावली 2011 और संबंधित उपविधियों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया था।
इन न्यायिक संदर्भों के बीच ब्रेव हार्ट्स सोसाइटी का मामला और महत्वपूर्ण हो जाता है। सवाल यह नहीं कि किसी निवासी को नियमों के विरुद्ध मतदान का अधिकार दिया जाए, बल्कि यह है कि किसी पात्र मतदाता को नियमों से इतर मनमाने आधार पर मतदान से वंचित भी न किया जाए।
गौरतलब है कि सोसाइटी में 4 अक्टूबर को चुनाव संपन्न हुए थे। अब डिप्टी रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और वैधता पर सवाल उठने लगे हैं। यदि जांच में पात्र मतदाताओं के नाम नियमविरुद्ध हटाए जाने की पुष्टि होती है तो चुनाव परिणाम भी प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल चुनाव निरस्त करने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।
