श्रीमद्भागवत जीवन का आध्यात्मिक संविधान, ध्रुव का चरित्र हर युग के लिए प्रेरणा : स्वामी वासुदेवाचार्य
स्वामी वासुदेवाचार्य ‘विद्याभास्कर’ जी महाराज बोले, भगवान के प्रति निष्काम समर्पण ही मानव जीवन का सर्वोच्च धर्म, श्रीमद्भागवत आत्मकल्याण का दिव्य पथ
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धर्म-कर्म डेस्क
गाजियाबाद। “स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे। अहैतुकी अप्रतिहता ययात्मा सुप्रसीदति।।” इसी भागवत वाक्य के मर्म को आत्मसात कराते हुए श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य “विद्याभास्कर” जी महाराज ने कहा कि मनुष्य का सर्वोच्च धर्म वही है, जो उसे भगवान के प्रति निष्काम, निरंतर और निष्कपट भक्ति से जोड़ दे। जब भक्ति किसी स्वार्थ से रहित होती है, तभी आत्मा को वास्तविक शांति और परम संतोष की अनुभूति होती है।
रामानुज परिवार, गाजियाबाद के तत्वावधान में हिन्दी भवन, लोहिया नगर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के द्वितीय दिवस सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भगवान श्रीहरि के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

भक्त ध्रुव का जीवन हर युग के लिए प्रेरणा
वैदिक मंत्रोच्चार, भगवान श्रीहरि के पूजन एवं मंगलाचरण के साथ कथा का शुभारंभ हुआ। अपने भावपूर्ण प्रवचन में पूज्य महाराज श्री ने भक्त ध्रुव के जीवन प्रसंग का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि ध्रुव केवल पौराणिक चरित्र नहीं, बल्कि अटूट विश्वास, दृढ़ संकल्प, तप, त्याग और ईश्वर के प्रति अखंड समर्पण के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियां व्यक्ति की परीक्षा अवश्य लेती हैं, लेकिन जिसकी आस्था अडिग होती है, उसके लिए भगवान स्वयं मार्ग प्रशस्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी और भौतिकतावादी युग में ध्रुव का चरित्र प्रत्येक व्यक्ति को यह संदेश देता है कि धैर्य, श्रद्धा और ईश्वर पर अटूट विश्वास से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी सहज प्राप्त किए जा सकते हैं।
श्रीमद्भागवत जीवन का आध्यात्मिक संविधान है
स्वामी वासुदेवाचार्य “विद्याभास्कर” जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन का आध्यात्मिक संविधान है। यह व्यक्ति को सत्य, सदाचार, करुणा, सेवा, संस्कार और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाता है। कथा श्रवण केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और अंतर्मन के जागरण का सशक्त माध्यम है। इससे व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन आता है और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा नैतिक मूल्यों का विस्तार होता है।

जयघोष और भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण
द्वितीय दिवस के मुख्य यजमान सुभाष गुप्ता एवं सुषमा गुप्ता रहे। उन्होंने विधि-विधान के साथ भगवान श्रीहरि का पूजन-अर्चन कर कथा का पुण्य लाभ प्राप्त किया। कथा के दौरान भगवान श्रीहरि के जयघोष, मधुर भजन-कीर्तन और संकीर्तन से पूरा हिन्दी भवन परिसर भक्तिरस में सराबोर हो उठा। महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और उसके उपरांत सभी को स्नेहपूर्वक भोजन प्रसादी वितरित की गई।
25 जुलाई तक चलेगा आध्यात्मिक महायज्ञ
आयोजन के संयोजक अतिन अग्रवाल एवं सह-संयोजक धवल गुप्ता ने बताया कि सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन 25 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से सायं 6 बजे तक हिन्दी भवन, लोहिया नगर में होगा। उन्होंने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से सपरिवार उपस्थित होकर कथा श्रवण करने तथा भगवान श्रीहरि का आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किया।
आयोजन की व्यवस्थाओं में राजेश गर्ग, धवल गुप्ता, दिनेश सिंह, नीरू गर्ग एवं गौरव बंसल सहित सभी कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहयोग दिया।
