तीन हफ्तों से बंद फुटओवर ब्रिज की लिफ्ट, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर जान जोखिम में डाल रहे लोग
गोल्फलिंक्स, जयपुरिया सनराइज ग्रीन्स, पांडव नगर, औद्योगिक क्षेत्र, आदित्य वर्ल्ड सिटी और बम्हेटा के बीच रोजाना हजारों लोगों की सुरक्षित आवाजाही का प्रमुख सेतु है यह फुटओवर ब्रिज, लेकिन तीन सप्ताह से बंद लिफ्ट ने व्यवस्था की पोल खोल दी। बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग सबसे अधिक परेशान हैं।
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प्रभात अरोड़ा
गाजियाबाद। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सार्वजनिक सुविधा जब तीन सप्ताह तक बंद पड़ी रहे और जिम्मेदार एजेंसियां शिकायतों के बावजूद आंखें मूंद लें, तो सवाल केवल एक खराब लिफ्ट का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का बन जाता है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (NH-9) पर मणिपाल अस्पताल के पास स्थित फुटओवर ब्रिज की एक लिफ्ट पिछले करीब तीन सप्ताह से खराब पड़ी है। नतीजा यह है कि हजारों लोग रोजाना या तो लंबी और थकाऊ सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर हैं या फिर तेज रफ्तार वाहनों के बीच एक्सप्रेसवे पार कर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

हजारों लोगों की लाइफलाइन बना है यह फुटओवर ब्रिज
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बना यह फुटओवर ब्रिज मेहरौली गांव, बम्हेटा गांव, गोल्फ लिंक, आशियाना, स्कार्डी और आसपास की कई आवासीय सोसायटियों के बीच आवागमन का प्रमुख माध्यम है। प्रतिदिन हजारों लोग इसी रास्ते से अपने कार्यस्थलों, अस्पतालों, बाजारों और घरों तक पहुंचते हैं।
एक्सप्रेसवे की ऊंचाई अधिक होने के कारण ब्रिज तक पहुंचने के लिए लंबी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। इसी कारण दोनों ओर लिफ्ट की व्यवस्था की गई थी, ताकि बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांगजन और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले लोगों को सुविधा मिल सके। लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था लगभग ठप हो चुकी है।

सबसे ज्यादा परेशानी रोज कमाने-खाने वाले लोगों को
इस मार्ग का उपयोग सबसे अधिक सुरक्षा गार्ड, घरेलू सहायिकाएं, दूध सप्लाई करने वाले, डिलीवरी बॉय, निजी कंपनियों के कर्मचारी और दैनिक मजदूर करते हैं। सुबह और शाम के समय यहां लोगों की भारी आवाजाही रहती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक लिफ्ट पिछले करीब तीन सप्ताह से पूरी तरह बंद है, जबकि दूसरी लिफ्ट भी कई बार बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण काम नहीं करती। ऐसे में लोगों के पास या तो लंबी सीढ़ियां चढ़ने का विकल्प बचता है या फिर मौत से आंख-मिचौली खेलते हुए सीधे एक्सप्रेसवे पार करने का।
शिकायतें होती रहीं, जिम्मेदार चुप रहे
फुटओवर ब्रिज पर तैनात लिफ्ट ऑपरेटर का कहना है कि खराबी की सूचना संबंधित विभाग को कई बार दी जा चुकी है, लेकिन अब तक मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय नागरिकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से भी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और गाजियाबाद नगर निगम को टैग कर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।
हादसे को न्योता देती लापरवाही
लिफ्ट बंद होने का सबसे खतरनाक असर सुरक्षा पर दिखाई दे रहा है। जल्दबाजी में कई लोग फुटओवर ब्रिज का उपयोग करने के बजाय नीचे से डिवाइडर पार कर सीधे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पार करते नजर आते हैं। जहां वाहनों की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक रहती है, वहां इस तरह सड़क पार करना किसी भी समय बड़े हादसे में बदल सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते लिफ्ट की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों से नहीं टाली जा सकेगी।
सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव पर बड़ा सवाल
करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सुविधाएं यदि नियमित रखरखाव के अभाव में बंद पड़ी रहें तो उनकी उपयोगिता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। तीन सप्ताह तक लिफ्ट खराब रहना केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि रखरखाव व्यवस्था की कमजोरी और जिम्मेदार संस्थाओं की उदासीनता को उजागर करता है।
जवाब चाहते हैं लोग
आखिर तीन सप्ताह से लिफ्ट बंद होने के बावजूद मरम्मत क्यों नहीं कराई गई ?
शिकायतों के बाद भी संबंधित एजेंसियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की ?
क्या सिस्टम किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है ?
यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी ?
क्षेत्रवासियों ने एनएचएआई और संबंधित एजेंसियों से फुटओवर ब्रिज की बंद पड़ी लिफ्ट को तत्काल चालू कराने, दोनों लिफ्टों का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने और ऐसी सार्वजनिक सुविधाओं की सतत निगरानी की मांग की है। उनका कहना है कि नागरिकों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना सरकार और संबंधित एजेंसियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिसे किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
