गौर होम्स एओए विवाद: हाईकोर्ट में हलफनामे के बाद नगर मजिस्ट्रेट ने वापस लिया विवादित आदेश, बिना शर्त मांगी माफी
पूर्व बोर्ड के खिलाफ पारित आदेश को स्वयं बताया त्रुटिपूर्ण, 21 मई को किया निरस्त
NEWS1UP
एओए/आरडब्ल्यूए डेस्क
गाजियाबाद। गोविंदपुरम स्थित गौर होम्स अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन से जुड़े बहुचर्चित विवाद में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान नगर मजिस्ट्रेट ने हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी और न्यायालय को अवगत कराया कि उन्होंने 20 फरवरी 2026 को पारित अपना विवादित आदेश त्रुटिपूर्ण मानते हुए 21 मई 2026 को वापस ले लिया है।
यह आदेश पूर्व एओए अध्यक्ष मुकेश पाल सिंह और बोर्ड सदस्य अभिषेक त्यागी के विरुद्ध नवनिर्वाचित अध्यक्ष अतुल त्यागी एवं सचिव कृष्णपाल बिष्ट की शिकायत पर पारित किया गया था।
आपत्तियों की अनदेखी के आरोप के बीच हुआ था आदेश
पूर्व नगर मजिस्ट्रेट सतीश चंद्र त्रिपाठी ने शिकायत के आधार पर यह टिप्पणी की थी कि पूर्व बोर्ड द्वारा वित्तीय अनियमितताएं की गईं तथा एओए के अभिलेखों का विधिवत हस्तांतरण नहीं किया गया। आदेश में यह भी कहा गया था कि इस प्रकरण की जांच पुलिस द्वारा की जा सकती है।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि आदेश पारित करने से पहले उनकी लिखित आपत्तियों पर विचार नहीं किया गया। अभिषेक त्यागी ने अपनी आपत्ति में स्पष्ट किया था कि वह बोर्ड में किसी पद पर नहीं हैं, जबकि शिकायत में उन्हें सचिव बताया गया। उनका दावा है कि इसके बावजूद उनकी बात सुने बिना आदेश पारित कर दिया गया।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, आदेश पर लगी रोक
विवादित आदेश के विरुद्ध अभिषेक त्यागी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए नगर मजिस्ट्रेट को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
इसके बाद नगर मजिस्ट्रेट ने न्यायालय में प्रस्तुत हलफनामे में आदेश को त्रुटिपूर्ण स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी मांगी और बताया कि 21 मई 2026 को उक्त आदेश वापस लिया जा चुका है।
यह विधिक प्रक्रिया की जीत: अभिषेक त्यागी

याचिकाकर्ता अभिषेक त्यागी ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि शिकायत के आधार पर उनकी आपत्तियों को दरकिनार कर ऐसा आदेश पारित किया गया, जो विधिक रूप से टिकाऊ नहीं था। उनके अनुसार शिकायत दुर्भावना और मानहानि की नीयत से की गई थी, जिसके कारण उन्हें उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम केवल एक सोसाइटी तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशनों में उत्पन्न होने वाले विवादों में भी यह संदेश देता है कि किसी भी प्रशासनिक आदेश से पहले सभी पक्षों को सुनना और विधिक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
क्या है पूरा मामला ?
गौर होम्स एओए के चुनाव 12 अक्टूबर 2025 को हुए थे। इसके बाद तत्कालीन अध्यक्ष मुकेश पाल सिंह ने 15 अक्टूबर 2025 को जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर एवं डिप्टी रजिस्ट्रार को शिकायत देकर आरोप लगाया कि नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के कुछ सदस्य चुनाव परिणामों की औपचारिक घोषणा और पदाधिकारियों के विधिवत मनोनयन से पहले ही एओए कार्यालय में प्रवेश कर दस्तावेज अपने कब्जे में ले गए।
इसके बाद 4 नवंबर 2025 को नवनिर्वाचित अध्यक्ष अतुल त्यागी और सचिव कृष्णपाल बिष्ट ने पूर्व पदाधिकारियों के विरुद्ध शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि कार्यालय के दस्तावेजों का विधिवत हस्तांतरण नहीं किया जा रहा है। इसी शिकायत के आधार पर नगर मजिस्ट्रेट ने 20 फरवरी 2026 को विवादित आदेश पारित किया था, जिसे बाद में स्वयं त्रुटिपूर्ण मानते हुए वापस ले लिया गया।
