7.5 किमी. लंबे कॉरिडोर पर बनेंगे पांच स्टेशन, लाखों लोगों की वर्षों पुरानी उम्मीद फिर जगी
नोएडा सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 तक पहुंचेगी
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विशेष संवाददाता
नई दिल्ली/नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों निवासियों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित मेट्रो परियोजना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। वर्षों से बेहतर सार्वजनिक परिवहन की प्रतीक्षा कर रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है कि नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) ने दावा किया है कि आगामी डेढ़ महीने के भीतर केंद्र सरकार से इस परियोजना को मंजूरी मिल सकती है। इसके बाद प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) के समक्ष रखा जाएगा।
पीआईबी स्तर पर मिली सहमति, अब कैबिनेट की बारी
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में आयोजित पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) की बैठक में नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। बताया जा रहा है कि परियोजना को पीआईबी स्तर पर सकारात्मक सहमति मिल चुकी है। अब संबंधित मंत्रालय की औपचारिक स्वीकृति के बाद प्रस्ताव कैबिनेट में जाएगा, जहां से अंतिम मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
एनएमआरसी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पीआईबी की सहमति मिल चुकी है, हालांकि इसकी औपचारिक अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया शीघ्र पूरी होगी।
900 करोड़ रुपये की परियोजना, सेक्टर-51 से सेक्टर-4 तक चलेगी मेट्रो
प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर की कुल लंबाई 7.5 किलोमीटर होगी, जिस पर पांच आधुनिक मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे। यह लाइन नोएडा सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 तक पहुंचेगी।
करीब 900 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के पूरा होने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बीच आवागमन कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा।
अगले वर्ष की शुरुआत में शुरू हो सकता है निर्माण कार्य
यदि कैबिनेट से समय पर मंजूरी मिल जाती है तो एनएमआरसी परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा। अधिकारियों का अनुमान है कि अगले वर्ष जनवरी-फरवरी तक निर्माण कार्य प्रारंभ किया जा सकता है। इससे वर्षों से लंबित इस परियोजना को आखिरकार धरातल पर उतरने का रास्ता मिल जाएगा।
लाखों लोगों को मिलेगी जाम और लंबी यात्रा से राहत
ग्रेटर नोएडा वेस्ट पिछले कुछ वर्षों में देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले आवासीय क्षेत्रों में शामिल हो चुका है। यहां हजारों आवासीय फ्लैटों और टाउनशिप में लाखों लोग रह रहे हैं, लेकिन सार्वजनिक परिवहन के सीमित विकल्पों के कारण अधिकांश लोगों को रोजाना निजी वाहन, कैब और साझा ऑटो पर निर्भर रहना पड़ता है।
परिणामस्वरूप नोएडा, दिल्ली और गाजियाबाद की ओर जाने वाले मार्गों पर भारी ट्रैफिक जाम, लंबा यात्रा समय और बढ़ता प्रदूषण आम समस्या बन चुके हैं। मेट्रो परियोजना के शुरू होने से इन समस्याओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
रियल एस्टेट और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया प्रोत्साहन
विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो कॉरिडोर केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे ग्रेटर नोएडा वेस्ट के रियल एस्टेट बाजार, व्यावसायिक गतिविधियों और निवेश को भी नई गति मिलेगी। बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और दैनिक यात्रियों के समय व खर्च दोनों में कमी आएगी।
वर्षों के इंतजार के बाद उम्मीद की नई किरण
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले हजारों परिवारों ने वर्षों पहले इस उम्मीद के साथ अपने घर खरीदे थे कि जल्द ही यहां मेट्रो सेवा शुरू होगी। हालांकि परियोजना लंबे समय तक विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अटकी रही, लेकिन अब सामने आई सकारात्मक प्रगति ने एक बार फिर लोगों की उम्मीदों को नई उड़ान दे दी है। यदि तय समयसीमा के अनुसार मंजूरी मिल जाती है तो ग्रेटर नोएडा वेस्ट के विकास को एक नई दिशा मिलने की संभावना है।