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हाउस टैक्स पर आर-पार के मूड में व्यापारी, मेयर के इस्तीफे की मांग!

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हाउस टैक्स के खिलाफ व्यापारी अब सड़क पर, तीन दिन बाद जुलूस

गोपीचंद बोले, मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा निर्णायक

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद।हाउस टैक्स की बढ़ी दरों को लेकर गाजियाबाद में नगर निगम और व्यापारियों के बीच टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। महानगर उद्योग व्यापार मंडल ने आज उड्डपी कृष्णा रेस्टोरेंट में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नगर निगम की टैक्स व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए और बढ़े हुए हाउस टैक्स को तत्काल वापस लेने की मांग दोहराई।

व्यापारियों ने साफ कर दिया कि मामला अब केवल टैक्स की दरों का नहीं है, बल्कि जनता और व्यापारियों पर लिए जा रहे फैसलों की जवाबदेही का है। इसी के साथ व्यापार मंडल ने मेयर के इस्तीफे की मांग को भी प्रमुखता से उठाया।

टैक्स बढ़ाने से पहले व्यापारियों की हालत देखी जाए

प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्यापार मंडल के अध्यक्ष गोपीचंद ने कहा कि व्यापारियों पर लगातार अलग-अलग मदों में आर्थिक बोझ बढ़ाया जा रहा है। ऐसे समय में हाउस टैक्स में कई गुना बढ़ोतरी व्यापार जगत के लिए बेहद कठिन स्थिति पैदा कर रही है।

गोपीचंद ने कहा कि व्यापारियों को टैक्स देने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन टैक्स की दर ऐसी होनी चाहिए जिसे आम व्यापारी वहन कर सके। उनका कहना है कि पुरानी दरों को आधार बनाकर आवश्यकतानुसार सीमित बढ़ोतरी की जा सकती है, लेकिन कमर्शियल संपत्तियों पर पांच से दस गुना तक बढ़ोतरी का आरोप गंभीर है।

आवासीय में राहत की औपचारिकता, कमर्शियल पर बोझ क्यों ? 

व्यापार मंडल का सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की उस नीति पर है जिसमें आवासीय संपत्तियों के मामले में कुछ राहत की बात सामने आई, लेकिन व्यापारियों के अनुसार कमर्शियल संपत्तियों पर बढ़े टैक्स का बोझ पर्याप्त रूप से कम नहीं हुआ।

व्यापारियों का कहना है कि दुकान, शोरूम, प्रतिष्ठान और अन्य व्यावसायिक संपत्तियां पहले से ही अनेक प्रकार के टैक्स और शुल्क का भुगतान करती हैं। ऐसे में हाउस टैक्स में भारी वृद्धि कारोबार की लागत को और बढ़ाएगी।

फैसले जनता के खिलाफ तो जिम्मेदारी किसकी ?

गोपीचंद ने कहा कि नगर निगम में चुने हुए जनप्रतिनिधियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता और व्यापारियों की आवाज को सदन तक पहुंचाना है। यदि व्यापारियों की लगातार आपत्तियों के बावजूद बढ़ी दरें लागू रहती हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जनप्रतिनिधियों की भूमिका आखिर क्या रह जाती है?

उन्होंने कहा कि व्यापार मंडल किसी भी ऐसे टैक्स के खिलाफ है जो बिना उचित राहत और व्यावहारिक समीक्षा के व्यापारियों पर थोप दिया जाए।

300 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का दावा

व्यापार मंडल का आरोप है कि कुछ मामलों में हाउस टैक्स में करीब 300 प्रतिशत तक की वृद्धि का बोझ सामने आया है। जुलाई में भी मंडल ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर पुरानी दरों के आधार पर टैक्स लेने और जरूरत पड़ने पर लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक सीमित वृद्धि की मांग की थी।

व्यापारियों का कहना है कि जब प्रदेश के अन्य हिस्सों में पुरानी दरों को आधार बनाकर व्यवस्था चल रही है, तो गाजियाबाद में इतनी बड़ी वृद्धि का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री की घोषणा बनाम स्थानीय हकीकत

व्यापारियों ने मुख्यमंत्री स्तर से टैक्स में राहत से जुड़ी घोषणाओं का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि यदि राहत का उद्देश्य आम नागरिक और व्यापारी को राहत देना है तो उसका वास्तविक लाभ कमर्शियल संपत्तियों तक क्यों नहीं पहुंच रहा ?

तीन दिन बाद सड़क पर उतरेंगे व्यापारी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्यापार मंडल ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया। व्यापारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो तीन दिन बाद जुलूस निकालकर विरोध दर्ज कराया जाएगा और इसके बाद आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

यानी साफ है कि हाउस टैक्स विवाद अब बंद कमरे की बातचीत तक सीमित रहने वाला नहीं है।

जवाबदेही किसकी ?

इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यही है कि व्यापारी अब केवल टैक्स कम कराने की मांग नहीं कर रहे। वे यह सवाल भी उठा रहे हैं कि जिस शहर की अर्थव्यवस्था व्यापारियों के कारोबार पर टिकी है, उसी शहर में टैक्स नीति बनाते समय उनकी आर्थिक स्थिति को कितना महत्व दिया गया ?

महानगर उद्योग व्यापार मंडल के तेवरों से संकेत साफ हैं कि हाउस टैक्स पर अब समझौते से ज्यादा जवाबदेही की मांग है। और यदि तीन दिन बाद व्यापारी सड़कों पर उतरते हैं, तो गाजियाबाद में हाउस टैक्स का मुद्दा एक बार फिर नगर निगम की राजनीति के केंद्र में होगा।

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