गाजियाबाद के ‘सेक्स रैकेट’ केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ग्राहक बनकर पहुंचा था युवक, कोर्ट ने रद्द किया मुकदमा
दिसंबर 2023 में पुलिस ने मकान पर मारा था छापा, 16 लोग पकड़े गए थे
युवक पर ITPA की धाराओं में दर्ज हुआ था केस
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
प्रयागराज। गाजियाबाद में दिसंबर 2023 में कथित सेक्स रैकेट के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अहम फैसले के बाद कानूनी बहस के केंद्र में है। पुलिस छापे के दौरान पकड़े गए एक युवक के खिलाफ दर्ज मुकदमे को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ ग्राहक के रूप में वेश्यालय जाने के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 (ITPA) की संबंधित धाराओं में आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।

जस्टिस गौतम चौधरी ने 11 अगस्त को दिए आदेश में कानून की धाराओं के दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा कि वेश्यालय चलाना, उसका प्रबंधन करना, किसी व्यक्ति को वेश्यावृत्ति के लिए उपलब्ध कराना, उकसाना या उससे होने वाली कमाई पर निर्भर रहना अलग-अलग अपराध हैं। लेकिन महज ग्राहक के रूप में वहां मौजूद होना इन प्रावधानों के तहत अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
गाजियाबाद में छापा, 16 लोग पकड़े गए और शुरू हुआ मुकदमा
मामला दिसंबर 2023 का है। गाजियाबाद पुलिस ने एक मकान पर छापा मारकर 16 लोगों को मौके से पकड़ा था। कार्रवाई के बाद एक युवक के खिलाफ अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और 7 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
युवक ने पुलिस कार्रवाई और अपने खिलाफ शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या केवल ग्राहक के रूप में वेश्यालय में मौजूद व्यक्ति पर इन धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है ?
हाईकोर्ट ने इसका जवाब नकारात्मक दिया।
कोर्ट ने समझाया, किस भूमिका के लिए कौन-सी धारा ?
अदालत ने माना कि ITPA की धारा 3, 5 और 7 का उद्देश्य मुख्य रूप से वेश्यालय संचालन, उसके प्रबंधन तथा वेश्यावृत्ति से जुड़े दूसरे आपराधिक कृत्यों पर कार्रवाई करना है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ वेश्यालय चलाने, उसका प्रबंधन करने, किसी को वेश्यावृत्ति के लिए उपलब्ध कराने या उससे जुड़ी अन्य आपराधिक भूमिका का आरोप नहीं है, तो केवल ग्राहक होने के आधार पर इन धाराओं को उस पर लागू नहीं किया जा सकता।
यानी पुलिस की नजर में किसी स्थान पर मौजूद हर व्यक्ति की भूमिका एक जैसी नहीं मानी जा सकती।
हाईकोर्ट ने रद्द किया आरोपपत्र और आपराधिक कार्यवाही
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने युवक के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र तथा उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। अदालत की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश में पुलिस की छापेमारी के दौरान कथित वेश्यालयों से पकड़े जाने वाले लोगों के खिलाफ अलग-अलग कानूनी भूमिकाओं का निर्धारण अब महत्वपूर्ण हो जाता है।
गाजियाबाद पुलिस की कार्रवाई पर भी उठेगा सवाल
हाईकोर्ट का फैसला यह नहीं कहता कि वेश्यालय से जुड़े सभी कृत्य कानून के दायरे से बाहर हैं। बल्कि अदालत ने संबंधित धाराओं के कानूनी दायरे और आरोपी की वास्तविक भूमिका पर जोर दिया है। इसलिए भविष्य की ऐसी कार्रवाइयों में यह सवाल महत्वपूर्ण रहेगा कि पुलिस द्वारा पकड़े गए प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ किस आधार पर कौन-सी धारा लगाई गई और उस व्यक्ति की कथित भूमिका क्या थी।
गाजियाबाद के 2023 के इस मामले में हाईकोर्ट का आदेश इसी बुनियादी कानूनी सवाल को सामने लाता है, सिर्फ किसी जगह पर ग्राहक के रूप में मौजूद होना और वेश्यावृत्ति के कारोबार को संचालित करना, कानून की नजर में एक ही बात नहीं है।
