गौड़ होम्स AOA के वित्तीय अधिकारों पर हाईकोर्ट की सख्ती, डिप्टी रजिस्ट्रार ने खर्चों की सीमा तय की!
कार्यकारी अध्यक्ष और सचिव केवल आवश्यक सेवाओं पर ही कर सकेंगे खर्च
केनरा बैंक से चेक के जरिए होगा भुगतान, पूर्व अध्यक्षों और सचिवों को भी नोटिस जारी
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। आवासीय सोसाइटियों में एसोसिएशन के वित्तीय अधिकारों, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चल रहे विवादों के बीच गोविंदपुरम स्थित गौड़ होम्स अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन का मामला महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स ने एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष और सचिव को वित्तीय लेन-देन के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके तहत खर्चों को दैनिक आवश्यकताओं तक सीमित रखते हुए भुगतान की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है।

डिप्टी रजिस्ट्रार के 21 अक्टूबर के पत्र के मुताबिक, एसोसिएशन की धनराशि से बिजली बिल, रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन और सुरक्षा गार्डों के भुगतान जैसे आवश्यक खर्च ही किए जा सकेंगे। भुगतान केवल केनरा बैंक के खाते से चेक के माध्यम से करना होगा। नकद लेन-देन पर रोक के साथ बैंक में जमा फिक्स्ड डिपॉजिट को भी प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
इस कार्रवाई का दायरा वर्तमान प्रबंधन तक सीमित नहीं है।
एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्षों और सचिवों को भी नोटिस जारी कर वित्तीय लेन-देन तथा ऑडिट से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया है।
इससे मौजूदा व्यवस्था के साथ-साथ पूर्व पदाधिकारियों के कार्यकाल के वित्तीय रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आए हैं।
2012 से अब तक के वित्तीय रिकॉर्ड तलब
डिप्टी रजिस्ट्रार ने वर्ष 2012 से अब तक की ऑडिट बैलेंस शीट कार्यालय में जमा कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, वर्ष 2021 से 2026 के दौरान किन-किन मदों में कितना खर्च किया गया, इसका विस्तृत ब्योरा भी मांगा गया है। किन बैलेंस शीट का ऑडिट कराया गया, इसकी जानकारी उपलब्ध कराने को भी कहा गया है।
यह निर्देश ऐसे समय आया है, जब एसोसिएशन के वित्तीय संचालन को लेकर न्यायालय के आदेशों का अनुपालन महत्वपूर्ण हो गया है। खर्चों का मदवार विवरण और ऑडिट रिकॉर्ड यह स्पष्ट करने में सहायक होंगे कि निर्धारित अवधि में धनराशि का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया।
हाईकोर्ट ने पहले ही तय कर दी थी वित्तीय व्यवस्था
डिप्टी रजिस्ट्रार के पत्र में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 10 सितंबर 2020 के आदेश का उल्लेख है। इस आदेश के तहत एसोसिएशन को अंतरिम व्यवस्था के रूप में केनरा बैंक के खाते का संचालन करने तथा बिजली के बकाये, रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन और सुरक्षा गार्डों के भुगतान जैसे आवश्यक खर्च करने की अनुमति दी गई थी।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि भुगतान चेक के माध्यम से किए जाएं, नकद लेन-देन न हो और बैंक में जमा फिक्स्ड डिपॉजिट सुरक्षित रहे। डिप्टी रजिस्ट्रार के ताजा पत्र में इसी न्यायिक व्यवस्था के अनुपालन पर जोर दिया गया है।
पत्र में इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित संबंधित याचिकाओं और उनमें पारित आदेशों का भी संदर्भ दिया गया है। ऐसे में एसोसिएशन के पदाधिकारियों के लिए न्यायालय द्वारा निर्धारित वित्तीय सीमाओं का पालन करना और मांगे गए अभिलेख प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है।
फ्लैट मालिकों के धन और जवाबदेही का सवाल
अपार्टमेंट सोसाइटियों में निवासियों से एकत्र रखरखाव शुल्क और अन्य धनराशि का संबंध सीधे उनकी साझा सुविधाओं और दैनिक जरूरतों से होता है। इसलिए इस धन का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप होना, भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और नियमित ऑडिट कराना पारदर्शी प्रबंधन की बुनियादी शर्तें हैं।
गौड़ होम्स AOA के मामले में कार्यकारी अध्यक्ष और सचिव के लिए खर्चों की सीमा निर्धारित करना तथा पूर्व पदाधिकारियों से वित्तीय रिकॉर्ड तलब करना इसी जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। अब संबंधित पदाधिकारियों की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज और खर्चों का विवरण आगे की प्रशासनिक एवं न्यायिक कार्यवाही में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
