October 27, 2026
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ऑफिसर सिटी-2 में कुत्तों का आतंक! 65 वर्षीय बुजुर्ग पर हमला!!

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दहशत में निवासी!

छह महीने में तीन बार पहुंची निगम की टीम, फिर भी नहीं निकला समाधान

सवाल: पशु कल्याण के नियमों के बीच इंसानी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी ?

 

 

NEWS1UP

संवाददाता

गाजियाबाद। अपने ही घर के बाहर निकलने में डर, सुबह की सैर पर हमले का खतरा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता। राजनगर एक्सटेंशन की ऑफिसर सिटी-2 सोसाइटी में आवारा कुत्तों की समस्या अब निवासियों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। आरोप है कि आए दिन होने वाले हमलों की शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ताजा मामला रविवार सुबह का है, जब मॉर्निंग वॉक से लौट रहे करीब 65 वर्षीय बुजुर्ग पर कुत्ते ने हमला कर दिया। छह महीने में तीन बार नगर निगम की टीम सोसाइटी पहुंची, लेकिन निवासियों का कहना है कि राहत अब भी दूर है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि-

पशु कल्याण के नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन क्या इंसानी सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का समाधान यूं ही टलता रहेगा ?

मॉर्निंग वॉक से लौट रहे बुजुर्ग पर हमला

सोसाइटी के विला नंबर-7 में रहने वाले देवकिशन मुदरा रविवार सुबह करीब 6:30 बजे टहलकर अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान अचानक पीछे से एक कुत्ते ने उन पर हमला कर दिया। उनकी पुत्रवधू नीलम के मुताबिक, घटना के बाद से बुजुर्ग काफी घबराए हुए हैं। उनका उपचार शुरू करा दिया गया है। एक इंजेक्शन लग चुका है, जबकि चार और लगने बाकी हैं। नीलम ने मेंटेनेंस कार्यालय में मौखिक शिकायत भी दर्ज कराई है।

आधा दर्जन से अधिक कुत्ते, एक को देखकर रास्ता बदलते हैं लोग

निवासियों के मुताबिक, सोसाइटी में आधा दर्जन से अधिक कुत्ते घूमते रहते हैं। इनमें कुछ के आक्रामक व्यवहार से लोग परेशान हैं। सफेद और काले रंग के एक कुत्ते का खौफ इस कदर बताया जा रहा है कि उसे देखते ही निवासी रास्ता बदल लेते हैं।

लोगों का दावा है कि हर 10 से 15 दिन में कुत्तों के हमले की कोई न कोई घटना सामने आती है। कुत्ते ऊपरी मंजिलों तक पहुंचकर फ्लैटों के सामने बैठ जाते हैं। निवासियों का यह भी कहना है कि कुछ कुत्ते पक्षियों पर झपटकर उन्हें मार देते हैं। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।

छह महीने में तीन बार पहुंची निगम की टीम, कार्रवाई बेअसर ?

सोसाइटी की निर्वाचित एओए के सचिव गौरव सोनी के मुताबिक, नगर निगम को कई बार शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन कोई खास राहत नहीं मिली। उन्होंने बताया कि पिछले छह महीनों में निगम की टीम तीन बार सोसाइटी आई। पहली बार दो कुत्ते पकड़े गए, दूसरी बार एक कुत्ता पकड़ा गया, जबकि तीसरी बार टीम किसी कुत्ते को नहीं पकड़ सकी।

सोनी के अनुसार,

पहले पकड़े गए कुत्तों को भी नियमों के तहत जांच और टीकाकरण के बाद वापस सोसाइटी में छोड़ दिया गया। बुजुर्ग पर ताजा हमले के बाद फिर से नगर निगम में शिकायत करने की बात कही गई है।

यहां सवाल है कि जब शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं और निगम की टीम कई बार परिसर का दौरा कर चुकी है, तो समस्या के समाधान के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए ? यदि कुत्तों को नियमों के तहत वापस छोड़ना जरूरी है, तो आक्रामक व्यवहार और हमलों की शिकायतों से निपटने की व्यवस्था क्या है ?

एओए की शिकायतें जारी, निवासी निर्णायक कार्रवाई के इंतजार में

निवासी एओए के प्रयासों को नाकाफी बताते हुए निर्णायक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका दावा है कि कुत्तों के डर के कारण जरूरी सामान की डिलीवरी करने वाले कर्मचारी भी सोसाइटी में आने से कतराने लगे हैं। यदि स्थिति ऐसी है, तो समस्या अब केवल हमलों तक सीमित नहीं, बल्कि सामान्य जनजीवन को भी प्रभावित कर रही है।

एओए का कहना है कि नगर निगम से शिकायत की गई है। वहीं, निवासियों की मांग है कि शिकायतों के सिलसिले से आगे बढ़कर समस्या का प्रभावी समाधान निकाला जाए। नगर निगम को भी स्पष्ट करना चाहिए कि पिछली शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और ताजा घटना के बाद आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

पशु कल्याण के नियम बनाम इंसानी सुरक्षा

आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में पशु कल्याण संबंधी नियमों का पालन आवश्यक है। लेकिन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जरूरत ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें पशुओं के प्रति मानवीय व्यवहार बनाए रखते हुए आक्रामक कुत्तों से जुड़ी शिकायतों पर भी प्रभावी कार्रवाई हो।

सवाल पशु कल्याण के नियमों का नहीं, उनके बीच इंसानी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाने का है।

आखिर हमलों की शिकायतों के बाद भी निवासियों को राहत क्यों नहीं मिल रही ? क्या संबंधित विभाग किसी गंभीर घटना के बाद ही सक्रिय होंगे ?

ऑफिसर सिटी-2 के निवासियों को अब एक और शिकायत या आश्वासन नहीं, बल्कि समाधान चाहिए। वे अपने ही परिसर में बिना भय के आवाजाही करना चाहते हैं। एओए और नगर निगम को बताना होगा कि इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

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