AOA के हिसाब-किताब पर प्रशासन का शिकंजा, चार सप्ताह में जांच रिपोर्ट तलब!
ATS एडवांटेज के अध्यक्ष-सचिव को डिप्टी रजिस्ट्रार का आदेश
पूर्व में निरस्त ऑडिट के बाद फिर खुली वित्तीय जांच की फाइल, बैंक खातों से संपत्तियों तक होगी पड़ताल!
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। सोसाइटियों में पदाधिकारियों की मनमानी और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठते सवालों के बीच इंदिरापुरम की एटीएस एडवांटेज सोसाइटी की AOA अब प्रशासनिक जांच के दायरे में है। डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स ने एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव को आदेश जारी कर वित्तीय मामलों की स्वतंत्र जांच कराने तथा चार सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

16 निवासियों की शिकायत बनी कार्रवाई का आधार
डिप्टी रजिस्ट्रार के 28 अक्टूबर के आदेश के मुताबिक, 16 निवासियों ने 16 अक्टूबर को संयुक्त शिकायत देकर वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक के खातों का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराने, परियोजनावार वसूली और खर्चों की जांच तथा वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित होने तक प्रस्तावित हैंडओवर एमओयू की प्रक्रिया रोकने की मांग की थी।
शिकायत में यह भी सामने आया कि वित्तीय अनियमितताओं और पारदर्शिता के सवाल पहले भी उठ चुके हैं। पूर्व में फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया गया था, लेकिन सोसाइटी का हस्तांतरण नहीं होने का आधार लेकर उसे निरस्त कर दिया गया। नतीजा यह रहा कि वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच आगे नहीं बढ़ सकी।
फॉरेंसिक ऑडिटर को प्रवेश नहीं देने पर प्रशासन की नाराजगी
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पूर्व में फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दिए जाने के बावजूद जांच दल/फॉरेंसिक ऑडिटर को सोसाइटी परिसर में प्रवेश नहीं दिए जाने का मामला भी सामने आया। डिप्टी रजिस्ट्रार ने इसे गंभीरता से लिया है। आदेश में वित्तीय मामलों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए इस तरह की बाधा को उचित नहीं माना गया है।

हस्तांतरण का तर्क जांच रोकने का आधार नहीं
इस बार डिप्टी रजिस्ट्रार ने उत्तर प्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 की धारा 24 के तहत जांच की कार्रवाई आगे बढ़ाई है। आदेश का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि सोसाइटी का हस्तांतरण न होने की दलील के बावजूद AOA के अपने खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच की आवश्यकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बैंक खाते, संपत्तियां और लेन-देन सब जांच के घेरे में
जांच के लिए अनुज गोयल, रेसुल सिंघल एंड कंपनी को नामित किया गया है। जांच अधिकारी वर्ष 2023-24 से अद्यतन अवधि तक के ऑडिट अभिलेखों, चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों और सोसाइटी के समस्त वित्तीय लेन-देन की पड़ताल करेंगे। चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी। जांच का खर्च भी एसोसिएशन को ही उठाना होगा।
डिप्टी रजिस्ट्रार निखलेश राजन ने कहा कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी सोसाइटियों के पदाधिकारियों के लिए भी चेतावनी
एटीएस एडवांटेज का मामला उन तमाम सोसाइटियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है, जहां AOA पदाधिकारी निवासियों से मेंटेनेंस के नाम पर नियमित धन तो लेते हैं, लेकिन आय-व्यय का पारदर्शी हिसाब देने से बचते हैं। प्रशासनिक कार्यालयों के आदेशों को हल्के में लेना और शिकायतों को नजरअंदाज करना किसी भी एसोसिएशन को कानून के दायरे से बाहर नहीं कर सकता।
