भीषण गर्मी में बिजली पर ‘वार रूम’ मोड में योगी सरकार
बढ़ती मांग, ट्रांसफॉर्मर संकट और स्मार्ट मीटर विवाद के बीच मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी
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भूमेश शर्मा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के साथ लगातार बढ़ रही बिजली मांग ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर साफ संदेश दिया कि प्रदेश में किसी भी कीमत पर बिजली संकट नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई होगी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग को लगभग “वार रूम मोड” में काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली आपूर्ति केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि जनजीवन, सिंचाई, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। मुख्यमंत्री ने फील्ड स्तर पर त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखने, शिकायतों का तत्काल निस्तारण करने और उपभोक्ताओं को समयबद्ध जानकारी देने पर विशेष जोर दिया।

बिजली मांग ने तोड़े रिकॉर्ड, यूपी देश में दूसरे स्थान पर
समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों ने प्रदेश में बढ़ती बिजली खपत की तस्वीर स्पष्ट कर दी। अधिकारियों ने बताया कि 15 अप्रैल से 22 मई के बीच औसत बिजली मांग 501 मिलियन यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन तक पहुंच गई। वहीं पीक डिमांड 29,831 मेगावाट से बढ़कर 30,339 मेगावाट तक पहुंच चुकी है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार 20, 21 और 22 मई को उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक बिजली मांग पूरी करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। इस चुनौती से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने 12 राज्यों के साथ पावर बैंकिंग व्यवस्था भी लागू की है ताकि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
उत्पादन क्षमता में 86 प्रतिशत वृद्धि का दावा
बैठक में दावा किया गया कि वर्ष 2022 की तुलना में वर्ष 2026 तक उत्तर प्रदेश की विद्युत उत्पादन क्षमता में 86 प्रतिशत वृद्धि हुई है। वर्तमान में राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल उत्पादन क्षमता 13,388 मेगावाट पहुंच चुकी है। इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय विद्युत गृहों का बड़ा योगदान है।
इसके अतिरिक्त गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से लगभग 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन भी किया जा रहा है। सरकार अब भविष्य की मांग को देखते हुए विंड एनर्जी, बैटरी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो और हाइब्रिड परियोजनाओं पर भी तेजी से काम कर रही है। वर्ष 2029 तक अतिरिक्त 10,719 मेगावाट क्षमता जोड़ने की योजना बनाई गई है।
ट्रांसमिशन नेटवर्क पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने ट्रांसमिशन नेटवर्क को बिजली व्यवस्था की “रीढ़” बताते हुए इसे और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में इस समय 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें संचालित हैं और 715 उपकेंद्रों के माध्यम से 2,05,632 एमवीए क्षमता उपलब्ध कराई जा रही है।
अधिकारियों ने दावा किया कि ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत तक पहुंच गई है जबकि पारेषण हानियां घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गर्मी के मौसम में तकनीकी बाधाएं न्यूनतम रहनी चाहिए और हर स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग हो।
आंधी-तूफान के बाद बिजली व्यवस्था पर परीक्षा
बैठक में यह भी सामने आया कि 4, 7 और 15 मई को आए आंधी-तूफान के कारण प्रदेश के 38 सब-स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए थे। हालांकि विभाग ने दावा किया कि मरम्मत और बहाली का कार्य तेजी से पूरा कर लिया गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए फील्ड टीमें पूरी तरह तैयार रहें। साथ ही भूमिगत केबल वाले क्षेत्रों में खुदाई से पहले सक्षम प्राधिकारी की अनुमति सुनिश्चित करने को भी कहा गया ताकि अनावश्यक बिजली बाधित न हो।
ट्रांसफॉर्मर क्षति में कमी, फिर भी सतर्कता के निर्देश
ऊर्जा विभाग ने ट्रांसफॉर्मर क्षति में बड़ी कमी आने का दावा किया। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में जहां 429 पावर ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 87 रह गई। इसी तरह 100 केवीए से अधिक क्षमता वाले वितरण ट्रांसफॉर्मरों की क्षति दर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री ने इस सुधार को सकारात्मक बताते हुए कहा कि सुरक्षा तंत्र, समयबद्ध मरम्मत और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।
स्मार्ट मीटर पर बड़ा फैसला, प्रीपेड से पोस्टपेड व्यवस्था
प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर लगातार उठ रही शिकायतों के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बैठक में बताया गया कि अब तक 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को फिर से पोस्टपेड व्यवस्था में परिवर्तित कर दिया गया है।
जून 2026 से स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को हर माह 1 से 10 तारीख के बीच पोस्टपेड बिल जारी किए जाएंगे। उपभोक्ताओं को एसएमएस, व्हाट्सऐप और ई-मेल के माध्यम से बिल उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही 15 मई से 30 जून तक विशेष कैंप लगाकर स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है।
1912 हेल्पलाइन की होगी निगरानी
मुख्यमंत्री ने उपभोक्ता सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि नवंबर 2025 से नई एकीकृत 1912 कॉल सेंटर व्यवस्था लागू की गई है। लखनऊ और नोएडा से संचालित इस प्रणाली में कॉल हैंडलिंग क्षमता 75 हजार से बढ़ाकर 90 हजार प्रतिदिन कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत को स्वयं कॉल सेंटर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपभोक्ता को यह भी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए कि समस्या कब तक दूर होगी।
