[t4b-ticker]

पंचशील प्रिमरोज में बदबूदार पानी के बीच रहने को मजबूर सैकड़ों परिवार

0
PF

बिल्डर पर मनमानी और जीडीए पर संरक्षण के आरोप, पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने पर भी उठे सवाल

NEWS1UP

एओए/आरडब्ल्यूए डेस्क

गाजियाबाद। गोविंदपुरम अनाज मंडी के सामने स्थित पंचशील प्रिमरोज आवासीय सोसाइटी एक बार फिर गंभीर अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। आधुनिक सुविधाओं से लैस होने का दावा करने वाली इस बहुमंजिला सोसाइटी में इन दिनों सीवर का गंदा और बदबूदार पानी खुलेआम बह रहा है। हालात ऐसे हैं कि निवासी न केवल दुर्गंध के बीच रहने को विवश हैं, बल्कि संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

निवासियों का कहना है कि यह कोई आकस्मिक समस्या नहीं, बल्कि लम्बे समय से चली आ रही एक स्थायी प्रशासनिक और तकनीकी विफलता है, जिसका आज तक कोई ठोस समाधान नहीं किया गया।

एओए अध्यक्ष नीरज सिंह कहते हैं-

नीरज सिंह, एओए अध्यक्ष

“समस्या की जड़ उस समय रखी गई जब बिल्डर ने अपने नव-निर्मित लो-राइज प्रोजेक्ट की सीवर निकासी के लिए अलग व्यवस्था करने के बजाय उसे हाई-राइज प्रोजेक्ट की मौजूदा सीवर लाइन से जोड़ दिया। उनका दावा है कि मूल स्वीकृत योजना में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था और बाद में यह बदलाव किया गया, जिससे पूरी सीवर व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगा।”

निवासियों का आरोप है कि यह सब संबंधित अधिकारियों की जानकारी और संरक्षण में हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार, सोसाइटी की सीवर लाइन गोविंदपुरम की मुख्य सीवर लाइन से जुड़ी हुई है। जैसे ही मुख्य लाइन पर थोड़ा भी दबाव बढ़ता है, पूरा सीवर बैक फ्लो होकर सोसाइटी परिसर में फैलने लगता है। उनका कहना है कि यदि लो-राइज परियोजना की अलग सीवर लाइन बनाई गई होती तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती।

बदबूदार पानी में से मंदिर से लौटता श्रद्धालु

निवासी सरिता गुप्ता का कहना है कि-

निवासी सरिता गुप्ता

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोसाइटी परिसर स्थित श्री राधा-कृष्ण मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को गंदे और बदबूदार सीवर के पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। निवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर फ्लैट खरीदने के बावजूद उन्हें ऐसी परिस्थितियों में रहना पड़ रहा है, जो किसी अव्यवस्थित बस्ती से भी बदतर महसूस होती हैं।

सीवर लाइन अधूरी थी, फिर पूर्णता प्रमाण पत्र कैसे मिला ?

उर्वशी गुप्ता, एओए मेंबर

स्थानीय निवासी एओए कार्यकारिणी मेंबर उर्वशी गुप्ता सवाल उठाती हैं कि- 

“जब लो-राइज परियोजना की अलग सीवर लाइन का निर्माण ही नहीं हुआ था, तो गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने आखिर किस आधार पर बिल्डर को पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया ? यदि आवश्यक आधारभूत सुविधाएं अधूरी थीं, तो क्या यह प्रमाण पत्र नियमों के अनुरूप था ? इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं की गई।”

जवाबदेही से कब तक बचेंगे जिम्मेदार ?

यह मामला केवल एक सोसाइटी में सीवर ओवरफ्लो का नहीं, बल्कि शहरी नियोजन, निर्माण मानकों के पालन और नियामक संस्थाओं की जवाबदेही की भी परीक्षा है। यदि वास्तव में स्वीकृत मानचित्रों से हटकर सीवर व्यवस्था में बदलाव किए गए और अधूरी आधारभूत सुविधाओं के बावजूद पूर्णता प्रमाण पत्र जारी हुआ, तो इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

निवासी अब मांग कर रहे हैं कि पूरे प्रकरण की तकनीकी जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और बिल्डर की जवाबदेही तय की जाए तथा लो-राइज और हाई-राइज परियोजनाओं की सीवर व्यवस्था को अलग कर स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!