गाजियाबाद पर पर्यावरण मंत्रालय को क्या गुमराह किया गया ?
नगर निगम की रिपोर्ट पर कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी का दस्तावेज़ी पलटवार, कई दावों पर उठाए गंभीर सवाल
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समक्ष अब एक ही मामले में दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आ गई हैं। एक ओर नगर निगम गाजियाबाद ने मंत्रालय को भेजी अपनी रिपोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कई कार्यों और उपलब्धियों का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर फ्लैट ओनर्स फेडरेशन एवं आरडब्ल्यूए फेडरेशन गाजियाबाद के चेयरमैन तथा कोरवा-यूपी के मुख्य संरक्षक कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने बिंदुवार प्रतिवेदन भेजकर इन दावों को भ्रामक और जमीनी हकीकत से अलग बताया है।
कर्नल त्यागी ने बताया कि 1 जून 2026 को उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर गाजियाबाद में वायु प्रदूषण कम करने के लिए 11 सुझाव दिए थे। मंत्रालय ने इन सुझावों पर नगर निगम से रिपोर्ट मांगी, जिसके जवाब में निगम ने इलेक्ट्रिक बसों, ई-वेस्ट प्रबंधन, वैज्ञानिक कचरा निस्तारण, ग्रीन क्रिमेशन सिस्टम, सीसीटीवी नेटवर्क और अन्य पर्यावरणीय उपायों का उल्लेख किया।
हालांकि, 1 जुलाई 2026 को मंत्रालय को भेजे अपने प्रतिवेदन में कर्नल त्यागी ने नगर निगम के कई दावों पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि गाजियाबाद में आज तक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के अनुरूप एक भी ट्रेंच-टाइप सेनेटरी लैंडफिल विकसित नहीं की गई, जबकि रिपोर्ट में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन का दावा किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम द्वारा बताए गए पांच ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर और पांच विशेष वाहनों की जानकारी अधिकांश नागरिकों को नहीं है। यदि ऐसी व्यवस्था संचालित है तो उसका सार्वजनिक विवरण जारी किया जाना चाहिए।
कर्नल त्यागी ने हिंडन श्मशान घाट में तीन ग्रीन क्रिमेशन सिस्टम होने के दावे को भी चुनौती देते हुए कहा कि वर्ष 2013 में केवल दो मोक्षदा सिस्टम एक निजी संस्था द्वारा लगाए गए थे और नगर निगम ने स्वयं एक भी नया हरित क्रिमेशन सिस्टम स्थापित नहीं किया। वहीं वर्टिकल गार्डनिंग की विफलता के लिए जनता को जिम्मेदार ठहराने पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए इसे प्रशासनिक जवाबदेही से बचने का प्रयास बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कार्रवाई का अधिकार अन्य एजेंसियों के पास है, तो नगर निगम ने ऐसे उद्योगों के खिलाफ संबंधित विभागों को प्रभावी कार्रवाई के लिए कितनी बार लिखा, यह भी सार्वजनिक होना चाहिए। साथ ही महंगे एयर प्यूरीफायर के तर्क को भी उन्होंने गाजियाबाद जैसे अत्यधिक प्रदूषित शहर के संदर्भ में अपर्याप्त बताया।
कर्नल त्यागी ने कहा कि उन्होंने मंत्रालय को प्रत्येक बिंदु पर दस्तावेज़ों सहित अपना प्रतिवेदन भेज दिया है और आवश्यकता पड़ने पर विस्तृत तथ्य भी उपलब्ध कराए जाएंगे। अब निगाहें पर्यावरण मंत्रालय पर हैं कि वह नगर निगम की रिपोर्ट और काउंटर प्रतिवेदन का स्वतंत्र सत्यापन कराता है या नहीं। यदि ऐसा होता है तो गाजियाबाद में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सरकारी दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
