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3 घंटे का घोषित शटडाउन बना 18 घंटे का बिजली संकट, गोल्फलिंक्स-लैंडक्राफ्ट के हजारों परिवार बेहाल

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बिजली विभाग ने टाउनशिप के अंदर तकनीकी खराबी को बताया वजह, मेंटिनेंस एजेंसी पर लापरवाही के आरोप

लाखों रुपये का अतिरिक्त डीजल खर्च, अब विद्युत व्यवस्था के स्वतंत्र ऑडिट की मांग तेज

NEWS1UP

विशेष संवाददाता

गाजियाबाद। एनएच-9 स्थित गोल्फलिंक्स-लैंडक्राफ्ट टाउनशिप में शनिवार को घोषित तीन घंटे का बिजली शटडाउन देखते ही देखते करीब 18 घंटे लंबे बिजली संकट में बदल गया। सुबह लगभग 9 बजे बंद हुई बिजली रविवार तड़के करीब 3 बजे ही पूरी तरह सामान्य हो सकी। इस दौरान टाउनशिप की हजारों आबादी भीषण उमस और गर्मी के बीच बिजली संकट से जूझती रही। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, बीमार लोगों, छोटे बच्चों तथा बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले परिवारों को उठानी पड़ी।

गोलफलिंक्स-लैंडक्राफ्ट टाउनशिप में फॉल्ट ढूंढते इलेक्ट्रीशियन और निवासी

बिजली विभाग ने पहले से सूचना जारी कर बताया था कि पेड़ों की छंटाई के कारण सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। निर्धारित समय पूरा होने के बाद विभाग ने बिजली आपूर्ति बहाल कर दी, लेकिन इसी दौरान टाउनशिप के भीतर तकनीकी खराबी आ गई। इसके बाद पूरी टाउनशिप की बिजली फिर गुल हो गई और देर रात तक हालात सामान्य नहीं हो सके।

गोल्फ लिंक-लैंडक्राफ्ट टाउनशिप में लैंडक्राफ्ट, स्कार्डी ग्रीन और आशियाना ली रेजीडेंसी जैसी बहुमंजिला सोसायटियों के अलावा विला और प्लॉट क्षेत्र मिलाकर हजारों परिवार निवास करते हैं। लंबे समय तक बिजली बाधित रहने से लिफ्ट, पानी की आपूर्ति और अन्य आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित रहीं। कई परिवारों ने दिन के साथ-साथ पूरी रात भी जनरेटर के भरोसे बिताई, जबकि आशियाना ली रेजीडेंसी के निवासियों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ी, क्योंकि वहां जनरेटर पर AC चलाने की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

फॉल्ट टाउनशिप के अंदर था: बिजली विभाग

बिजली विभाग के अवर अभियंता प्रमोद कुमार के अनुसार विभाग ने केवल तीन घंटे का शटडाउन लिया था और दोपहर बाद अपनी ओर से बिजली आपूर्ति बहाल कर दी थी। उनके मुताबिक इसके बाद टाउनशिप के भीतर पहले करंट ट्रांसफार्मर (सीटी) में खराबी आई। उसे ठीक किए जाने के बाद आंतरिक ब्रेकर फट गया, जिसके कारण बिजली आपूर्ति दोबारा बाधित हो गई।

उन्होंने बताया कि टाउनशिप के अंदर बार-बार आने वाली तकनीकी खराबियों के कारण विभाग को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

गौरतलब है कि लालकुआं बिजलीघर से गोल्फ लिंक-लैंडक्राफ्ट के लिए अलग विद्युत लाइन संचालित होती है, जिससे आगे स्थित महागुनपुरम सोसायटी को भी बिजली आपूर्ति की जाती है।

हर साल दोहराता है बिजली संकट

स्थानीय निवासियों का कहना है कि गोल्फ लिंक-लैंडक्राफ्ट में बिजली संकट कोई नई बात नहीं है। उनका आरोप है कि गर्मी और बरसात के मौसम में लगभग हर वर्ष इसी तरह की स्थिति पैदा होती है। पिछले वर्ष भी करीब 36 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही थी और तब भी लोगों को जनरेटर के सहारे दिन-रात गुजारने पड़े थे।

निवासियों का कहना है कि वर्षों से सामने आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं किया गया, जबकि टाउनशिप में हजारों परिवार निवास करते हैं।

मेंटिनेंस एजेंसी पर रखरखाव में लापरवाही का आरोप

प्रभात चौधरी, एओए के सचिव, लैंडक्राफ्ट

लैंडक्राफ्ट एओए के सचिव प्रभात चौधरी ने बिल्डर की मेंटिनेंस एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एजेंसी कॉमन एरिया मेंटिनेंस (CAM) शुल्क तो पूरी तरह वसूल रही है, लेकिन विद्युत उपकरणों के रखरखाव और समय पर मरम्मत में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। इसी का परिणाम है कि मामूली तकनीकी खराबियां बड़े बिजली संकट का रूप ले लेती हैं।

प्रभात चौधरी के अनुसार लंबे समय तक जनरेटर चलने से लाखों रुपये का अतिरिक्त डीजल खर्च हुआ है, जिसका बोझ अंततः निवासियों पर पड़ता है। उनका कहना है कि इस घटना में अतिरिक्त खर्च हुए डीजल की राशि मेंटिनेंस एजेंसी के CAM भुगतान से समायोजित करने की कार्रवाई की जाएगी।

स्कार्डी ग्रीन में दो लाख रुपये का अतिरिक्त डीजल खर्च

राजकुमार शर्मा, AOA अध्यक्ष, स्कार्डी ग्रीन

स्कार्डी ग्रीन एओए के अध्यक्ष राजकुमार शर्मा ने बताया कि केवल उनकी सोसायटी में ही इस बिजली संकट के दौरान करीब दो लाख रुपये का अतिरिक्त डीजल खर्च हुआ। उन्होंने कहा कि जनरेटर से बिजली उपलब्ध कराने के लिए निवासियों से लगभग 19 रुपये प्रति यूनिट की दर से शुल्क देना पड़ता है।

राजकुमार शर्मा ने बताया कि बिजली विभाग को पत्र भेजकर पूरी टाउनशिप की विद्युत भार क्षमता, केबल, ट्रांसफार्मर और अन्य विद्युत उपकरणों का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने की मांग की जाएगी, ताकि बार-बार आने वाली ऐसी समस्याओं का स्थायी समाधान निकल सके।

 उठी व्यापक तकनीकी ऑडिट और जवाबदेही तय करने की मांग

लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद अब निवासियों ने केवल बिजली आपूर्ति बहाल करने की बजाय पूरी विद्युत व्यवस्था का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने, विद्युत उपकरणों की गुणवत्ता और क्षमता की जांच कराने तथा रखरखाव में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर घर खरीदने के बावजूद यदि हर वर्ष घंटों बिजली संकट झेलना पड़े, तो यह केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि व्यवस्था और रखरखाव की गंभीर विफलता का संकेत है।

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