मोती रेजीडेंसी के सैकड़ों परिवारों की हुंकार: 13 साल से बिना कम्प्लीशन सर्टिफिकेट, अब नहीं करेंगे समझौता!!
बिल्डर और जीडीए के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, महिलाओं ने संभाली आंदोलन की कमान
अधूरी सुविधाओं के बीच बढ़े मेंटेनेंस शुल्क का पुरजोर विरोध
NEWS1UP
एओए/आरडब्ल्यूए डेस्क
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित मोती रेजीडेंसी में पिछले 13 वर्षों से बिना कम्प्लीशन सर्टिफिकेट रह रहे सैकड़ों परिवार अब अपने अधिकारों की लड़ाई खुलकर लड़ रहे हैं। अधूरी सुविधाओं, कथित निर्माण खामियों और लगातार बढ़ते मेंटेनेंस शुल्क से परेशान निवासियों ने बिल्डर के खिलाफ निर्णायक आंदोलन छेड़ दिया है। पिछले तीन सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शन रविवार को और तेज हो गया, जब बड़ी संख्या में महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं ने हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर बिल्डर और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के खिलाफ जोरदार विरोध मार्च निकाला।

प्रदर्शन के दौरान पूरे परिसर में एक ही मांग गूंजती रही, “पहले कम्प्लीशन सर्टिफिकेट, फिर मेंटेनेंस और हैंडओवर।” निवासियों का कहना है कि जब तक स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप सभी निर्माण कार्य पूरे नहीं किए जाते, आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं और विधिवत कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं होता, तब तक न तो बढ़ा हुआ मेंटेनेंस शुल्क स्वीकार किया जाएगा और न ही सोसायटी का हैंडओवर लिया जाएगा।
निवासियों का आरोप है कि सोसायटी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, बिजली व्यवस्था, जल निकासी तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं में गंभीर कमियां हैं। इसके बावजूद वर्षों से उनसे नियमित रूप से मेंटेनेंस शुल्क वसूला जा रहा है। उनका कहना है कि अधूरी परियोजना का आर्थिक बोझ फ्लैट खरीदारों पर डालना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
जीडीए की भूमिका पर भी उठे गंभीर सवाल

इस बार प्रदर्शन का केंद्र केवल बिल्डर नहीं, बल्कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण भी रहा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जीडीए समय-समय पर नोटिस जारी करने की औपचारिकता तो निभाता है, लेकिन आज तक ऐसी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई जिससे बिल्डर को परियोजना पूरी करने और कानूनी दायित्व निभाने के लिए बाध्य किया जा सके।
निवासियों का कहना है कि यदि नियामक संस्थाएं समय रहते अपनी जिम्मेदारी निभातीं, तो शायद हजारों लोगों को वर्षों तक असुरक्षा और अनिश्चितता के बीच जीवन नहीं बिताना पड़ता।
यह आंदोलन केवल मोती रेजीडेंसी का नहीं, हजारों खरीदारों की आवाज़ है

मोती रेजीडेंसी का संघर्ष आज केवल एक सोसायटी का मुद्दा नहीं रह गया है। यह उन हजारों फ्लैट खरीदारों की आवाज़ बन चुका है, जो वर्षों से बिना कम्प्लीशन सर्टिफिकेट, अधूरी सुविधाओं और प्रशासनिक उदासीनता के बीच रहने को मजबूर हैं।
किसी भी नागरिक के लिए अपना घर केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि जीवनभर की कमाई, परिवार की सुरक्षा और भविष्य के सपनों का प्रतीक होता है। ऐसे में वैधानिक रूप से सुरक्षित, पूर्ण और प्रमाणित आवास की मांग करना किसी प्रकार का विरोध नहीं, बल्कि प्रत्येक खरीदार का वैध और न्यायोचित अधिकार है।
मोती रेजीडेंसी के निवासी जिस संयम, एकजुटता और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वह न केवल प्रशंसनीय है बल्कि अन्य आवासीय परियोजनाओं के खरीदारों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। यदि नागरिक संगठित होकर कानूनसम्मत तरीके से अपने अधिकारों की मांग करें, तो जवाबदेही तय करना संभव है।
आखिर कम्प्लीशन सर्टिफिकेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण ?
कम्प्लीशन सर्टिफिकेट किसी भी भवन के लिए यह प्रमाणित करता है कि उसका निर्माण स्वीकृत मानचित्र, भवन उपविधियों तथा लागू नियमों के अनुरूप पूरा किया गया है।
बिना कम्प्लीशन सर्टिफिकेट के संभावित जोखिम:
भवन की वैधानिक स्थिति पर प्रश्नचिह्न बना रहता है
भविष्य में कानूनी एवं प्रशासनिक विवाद उत्पन्न हो सकते हैं
कई आवश्यक सरकारी अनुमतियों और सुविधाओं में कठिनाई आ सकती है
खरीदारों की संपत्ति का मूल्य और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकते हैं
बिल्डर द्वारा अधूरी परियोजना का बोझ खरीदारों पर डालने की आशंका बनी रहती है
मोती रेजीडेंसी का आंदोलन एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि घर खरीदना केवल कब्ज़ा प्राप्त करना नहीं, बल्कि वैधानिक रूप से सुरक्षित और पूर्ण आवास प्राप्त करना भी है। यदि किसी परियोजना में वर्षों बाद भी कम्प्लीशन सर्टिफिकेट नहीं है, तो यह केवल खरीदारों की नहीं, बल्कि नियामक व्यवस्था की जवाबदेही का भी प्रश्न है।
अब समय आ गया है कि संबंधित विभाग केवल नोटिस जारी करने तक सीमित न रहें, बल्कि समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि कानून का सम्मान हो और आम नागरिकों का अपने सपनों के घर पर विश्वास बना रहे।
