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मेंटेनेंस का पैसा निवासियों का, फैसला भी निवासियों का!!

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शालीमार सिटी के जनादेश ने बता दिया, AOA का बोर्ड साझा धन का मालिक नहीं, बल्कि ट्रस्टी है!

NEWS1UP

शिरीष निर्मल

गाजियाबाद। किसी भी आवासीय सोसाइटी का प्रबंधन केवल पार्क, लिफ्ट, सुरक्षा या सफाई तक सीमित नहीं होता। यह उन सैकड़ों परिवारों के विश्वास और धन के प्रबंधन का दायित्व भी होता है, जो हर महीने रखरखाव शुल्क (मेंटेनेंस) के रूप में अपनी मेहनत की कमाई एओए बोर्ड को सौंपते हैं। इसलिए किसी भी अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन का बोर्ड उस धन का मालिक नहीं, बल्कि ट्रस्टी होता है।

इसी वजह से किसी भी वित्तीय निर्णय में मनमानी नहीं, बल्कि नियमों का पालन, पारदर्शिता, जवाबदेही और निवासियों की सहमति लोकतांत्रिक प्रबंधन की बुनियादी शर्त मानी जाती है। जब इन सिद्धांतों पर सवाल उठते हैं, तो मामला केवल हिसाब-किताब का नहीं रहता, बल्कि पूरी सोसाइटी के भरोसे का बन जाता है। और भरोसे का सबसे बड़ा फैसला हमेशा मतपेटी ही करती है।

शायद यही कारण है कि शालीमार सिटी अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन का हालिया चुनाव केवल एक संगठन का चुनाव नहीं, बल्कि सोसाइटी गवर्नेंस पर निवासियों के भरोसे का जनमत बनकर सामने आया।

आठ से दस सीटों तक, भरोसे का विस्तार

नवनिर्वाचित कार्यकारिणी सदस्यों को जीत का प्रमाण पत्र सौंपते निर्वाचन अधिकारी

पिछले वर्ष हुए चुनाव में शालीमार सिटी लोकतांत्रिक संघ के 10 में से 8 उम्मीदवार बोर्ड में निर्वाचित हुए थे। उस समय निवासियों ने इस नेतृत्व को अवसर दिया था। एक वर्ष बाद हुए चुनाव में उसी नेतृत्व को सभी 10 सीटों पर विजय दिलाकर मतदाताओं ने यह संकेत दिया कि उनका विश्वास पहले से अधिक मजबूत हुआ है।

12 जुलाई को हुए चुनाव में कुल 826 पंजीकृत अपार्टमेंट ओनर्स में से 682 मतदाताओं ने मतदान किया। 22 उम्मीदवारों के बीच हुए मुकाबले में मतदाताओं ने किसी बिखरे हुए जनादेश के बजाय एक स्पष्ट निर्णय दिया और पूरी कार्यकारिणी की जिम्मेदारी एक ही पैनल को सौंप दी।

विजयी उम्मीदवारों में जयशंकर रॉय, अमित कुमार राणा, विपिन कुमार डागर, बलराम सिंह वर्मा, अनुराग मिश्रा, राजेश कुमार गुप्ता, संतोष कुमार सिंह, हर्ष वर्धन बिसेन, गजेंद्र कुमार सुमन और संजीव गोस्वामी शामिल हैं।

एक ऑडिट, जिसने बदल दिया विमर्श

इस चुनाव की पृष्ठभूमि भी कम महत्वपूर्ण नहीं रही। पिछले कुछ समय से शालीमार सिटी पूर्व कार्यकाल के वित्तीय मामलों की फोरेंसिक ऑडिट को लेकर चर्चा में रही। डिप्टी रजिस्ट्रार के निर्देश पर हुई इस जांच में पूर्व एओए पदाधिकारियों से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की पुष्टि हुई थी।

ऑडिट रिपोर्ट के बाद लागू चुनावी प्रावधानों के अनुसार, जिन पूर्व पदाधिकारियों के विरुद्ध प्रतिकूल निष्कर्ष दर्ज थे, वे नियमानुसार चुनाव लड़ने के पात्र नहीं रहे। जानकारी के अनुसार, ऐसे ही एक पूर्व पदाधिकारी ने नामांकन पत्र दाखिल किया था, लेकिन चुनाव समिति ने नियमों के आधार पर उसका नामांकन निरस्त कर दिया।

इन घटनाक्रमों ने चुनावी बहस का केंद्र बदल दिया। चर्चा इस बात की नहीं रही कि कौन जीतेगा, बल्कि इस बात की रही कि सोसाइटी के साझा धन का प्रबंधन कितना पारदर्शी और जवाबदेह होगा।

पूर्ण बहुमत का अर्थ, पूर्ण जवाबदेही

लोकतांत्रिक संघ को इस बार बोर्ड की सभी 10 सीटें मिली हैं। यह निर्विवाद जनादेश है। लेकिन किसी आवासीय सोसाइटी में पूर्ण बहुमत का अर्थ केवल अधिकार नहीं होता, बल्कि पूर्ण जवाबदेही भी होता है। अब निर्णय लेने में किसी दूसरे पैनल की बाधा नहीं होगी। इसलिए भविष्य में होने वाली हर उपलब्धि का श्रेय भी इसी टीम को मिलेगा और यदि कहीं कमी रह जाती है तो उसकी जिम्मेदारी भी इसी बोर्ड पर होगी।

अब जनता देखेगी: वादे नहीं, व्यवस्था

जय शंकर राय, नवनिर्वाचित कार्यकारिणी सदस्य

नवनिर्वाचित सदस्य जयशंकर रॉय ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता शालीमार सिटी को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और सुव्यवस्थित बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि अच्छे लोगों को सोसाइटी प्रबंधन में आगे आना चाहिए, क्योंकि सोसाइटी भी हर निवासी का अपना घर है।

लेकिन इस चुनाव का सबसे बड़ा संदेश किसी भाषण या नारे में नहीं, बल्कि मतदाताओं के फैसले में छिपा है। निवासियों ने इस बार केवल प्रतिनिधि नहीं चुने हैं, बल्कि अपने साझा धन, अपने विश्वास और अपने भविष्य की जिम्मेदारी एक टीम को सौंपी है।

शालीमार सिटी का यह चुनाव एनसीआर की हजारों आवासीय सोसाइटियों के लिए भी एक संदेश है। एओए का बोर्ड किसी निजी संस्था का निदेशक मंडल नहीं होता। वह उन परिवारों का संरक्षक होता है, जिन्होंने अपने संसाधनों का प्रबंधन उसके हाथों में सौंपा है।

यही कारण है कि किसी भी बोर्ड की असली सफलता चुनाव जीतने में नहीं, बल्कि हर वित्तीय निर्णय में सहभागिता एवं पारदर्शिता, हर प्रशासनिक कदम में जवाबदेही और हर निवासी के विश्वास को बनाए रखने में निहित होती है।

शालीमार सिटी में जनादेश मिल चुका है। अब बारी उस जनादेश का सम्मान करने की है।

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