NEET-UG पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: कहा, हमें गलतियों का सिलसिला खत्म करना होगा
हाइब्रिड परीक्षा प्रणाली पर मांगी राय
अब हर चरण की होगी न्यायिक निगरानी
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
नई दिल्ली। NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को कड़े शब्दों में जवाबदेह ठहराया। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि परीक्षाओं में बार-बार होने वाली चूक अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। अदालत ने कहा कि वह इस पूरे मामले की स्वयं निगरानी करेगी और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक होने पर “एक्स्ट्रा माइल” भी जाएगी।
परीक्षा प्रणाली को अब संस्थागत रूप से सुरक्षित बनाना होगा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि परीक्षा सुरक्षा को केवल तात्कालिक उपायों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने कहा कि सुधार तीन स्तरों, परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और परीक्षा के बाद, सुनिश्चित किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना समाप्त हो सके।
कोर्ट ने NTA से यह भी पूछा कि यदि भविष्य में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) या अन्य तकनीकी मॉडल अपनाया जाता है तो उसकी सुरक्षा व्यवस्था क्या होगी और प्रश्नपत्र सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक कैसे पहुंचाए जाएंगे।
वायुसेना की मदद स्थायी समाधान नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए भारतीय वायुसेना की सहायता लेने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक आपातकालीन व्यवस्था थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं की सुरक्षा किसी अस्थायी व्यवस्था पर निर्भर नहीं रह सकती। अब ऐसी तकनीकी और संस्थागत व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे पेपर लीक की आशंका ही समाप्त हो जाए।
हाइब्रिड परीक्षा मॉडल पर NTA से मांगी विस्तृत राय
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राधाकृष्णन पैनल की उस महत्वपूर्ण सिफारिश पर भी NTA का पक्ष मांगा, जिसमें हाइब्रिड परीक्षा प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया गया है। इस मॉडल के तहत प्रश्नपत्र एन्क्रिप्टेड डिजिटल लिंक के माध्यम से परीक्षा केंद्रों तक भेजे जाएंगे और परीक्षा शुरू होने से 30 से 60 मिनट पहले स्थानीय स्तर पर सुरक्षित तरीके से प्रिंट किए जाएंगे। इससे प्रश्नपत्रों के भौतिक परिवहन, स्ट्रॉन्ग रूम में रखरखाव और रास्ते में लीक होने जैसी आशंकाओं को काफी हद तक समाप्त किया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट के हर सुझाव का पालन होगा: केंद्र
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की उच्च स्तर पर निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के प्रत्येक सुझाव पर गंभीरता से अमल करेगी।
NTA पर उठे सवाल, नई एजेंसी बनाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में NTA की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि या तो NTA का व्यापक पुनर्गठन किया जाए या फिर उसकी जगह एक नई, तकनीकी रूप से सक्षम, स्वतंत्र और अत्याधुनिक परीक्षा एजेंसी गठित की जाए।
इसके साथ ही याचिकाओं में CBI को पेपर लीक मामले की जांच रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।
अगले सोमवार होगी अहम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार निर्धारित करते हुए संकेत दिया कि वह परीक्षा सुधारों की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखेगा। अदालत के रुख से स्पष्ट है कि अब केवल पेपर लीक की जांच ही नहीं, बल्कि देश की प्रवेश परीक्षा प्रणाली में स्थायी, तकनीकी और संस्थागत सुधार भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में रहेंगे।
