योगी सरकार की वैज्ञानिक पुलिसिंग को नई धार: 94 पुलिस अधिकारियों ने सीखी फॉरेंसिक विवेचना की आधुनिक तकनीकें
NEWS1UP July 24, 2026 0
छह सप्ताह के ‘क्राइम सीन मैनेजमेंट‘ प्रशिक्षण का समापन
फॉरेंसिक विज्ञान का मूल उद्देश्य जांच को सशक्त बनाकर न्याय प्रणाली को मजबूत करना : डॉ. प्रशांत कुमार
वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच को मिलेगा बढ़ावा
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भूमेश शर्मा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अपराधों की जांच को अधिक वैज्ञानिक, सटीक और न्यायोन्मुखी बनाने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में आयोजित ‘क्राइम सीन मैनेजमेंट’ प्रशिक्षण कार्यक्रम के पांचवें बैच का शुक्रवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। छह सप्ताह तक चले इस विशेष प्रशिक्षण में प्रदेश के विभिन्न कमिश्नरेट और जनपदों से आए 94 पुलिस अधिकारियों को आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों, वैज्ञानिक साक्ष्य संरक्षण और अपराध स्थल प्रबंधन की बारीकियों से प्रशिक्षित किया गया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस विवेचना को वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित बनाना है, ताकि न्यायालय में प्रभावी पैरवी हो सके और अपराधियों को दंडित कराने की सफलता दर में उल्लेखनीय वृद्धि हो।
फॉरेंसिक विज्ञान न्याय व्यवस्था की रीढ़: डॉ. प्रशांत कुमार

समापन समारोह में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान का मूल उद्देश्य जांच प्रक्रिया को वैज्ञानिक आधार देकर न्याय प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि डीएनए, फिंगरप्रिंट और अन्य भौतिक साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण अपराधियों तक पहुंचने का सबसे विश्वसनीय माध्यम है। ऐसे में अपराध स्थल से साक्ष्यों का अत्यंत सावधानी और गुणवत्ता के साथ संकलन ही सफल विवेचना की आधारशिला है।
उन्होंने प्रशिक्षित अधिकारियों से अपने-अपने जनपदों में ‘ट्रेनर ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी)’ की भूमिका निभाने और अन्य पुलिसकर्मियों को भी आधुनिक फॉरेंसिक जांच तकनीकों का प्रशिक्षण देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश में विश्वस्तरीय फॉरेंसिक शिक्षा और विशेषज्ञ तैयार करने के उद्देश्य से यूपीएसआईएफएस की स्थापना की गई है।
आधुनिक तकनीकों से लैस हुई पुलिस विवेचना

यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि कानून और विज्ञान का संगम ही फॉरेंसिक विज्ञान है। उन्होंने कहा कि न्याय दिलाने की प्रक्रिया की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी पुलिस की विवेचना होती है, इसलिए उसका वैज्ञानिक होना अत्यंत आवश्यक है।
उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को क्राइम सीन मैनेजमेंट, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन तथा आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इससे प्रशिक्षित अधिकारी अपने-अपने जनपदों में अपराधों की जांच को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और वैज्ञानिक बना सकेंगे।
वैज्ञानिक पुलिसिंग के विजन को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बदलते अपराधों के स्वरूप, विशेषकर साइबर अपराध और तकनीक आधारित अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस बल का आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों में दक्ष होना समय की आवश्यकता है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाएंगे, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाएंगे।
समारोह में उप महानिरीक्षक हेमराज मीना, उप निदेशक चिरंजीब मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ. पोरवी सिंह, विवेक कुमार, डॉ. सपना, डॉ. श्रुतिदास गुप्ता, डॉ. शाश्या मिश्र, डॉ. स्वप्निल, डॉ. पलक तथा आरआई शैलेन्द्र सिंह सहित संस्थान के अनेक अधिकारी एवं प्रशिक्षक उपस्थित रहे।
