शिप्रा सनसिटी सोसाइटी के एक साल के हिसाब पर हाईकोर्ट की नजर, तलब हुई ऑडिट रिपोर्ट
डिप्टी रजिस्ट्रार का व्यक्तिगत हलफनामा रिकॉर्ड पर
अब 8 अक्टूबर की सुनवाई में सामने होंगे सोसाइटी के वित्तीय अभिलेख
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। कॉमन एरिया मेंटेनेंस चार्ज (CAM) शुल्क बढ़ोतरी के विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स का व्यक्तिगत हलफनामा रिकॉर्ड पर ले लिया है। इसके साथ ही अदालत ने सोसाइटी की पिछले एक वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मामला शिप्रा सनसिटी अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन से जुड़ा है। दिलचस्प यह है कि इस मामले में हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को ही डिप्टी रजिस्ट्रार से सीधा जवाब मांगा था कि आखिर 19 अगस्त को सीएएम शुल्क बढ़ोतरी के मामले में स्पेशल जीबीएम बुलाने का निर्देश किस वैधानिक प्रावधान के तहत जारी किया गया ? अदालत ने आदेश के आधार और उसके पीछे मौजूद कारण एवं सामग्री का भी स्पष्ट ब्योरा मांगा था।
अधिकार-क्षेत्र पर उठे सवाल से शुरू हुई सुनवाई
दरअसल, याचिका में डिप्टी रजिस्ट्रार के 19 अगस्त 2026 के आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि सोसाइटी के उपविधानों के स्पेशल जीबीएम बुलाने की अपनी निर्धारित प्रक्रिया है। साथ ही याचिका में दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम, 2010 के तहत इस विषय में सक्षम प्राधिकारी गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैं।
हाईकोर्ट ने इसी पृष्ठभूमि में डिप्टी रजिस्ट्रार से उनके आदेश का वैधानिक आधार स्पष्ट करने को कहा था। अब 24 सितंबर की सुनवाई में उनका व्यक्तिगत हलफनामा रिकॉर्ड पर आ गया है।
अब सोसाइटी के एक साल के हिसाब पर नजर
गुरुवार के आदेश में अदालत ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को पिछले एक वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले दाखिल करने का निर्देश दिया है। यानी अब सुनवाई का अगला महत्वपूर्ण दस्तावेज सोसाइटी के वित्तीय अभिलेख होंगे।
मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।
