गदर नहीं, भारतीय आत्मा की स्वतंत्रता की पुकार था 1857

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शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित कर याद किए गए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानी 

हिंडन के रणबांकुरों ने अंग्रेजी साम्राज्य को दी थी चुनौती

 

NEWS1UP

संवाददाता

गाजियाबाद। देश की आजादी के लिए लड़े गए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के अमर शहीदों को शनिवार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। गाजियाबाद प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 शहीद स्मारक समिति द्वारा शहीद स्थल मेट्रो स्टेशन के निकट आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों देशभक्तों, समाजसेवियों और गणमान्य नागरिकों ने पुष्पांजलि अर्पित कर वीर बलिदानियों को नमन किया।

हिंडन का युद्ध भारतीय शौर्य का स्वर्णिम अध्याय

समिति के अध्यक्ष पंडित रामआसरे शर्मा ने कहा कि 30 और 31 मई 1857 को हिंडन नदी के तट पर लड़ा गया ऐतिहासिक युद्ध भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक है। उन्होंने कहा कि उस समय दुनिया की सबसे प्रशिक्षित अंग्रेजी सेना का सामना भारतीय क्रांतिकारियों की राष्ट्रभक्त सेना से हुआ था। क्रांतिकारियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अंग्रेजों के घमंड को चकनाचूर कर दिया था। यह गौरवगाथा आज भी देशवासियों को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देती है।

1857 का महासमर भारतीय आत्मा की आवाज था

संस्था के प्रवक्ता एवं विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के पीठाधीश्वर बी.के. शर्मा ‘हनुमान’ ने कहा कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भारतीय इतिहास का वह दिव्य और भव्य अध्याय है, जिसमें धर्म, जाति और वर्ग की सभी दीवारें ध्वस्त हो जाती हैं तथा भारत की आत्मा जनसमूह के रूप में मुखर होकर सामने आती है।

उन्होंने कहा कि कुछ अंग्रेजी और वामपंथी इतिहासकार भले ही इस महासमर को गदर या विद्रोह कहें, लेकिन वास्तव में यह भारतीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता की चेतना का महाआंदोलन था। इसकी गूंज आज भी राष्ट्र की मिट्टी के कण-कण में अनुभव की जा सकती है।

राष्ट्रवादी पत्रकारिता ने भी निभाई थी अहम भूमिका

बी.के. शर्मा ‘हनुमान’ ने कहा कि आजादी के प्रथम संग्राम में उस दौर की राष्ट्रवादी पत्रकारिता ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। पत्रकारों और लेखकों ने जन-जन तक स्वतंत्रता का संदेश पहुंचाकर फिरंगी हुकूमत के खिलाफ जनमत तैयार किया। उनकी लेखनी ने क्रांति के बीज बोए और स्वतंत्रता की अलख जगाने का काम किया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र और राष्ट्रगायकों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। आजादी के लिए संघर्ष करने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात सेनानियों को शब्दांजलि और भावांजलि अर्पित करना हम सबका कर्तव्य है।

शहीदों के बलिदान को किया गया स्मरण

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि हिंडन की धरती पर बहा शहीदों का रक्त आज भी देशभक्ति, त्याग और बलिदान की प्रेरणा देता है। स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रहित में समर्पित रहने का संदेश देता रहेगा।

इस अवसर पर संस्था के महामंत्री पी.एन. गर्ग, वरिष्ठ समाजसेवी संदीप त्यागी ‘रसम’, सुनीता बहल, विनीता पाल, डॉ. एन.एस. तोमर, डॉ. संजय सिंह, डॉ. दिलीप कुमार, डॉ. एस.के. मिश्रा, ए. खालिद, डॉ. वसीम, डॉ. एस.के. सिकदर, ब्रजन विश्वास, अभिजीत दत्ता, किंकर राय, आलोक चंद शर्मा, डॉ. ए.के. जैन, योगेंद्र बल्हारा, अरुण खन्ना, हरेंद्र, संतोष दीक्षित, उमेश शर्मा, सुरेश सिंह, उत्कर्ष पांडेय, आदर्श पांडेय शैंकी, फरमान अली, श्यामलाल सरकार, बप्पा देव, राम अवतार, अतुल शर्मा, आर.पी. शर्मा, सपन सिकदर, एस.के. मलिक, मोमिन, सुबोध त्यागी सहित सैकड़ों देशभक्त एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

 

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