डीजीपी राजीव कृष्ण का डिजिटल मिशन: सोशल मीडिया से मिले अलर्ट ने बचाई एक और जिंदगी

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मेरठ में इंस्टाग्राम पर आए आत्मघाती अलर्ट के बाद 8 मिनट में पहुंची पुलिस, समय रहते बची युवक की जान, तकनीक आधारित पुलिसिंग का सफल उदाहरण

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

मेरठ/लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस प्रमुख राजीव कृष्ण की अगुवाई में विकसित हो रही आधुनिक और तकनीक आधारित पुलिसिंग व्यवस्था एक बार फिर किसी के लिए जीवनदान साबित हुई है। मेरठ के सरधना में एक 25 वर्षीय युवक की जान उस समय बच गई, जब सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो को मेटा के सुरक्षा तंत्र ने पहचान लिया और कुछ ही मिनटों में सूचना उत्तर प्रदेश पुलिस तक पहुंच गई।

प्रेम संबंध टूटने से मानसिक तनाव में आए एक युवक ने इंस्टाग्राम पर चिंताजनक वीडियो पोस्ट किया। सोशल मीडिया पर अपलोड होते ही मेटा के सुरक्षा सिस्टम ने संभावित खतरे को पहचान लिया और सूचना सीधे उत्तर प्रदेश पुलिस तक पहुंच गई। इसके बाद शुरू हुई तेज कार्रवाई ने कुछ ही मिनटों में एक संभावित त्रासदी को टाल दिया।

यह घटना केवल एक युवक को बचाने की कहानी नहीं है, बल्कि उस डिजिटल पुलिसिंग मॉडल की सफलता का उदाहरण है जिसे डीजीपी राजीव कृष्ण लगातार मजबूत बनाने में जुटे हैं। उनका स्पष्ट मानना रहा है कि पुलिस का दायित्व केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट में फंसे नागरिकों तक समय रहते सहायता पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

आठ मिनट में पहुंची मदद

DGP राजीव कृष्ण

मेटा द्वारा अलर्ट मिलने के बाद डीजीपी मुख्यालय स्थित सोशल मीडिया सेंटर तत्काल सक्रिय हुआ। DGP राजीव कृष्ण के निर्देश पर तकनीकी विश्लेषण के जरिए युवक की लोकेशन का पता लगाया गया और मेरठ पुलिस को सूचित किया गया। सरधना पुलिस मात्र आठ मिनट के भीतर युवक के घर पहुंच गई और उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचा ली गई।

तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता का संगम

राजीव कृष्ण के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को नई दिशा दी है। इसका उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर संकट के संकेत देने वाले लोगों तक समय रहते मदद पहुंचाना भी है।

मेटा और उत्तर प्रदेश पुलिस के बीच स्थापित समन्वय इसी सोच का परिणाम है। जैसे ही किसी पोस्ट, वीडियो या संदेश में आत्मघाती संकेत दिखाई देते हैं, सूचना सीधे पुलिस तक पहुंचती है और स्थानीय इकाइयों को तत्काल सक्रिय किया जाता है।

3 हजार से अधिक लोगों को मिला नया जीवन

आंकड़े बताते हैं कि 1 जनवरी 2023 से 31 मई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस इस प्रणाली के माध्यम से 3,011 लोगों की जान बचाने में सफल रही है। यह संख्या बताती है कि तकनीक आधारित यह पहल अब एक प्रभावी जीवनरक्षक अभियान का रूप ले चुकी है।

इसी नवाचार और जनसेवा आधारित पुलिसिंग मॉडल के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को ‘SKOCH Award-2025’ तथा ‘The Economic Times GovTech Awards-2026’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मान भी प्राप्त हुए हैं।

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