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‘सत्यार्थ प्रकाश’ मानव जीवन की श्वास, सत्य के मार्ग पर चलना ही जीवन की सार्थकता : आचार्या विमलेश बंसल

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केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के 792वें ऑनलाइन वेबिनार में वैदिक चिंतन, नैतिक जीवन और सत्य के महत्व पर हुआ मंथन

NEWS1UP

संवाददाता

गाजियाबाद। सत्यार्थ प्रकाश केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन की श्वास है। यह विचार वैदिक विदुषी एवं दर्शनाचार्या आचार्या विमलेश बंसल ने केन्द्रीय आर्य युवक परिषद द्वारा आयोजित ऑनलाइन गोष्ठी में व्यक्त किए। “मानव जीवन की श्वास : सत्यार्थ प्रकाश की महत्ता” विषय पर आयोजित यह परिषद का कोरोना काल से निरंतर चल रहे वेबिनारों की श्रृंखला का 792वाँ वेबिनार था।

मुख्य वक्ता आचार्या विमलेश बंसल ने कहा कि मनुष्य के जीवन की पहली श्वास सत्य की होती है, क्योंकि असत्य के आधार पर कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकता। जिस प्रकार शरीर के लिए ऑक्सीजन आवश्यक है, उसी प्रकार आत्मा के विकास के लिए सत्य और ज्ञानरूपी प्रकाश अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा कि सत्य विश्वास की सबसे मजबूत नींव है, जो परिवार, समाज और मानव संबंधों को स्थायित्व प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि प्रकाश का अर्थ केवल बाहरी उजाला नहीं, बल्कि मन और बुद्धि के अज्ञान का नाश भी है। जब व्यक्ति सत्य का अनुसरण करता है, तब उसके जीवन में आत्मविश्वास, शांति और नैतिक दृढ़ता का संचार होता है। प्रत्येक दिन की शुरुआत सत्य के संकल्प और ज्ञान के प्रकाश के साथ होनी चाहिए, क्योंकि मानव जीवन तभी सार्थक बनता है जब उसकी हर श्वास सत्य से प्रेरित और प्रत्येक कर्म विवेक से संचालित हो।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अनिता रेलन तथा अध्यक्ष वंदना शर्मा ने भी अपने संबोधन में वैदिक संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सत्यनिष्ठ जीवन को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के अध्यक्ष अनिल आर्य ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती कृत ‘सत्यार्थ प्रकाश’ ने देश के अनेक क्रांतिकारियों, समाज सुधारकों और राष्ट्रभक्तों को वैचारिक दिशा प्रदान की है। आज भी यह ग्रंथ समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक जागरण और सत्यनिष्ठ जीवन का प्रेरक स्रोत बना हुआ है।

वेबिनार के दौरान कौशल्या अरोड़ा, जनक अरोड़ा, कमला हंस, संतोष दर, पिंकी आर्य तथा सुधीर बंसल ने भजनों की मधुर प्रस्तुतियों से आध्यात्मिक वातावरण का सृजन किया।

वेबिनार के अंत में परिषद के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण आर्य ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे वैचारिक आयोजन समाज में नैतिक चेतना और वैदिक मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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