September 3, 2026
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आउटसोर्स नौकरी अब ‘बे-सहारा’ नहीं! योगी सरकार ने तैयार किया सुरक्षा कवच!!

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CM

3.50 लाख कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव

वेतन-EPF-ESIC से लेकर बीमा और शिकायतों तक की व्यवस्था होगी डिजिटल

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

लखनऊ। आउटसोर्सिंग पर नौकरी करने वाले प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब उनकी नौकरी सिर्फ किसी निजी एजेंसी के भरोसे नहीं रहेगी, बल्कि भर्ती से लेकर वेतन, उपस्थिति, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निस्तारण तक पूरी व्यवस्था को एक संस्थागत और डिजिटल ढांचे से जोड़ने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) का शुभारंभ किया। सरकार के मुताबिक, इस नई व्यवस्था का सीधा लाभ प्रदेश के करीब 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को मिलेगा।

लंबे समय से आउटसोर्स कर्मचारियों के सामने समय पर वेतन, EPF-ESIC, नौकरी की सुरक्षा और सेवा रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठते रहे हैं। नई व्यवस्था में इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए जिम्मेदारियां तय करने और निगरानी का तंत्र विकसित किया गया है।

एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नौकरी से जुड़ी जानकारी

UPCOS के माध्यम से कर्मचारी अपने सर्विस डिटेल, बैंक खाते, उपस्थिति और भुगतान से जुड़ी जानकारी देख सकेंगे। शिकायत दर्ज कराने के साथ उसकी स्थिति को ट्रैक करने की सुविधा भी होगी। सरकारी विभागों, आउटसोर्सिंग एजेंसियों और कर्मचारियों के बीच समन्वय के लिए डिजिटल व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे कर्मचारी को अपनी सेवा से जुड़ी जानकारी के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होने की उम्मीद है।

हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच वेतन का प्रावधान

नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों के पारिश्रमिक को लेकर भी समयसीमा तय की गई है। कर्मचारियों को हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच वेतन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। भुगतान सीधे बैंक खाते में किए जाने का प्रावधान है।

इसके साथ ही EPF और ESIC से संबंधित अंशदान नियमित रूप से जमा कराने तथा उसका प्रमाण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

मनमाने तरीके से हटाने पर भी लगाम

आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी की असुरक्षा लंबे समय से बड़ा मुद्दा रही है। नई व्यवस्था में आउटसोर्सिंग एजेंसी को अपने स्तर से कर्मचारी को मनमाने तरीके से हटाने की अनुमति नहीं होगी। अनुशासनहीनता या दंडनीय अपराध जैसी परिस्थितियों में कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग या संस्था और निगम की सहमति की व्यवस्था की गई है।

मेरिट के आधार पर भर्ती, आरक्षण नीति का पालन

UPCOS के तहत भर्ती प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। योग्यता और मेरिट के आधार पर चयन के साथ राज्य सरकार की आरक्षण नीति लागू होगी। SC, ST, OBC, EWS, दिव्यांगजन, महिलाओं, पूर्व सैनिकों और अन्य पात्र श्रेणियों के लिए नियमानुसार आरक्षण का प्रावधान रहेगा। श्रेणी-3 और श्रेणी-4 के पदों के लिए साक्षात्कार नहीं होगा। विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को चयन में वरीयता देने का भी प्रावधान किया गया है।

40 लाख तक दुर्घटना बीमा का दावा

UPCOS के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ाया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए एमओयू के जरिए निर्धारित वेतन श्रेणियों के अनुसार कर्मचारियों को लगभग 40 लाख रुपए तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

इसके अलावा प्लास्टिक सर्जरी के लिए 10 लाख रुपए तक, आकस्मिक दवाओं के लिए 5 लाख रुपए तक और आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपए तक की सुविधा का प्रावधान बताया गया है।

कर्मचारी के साथ परिवार की भी चिंता

व्यवस्था में कर्मचारी के परिवार को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है। किसी बड़ी अनहोनी की स्थिति में पुत्र की शिक्षा के लिए 8 रुपए लाख तक और पुत्री की शिक्षा के लिए 10 लाख रुपए तक सहायता की व्यवस्था है।

दो पुत्रियों के विवाह के लिए भी निर्धारित आर्थिक सहायता तथा कर्मचारी के अंतिम संस्कार के लिए 50 हजार रुपए तक की सहायता का प्रावधान किया गया है। कर्मचारी और उसके परिवार के लिए जीरो-बैलेंस बैंक खाते की सुविधा तथा वेतन खाते के माध्यम से परिवार के अधिकतम चार सदस्यों को विशेष योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था भी की गई है।

एजेंसी, विभाग और कर्मचारी, तीनों की जवाबदेही तय करने की कोशिश

UPCOS में एजेंसियों के चयन और इंपैनलमेंट की प्रक्रिया को निर्धारित नियमों से जोड़ने की बात कही गई है। विभाग, निगम और एजेंसी के बीच त्रिपक्षीय व्यवस्था के जरिए जिम्मेदारियां तय होंगी। भर्ती से लेकर पोस्टिंग, उपस्थिति, वेतन, ग्रेच्युटी, बीमा और दूसरी सेवा सुविधाओं की डिजिटल निगरानी की जाएगी।

यानी व्यवस्था का मकसद सिर्फ आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि नौकरी के दौरान उनके अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को भी एक निगरानी तंत्र के दायरे में लाना है।

अब निगाह रहेगी अमल पर

सरकार ने UPCOS के जरिए आउटसोर्स कर्मचारियों को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित व्यवस्था देने की पहल की है। हालांकि, इस पूरी कवायद की असली सफलता इसके जमीनी क्रियान्वयन से तय होगी। वेतन वास्तव में हर महीने समय पर पहुंचता है या नहीं, EPF-ESIC का अंशदान नियमित जमा होता है या नहीं और नौकरी से जुड़े विवादों में कर्मचारी को कितनी राहत मिलती है, इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में सामने आएंगे।

फिलहाल, करीब 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए UPCOS एक ऐसी पहल के रूप में सामने आया है, जो नौकरी के साथ सामाजिक सुरक्षा और परिवार के भविष्य को भी जोड़ने का दावा करती है।

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