September 10, 2026
[t4b-ticker]

1600 पेड़ कहां हैं ? महागुनपुरम की ग्रीन बेल्ट में सीवर का दलदल!

0
MG

NGT के आदेश के चार साल बाद खुली जमीन की तस्वीर

डेवलपर पर आरोप, GDA के दावे और निगरानी पर गंभीर सवाल

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद। एनएच-9 स्थित महागुनपुरम सोसाइटी की जिस जमीन पर पेड़ों की कतार होनी चाहिए थी, वहां अब सीवर का पानी जमा होने का आरोप है। जिस ग्रीन बेल्ट को पर्यावरणीय सुरक्षा की ढाल बनना था, वही कथित तौर पर गंदे पानी के दलदल में बदल गई। और इसी कहानी के बीच एक आंकड़ा बार-बार सामने आता है, 1600 पेड़

सवाल सीधा है कि ये 1600 पेड़ हैं कहां ?

यही सवाल महागुनपुरम की ग्रीन बेल्ट की उस तस्वीर ने खड़ा किया है, जो चार साल पुराने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) अनुपालन के दावों को फिर से जांच के घेरे में ले आती है।

उपलब्ध दस्तावेज के मुताबिक 9 सितंबर 2022 के NGT के अंतिम आदेश से जुड़े अनुपालन में परियोजना की 15 प्रतिशत भूमि को ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित किया जाना था। सोसाइटी के 75 वर्षीय निवासी आई.सी. जिंदल ने आरोप लगाया है कि चार वर्ष गुजरने के बाद भी निर्धारित ग्रीन बेल्ट पूरी तरह विकसित नहीं हुई और डेवलपर द्वारा कथित तौर पर कच्चा सीवर सीधे ग्रीन बेल्ट में छोड़ा जा रहा है।

एक दावा, तीन सवाल

GDA के पूर्व हलफनामे में करीब 1600 पेड़ लगाए जाने का दावा किया गया था।

लेकिन जमीन पर सवाल तीन हैं:

पहला- 1600 पेड़ आज कितने हैं ?

दूसरा- ग्रीन बेल्ट वास्तव में कहां और कितनी विकसित है ?

तीसरा- अगर अनुपालन हुआ था तो सीवर का पानी वहां पहुंचा कैसे ?

इन सवालों का जवाब केवल कागज नहीं दे सकता। इसके लिए जमीन पर ग्रीन बेल्ट का सीमांकन, पेड़ों की गिनती और सीवर व्यवस्था की जांच जरूरी है।

आई.सी. जिंदल की लड़ाई अब नोटिस से आगे

इस मामले को उठाने वाले निवासी आई.सी. जिंदल के मुताबिक उन्होंने महागुनपुरम AOA को 9 जुलाई, 5 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को नोटिस दिए। इसके बाद 5 सितंबर को GDA उपाध्यक्ष को सात दिन का अंतिम नोटिस भेजकर कथित सीवर डंपिंग रोकने और ग्रीन बेल्ट की भौतिक बहाली की मांग की गई।

जिंदल का कहना है-

आई.सी.जिंदल, निवासी महागुनपुरम

“महागुनपुरम में चार साल बाद भी NGT के आदेश के मुताबिक 15 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट विकसित नहीं हुई है। उल्टा, निर्धारित ग्रीन बेल्ट में कथित तौर पर कच्चा सीवर छोड़ा जा रहा है। GDA के पूर्व हलफनामे में करीब 1600 पेड़ लगाए जाने का दावा किया गया था, अब सवाल है कि वे पेड़ कहां हैं और उनकी आज क्या स्थिति है।”

जिंदल ने आगे कहा कि हमने AOA और GDA को लगातार नोटिस दिए हैं। अब जरूरत जमीन पर जांच और ग्रीन बेल्ट की बहाली की है। अगर अनुपालन नहीं हुआ, तो हम NGT में अनुपालन याचिका के जरिए यह मामला उठाएंगे।

13.95 करोड़ का सवाल भी इसी फाइल में

मामला यहीं खत्म नहीं होता। जिंदल ने दस्तावेज में 2024 के इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ बेंच के आदेश का हवाला देते हुए पहले लगाए गए 13.95 करोड़ रुपए के पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति दावे का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार रिकवरी को उत्तर प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (UPPCB) की अधिकारिता के आधार पर रद्द किया गया था, जबकि NGT की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की क्षमता को लेकर आदेश में स्थिति स्पष्ट की गई थी।

अब जिंदल कथित निरंतर उल्लंघन के आधार पर NGT में दोबारा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की मांग की बात कर रहे हैं।

अब फाइल नहीं, जमीन जवाब देगी

महागुनपुरम की कहानी में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि- 

अगर 15 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट विकसित हुई थी और 1600 पेड़ लगाए गए थे, तो आज वहां सीवर का दलदल क्यों है ?

इसका जवाब डेवलपर को अपनी व्यवस्था से और GDA को अपनी निगरानी से देना होगा। क्योंकि चार साल बाद भी अगर अनुपालन का दावा और जमीन की तस्वीर आमने-सामने खड़ी हैं, तो मामला सिर्फ गंदे पानी का नहीं रह जाता।

यह उस व्यवस्था की पड़ताल बन जाता है, जहां सवाल यह है कि दावा किसने किया, जांच किसने की और जमीन पर उसकी सच्चाई देखने कौन गया ?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!