बिना CC फ्लैट का कब्ज़ा: GDA पर हाईकोर्ट का शिकंजा, 2011 के ‘वीसी’ का हिसाब मांगा!
प्रतीकात्मक इमेज
GDA उपाध्यक्ष से लेकर प्रिंसिपल सेक्रेटरी तक, हाईकोर्ट के आदेश से मचा हड़कंप
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
प्रयागराज/गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसा आदेश दिया है, जिसमें GDA के पुराने रिकॉर्ड से लेकर शासन के बड़े अधिकारी तक सवालों के घेरे में आ गए हैं। कोर्ट ने 1 जनवरी 2011 से 31 दिसंबर 2011 के बीच GDA में तैनात वाईस चेयरमैन (V.C.) का ब्यौरा तलब किया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान यह मामला सामने आया, जिसमें बिल्डर पर Completion Certificate हासिल किए बिना कब्जा देने और ग्राउंड फ्लोर के कॉमन एरिया को बेचने के आरोपों से जुड़ी 2018 की FIR की Final Report पर अदालत ने गंभीर सवाल उठाए।

रिकॉर्ड नहीं दिया तो Principal Secretary की होगी एंट्री!
हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि यदि अगली तारीख तक मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो प्रिंसिपल सेक्रेटरी, हाउसिंग एंड टाउन प्लानिंग को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। साथ ही GDA के उपाध्यक्ष को भी अगली सुनवाई में कोर्ट में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है।
Final Report पर कोर्ट को क्यों आया गुस्सा ?
मामला यहीं खत्म नहीं होता। 2018 की FIR में बिल्डर पर कंप्लीशन सर्टिफिकेट हासिल किए बिना कब्जा देने और ग्राउंड फ्लोर का कॉमन एरिया बेचने का आरोप था। इसके बावजूद केस में Final Report दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने Final Report देखने के बाद सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में Final Report आखिर कैसे दाखिल की गई ?
दरोगा और रिपोर्ट मंजूर करने वाले अधिकारी से भी जवाब
कोर्ट ने Final Report दाखिल करने वाले सब-इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह और रिपोर्ट को मंजूरी देने वाले संबंधित अधिकारी का शपथ पत्र अगली सुनवाई पर पेश करने का आदेश दिया है।
GDA का जवाब भी कोर्ट को अधूरा लगा
GDA की ओर से दाखिल हलफनामे को हाईकोर्ट ने पूरी तरह अधूरा” बताया। कोर्ट ने कहा कि उसके सवाल का जवाब हलफनामे में नहीं दिया गया था और बेहतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
14 सितंबर को फिर लगेगी अदालत
मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 को होगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि 2011 के GDA उपाध्यक्ष का रिकॉर्ड क्या सामने आता है, Final Report पर संबंधित अधिकारी क्या जवाब देते हैं और कोर्ट के सवालों पर GDA का नया शपथ पत्र क्या तस्वीर रखता है।

The Principal Secretary Housing Lucknow didn’t provide a single opportunity to our Association against the appeal of Builder Ansal Housing and Construction Limited against the Order of GDA which was never implemented by the Builder in spite of the fact that there is a provision under the UP Apartment Act No 16 of 2010 that as per principal of natural justice no one should be denied an opportunity to be heard and no Order be passed.
The Principal Secretary Housing Lucknow neither provided an opportunity to be heard nor pass an Order on the appeal of Builder. The case is still pending before the Principal Secretary Housing after the lapse of 10 years.