टाटा स्टील ने गाजियाबाद में छेड़ा सेफ्टी अभियान, उद्योगों को एक मंच पर लाकर दिया बड़ा संदेश
‘सेफ्टी कनेक्ट’ में 15 से अधिक कंपनियां जुटीं
हादसों पर वार के लिए तकनीक, अनुभव और ‘विजन जीरो’ पर जोर
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। औद्योगिक हादसों के खिलाफ टाटा स्टील ने गाजियाबाद में सुरक्षा की मुहिम को नई धार दी है। कंपनी की पहल ‘सेफ्टी कनेक्ट’ के तहत 15 से अधिक प्रमुख उद्योगों, फैक्टरी निदेशालय के अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर सुरक्षित कार्यस्थल के लिए साझा रणनीति पर मंथन कराया गया। टाटा स्टील ने स्पष्ट किया कि हादसों को रोकना सिर्फ नियमों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उद्योग जगत की सामूहिक प्राथमिकता होनी चाहिए।

बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में डिप्टी डायरेक्टर फैक्टरीज आलोक कुमार सिंह, असिस्टेंट डायरेक्टर सुरेंद्र बहादुर व कृपांशु गुप्ता तथा DGFASLI के पूर्व डायरेक्टर जनरल डॉ. अवनीश सिंह शामिल हुए। डाबर, हैवेल्स, श्रीराम पिस्टन्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, मोहन मीकिन्स, पंजाब बेवेल एंड गियर्स और EINS Technik समेत कई प्रमुख उद्योगों ने भाग लिया। इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और व्यापक बनाया।

तकनीक से सुरक्षा को नई धार
टाटा स्टील की इस पहल में तकनीक को सुरक्षा का मजबूत हथियार बनाने पर भी जोर रहा। टेक्नोलॉजी पार्टनर नोवैक टेक्नोलॉजीज ने औद्योगिक सुरक्षा को मजबूत करने वाले नए तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए। वहीं DGFASLI के पूर्व डायरेक्टर जनरल डॉ. अवनीश सिंह ने ‘विजन जीरो रेटिंग सिस्टम’ और इंडो-जर्मन सहयोग के जरिए भारत में सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।
टाटा स्टील की सुरक्षा टीम की अहम भूमिका
‘सेफ्टी कनेक्ट’ को आकार देने और उद्योगों के बीच संवाद कायम करने में टाटा स्टील की सुरक्षा टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। रवि शंकर मिश्रा, सुनील कुमार, आकाश कुमार तिवारी और चंद्र शेखर सिंह ने आयोजन के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों, फैक्टरी निदेशालय, तकनीकी साझेदारों और अन्य हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत किया।
टाटा स्टील की यह पहल सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं दिखी, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा को साझा जिम्मेदारी बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास के रूप में सामने आई। ‘सेफ्टी कनेक्ट’ का मूल संदेश यही रहा कि हादसा होने के बाद प्रतिक्रिया से बेहतर है, हादसा होने से पहले उसकी वजह को खत्म करना।
