बड़ी खबर : मोती रेजीडेंसी में कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बिना फ्लैटों की रजिस्ट्री पर लगी रोक!
मोती रेजीडेंसी के टावर बी और डी पर जीडीए सख्त, रजिस्ट्री रोकने के लिए उप निबंधक को भेजा पत्र
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। अगर आप भी फ्लैट खरीदने जा रहे हैं, तो केवल कीमत और सुविधाएं देखकर फैसला न करें। खरीद से पहले संपत्ति के सभी दस्तावेज, पूर्णता प्रमाण-पत्र और जरूरी स्वीकृतियों की अच्छी तरह जांच जरूर करें। मोती रेजीडेंसी का मामला खरीदारों के लिए एक अहम सावधानी है। राजनगर एक्सटेंशन स्थित मोती रेजीडेंसी के टावर बी और डी के फ्लैटों की रजिस्ट्री को लेकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने बड़ा कदम उठाया है। जीडीए ने उप निबंधक को पत्र भेजकर कहा है कि दोनों टावरों के फ्लैटों की रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लगाने की कार्रवाई की जाए। GDA के पत्र के मुताबिक मोती रेजिडेंसी सोसाइटी का विकास/निर्माण मैसर्स टेकमैन बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया है।

प्राधिकरण के पत्र में साफ कहा गया है कि टावर ए और सी के लिए आंशिक पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जा चुका है, जबकि टावर बी और डी के लिए आंशिक पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त नहीं किया गया है। इसके बावजूद इन दोनों टावरों में फ्लैटों की खरीद-बिक्री और निवास किए जाने की शिकायतें प्राधिकरण तक पहुंची हैं।
बिना प्रमाण-पत्र के निवास पर भी सवाल
शिकायतों के आधार पर जीडीए ने मौके का निरीक्षण कराया। प्राधिकरण के अनुसार निरीक्षण में सुरक्षा मानकों में कमी पाई गई। पत्र में कहा गया है कि बिना आंशिक पूर्णता प्रमाण-पत्र के फ्लैटों की खरीद-बिक्री और उनमें निवास सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है तथा भविष्य में अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
कानून में भी पहले प्रमाण-पत्र, फिर हस्तांतरण
उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम, 2010 की धारा 4(5) उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा (15क-1) में प्रावधान है कि प्रवर्तक किसी अपार्टमेंट को निर्धारित प्राधिकारी से पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के बाद ही हस्तांतरित कर सकता है।
ऐसे में जीडीए का उप निबंधक को भेजा गया यह पत्र सीधे उस सवाल को सामने लाता है कि जब टावर बी और डी के लिए पूर्णता प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं था, तो इन टावरों के फ्लैटों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री किस आधार पर हुई ?
