October 15, 2026
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क्या KDP ग्रैंड सवाना के N-111 पर चलेगा GDA का डंडा ? दो नोटिस के बाद प्रवर्तन विभाग को कार्रवाई के निर्देश!

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करीब एक महीने से सोसाइटी में धरना, AOA की शिकायत पर हरकत में आया प्राधिकरण

गेस्ट हाउस के इस्तेमाल से जुड़े दस्तावेजों के बीच अब कार्रवाई का इंतजार

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की KDP ग्रैंड सवाना सोसाइटी में N-111 को लेकर जारी विवाद अब गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) के लिए भी परीक्षा बनता जा रहा है। गेस्ट हाउस रूम को आवासीय इकाई में बदलने के आरोपों के बीच सोसाइटी में करीब एक महीने से धरना चल रहा है। दो नोटिस जारी होने के बाद भी विवाद का समाधान नहीं होने पर अब प्राधिकरण ने प्रवर्तन विभाग को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। GDA के संयुक्त सचिव की ओर से 15 अक्टूबर को जारी पत्र के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या अब N-111 के मामले में ठोस कार्रवाई होगी या मामला एक बार फिर कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह जाएगा।

क्लब हाउस के ऊपर कथित तौर पर इसी N-111 में हो रहे निर्माण कार्य पर विवाद है

KDP ग्रैंड सवाना अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी की शिकायत इस पूरे विवाद का आधार है। GDA के पत्र में उल्लेख है कि प्राधिकरण ने 26 और 28 सितंबर 2026 को N-111 में निर्माण करने वाले विवेक गोयल और बिल्डर को पत्र भेजे थे। संयुक्त सचिव के पत्र के अनुसार, इन पत्रों का जवाब प्रवर्तन जोन को नहीं मिला। ऐसे में अब प्राधिकरण के सामने शिकायत की जांच के साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि पहले किए गए पत्राचार के बाद मामले में आगे की कार्रवाई किस तरह और कितनी तेजी से होती है।

डीड ऑफ डिक्लेरेशन और किराये की रसीदें बनीं अहम कड़ी

इस विवाद में डीड ऑफ डिक्लेरेशन के पृष्ठ 12 का पैरा 8.14 महत्वपूर्ण है। इसमें क्लब, स्विमिंग पूल, पार्टी हॉल, क्रेच और गेस्ट रूम जैसी सुविधाओं का उल्लेख किया गया है। इसके साथ वर्ष 2020 की AOA की तीन बुकिंग रसीदें भी सामने आई हैं, जिनमें क्लब के साथ गेस्ट हाउस की बुकिंग और भुगतान से संबंधित विवरण दर्ज दिखाई देते हैं। रसीदों पर 2,000, 4,000 और 8,000 रुपये की रकम अंकित है।

साल 2020 में क्लब के साथ गेस्ट रूम की बुकिंग रसीद

AOA अध्यक्ष का दावा है कि सोसाइटी में N-111 के अलावा कोई दूसरा गेस्ट हाउस नहीं है। ऐसे में इन रसीदों और परियोजना के दस्तावेजों का महत्व बढ़ जाता है। हालांकि, रसीदों पर N-111 का नंबर स्पष्ट नहीं है, इसलिए उनका इस इकाई से सीधा संबंध स्थापित करने के लिए बुकिंग रजिस्टर और अन्य अभिलेखों का मिलान जरूरी होगा। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि गेस्ट हाउस की सुविधा किस स्थान पर थी, उसका इस्तेमाल किस रूप में हुआ और क्या बाद में स्वीकृत मानचित्र के विपरीत कोई बदलाव किया गया।

इस मामले में AOA ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि N-111 के मूल स्वरूप या स्वीकृत मानचित्र में बदलाव किया गया, तो क्या इसके लिए अपार्टमेंट ओनर्स की आवश्यक सहमति ली गई थी ? AOA का आरोप है कि इस संबंध में उससे कोई अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) नहीं लिया गया। ऐसे में जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि कथित बदलाव किस आधार पर और किन अनुमतियों के तहत किया गया। उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम, 2010 और परियोजना से जुड़े दस्तावेजों के प्रावधानों के संदर्भ में इस सवाल की जांच जरूरी है कि क्या संबंधित प्रक्रिया का पालन किया गया था।

बिना कम्प्लीशन सर्टिफिकेट कब्जे पर भी GDA की सख्ती

इसी बीच, GDA की एक अन्य हालिया कार्रवाई भी चर्चा में है। प्राधिकरण ने बिना कम्प्लीशन सर्टिफिकेट फ्लैटों का कब्जा देने के मामले में बिल्डर को एक सप्ताह के भीतर प्रमाणपत्र प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं। निर्देशों का पालन नहीं होने पर बिल्डर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी भी दी गई है। इस कार्रवाई से बिल्डर परियोजनाओं में स्वीकृत नियमों के पालन और खरीदारों के हितों की सुरक्षा का मुद्दा फिर सामने आया है।

हालांकि, कम्प्लीशन सर्टिफिकेट से जुड़ा मामला अलग है, लेकिन दोनों प्रकरणों में प्राधिकरण की भूमिका और उसके निर्देशों के पालन का सवाल महत्वपूर्ण है। खरीदारों के हितों से जुड़े मामलों में आदेश जारी होना पहला कदम है; उनका प्रभावी अनुपालन और उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है।

अब निगाहें प्रवर्तन जोन पर

GDA ने N-111 मामले में स्वीकृत मानचित्र, डीड ऑफ डिक्लेरेशन, बायर्स टू सेल एग्रीमेंट, कॉम्प्लेक्स मेंटेनेंस एंड मैनेजमेंट एग्रीमेंट तथा सोसाइटी के अन्य अभिलेखों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। पत्र के अनुसार, यदि स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण या अवैध कब्जे की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार प्रवर्तन कार्रवाई की जानी चाहिए।

करीब एक महीने से चल रहे धरने और पहले के पत्राचार के बाद अब संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई निर्णायक होगी। क्या मौके का निरीक्षण कर N-111 के निर्माण और इस्तेमाल की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी ? क्या दस्तावेजों में दर्ज प्रावधानों और मौके की स्थिति का मिलान होगा ? और यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो क्या जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी ?

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