October 21, 2026
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रावण के पुतले में समेटा पर्यावरण संरक्षण का संदेश, गार्डिनिया स्क्वायर के बच्चों की पहल बनी मिसाल!

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विजयादशमी पर बच्चों ने दिखाई नई राह, वेस्ट मटीरियल से तैयार किया इको-फ्रेंडली रावण

परंपरा के साथ पर्यावरण बचाने का दिया संदेश

NEWS1UP

संवाददाता

गाजियाबाद। रावण दहन की परंपरा के बीच क्रॉसिंग्स रिपब्लिक की गार्डिनिया स्क्वायर सोसाइटी के बच्चों ने इस विजयादशमी पर एक अलग मिसाल पेश की। घरों में बेकार पड़ी वस्तुओं को कूड़ा समझकर फेंकने के बजाय बच्चों ने उन्हीं से इको-फ्रेंडली रावण तैयार कर दिया। उनकी इस पहल ने त्योहार की खुशियों को पर्यावरण संरक्षण के संदेश से जोड़ते हुए समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण रखा।

बेकार वस्तुओं से तैयार किया रावण, सोच में दिखी नई पीढ़ी की समझ

आमतौर पर त्योहारों पर होने वाले आयोजनों में साज-सज्जा और भव्यता पर जोर रहता है, लेकिन गार्डिनिया स्क्वायर के बच्चों ने अपनी रचनात्मकता से उत्सव मनाने का एक अलग तरीका चुना। वेस्ट मटीरियल से रावण तैयार कर उन्होंने यह संदेश दिया कि जिसे हम अनुपयोगी समझकर फेंक देते हैं, उसका भी सार्थक इस्तेमाल किया जा सकता है।

बच्चों का यह प्रयास महज रावण बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने कचरे के पुनः उपयोग और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की अहमियत भी दर्शायी।

रावण दहन के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश

सोसाइटी में आयोजित कार्यक्रम में निवासियों, अभिभावकों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रावण दहन के दौरान बच्चों की इस पहल की सराहना की गई और उनका उत्साहवर्धन किया गया। सोसाइटी के नागरिकों ने इसे नई पीढ़ी की सकारात्मक सोच और पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता का परिचायक बताया।

त्योहार मनाने का तरीका बदले, प्रकृति की कीमत पर नहीं

त्योहार हमारी संस्कृति और परंपराओं के प्रतीक हैं, लेकिन उनके आयोजन में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। गार्डिनिया स्क्वायर के बच्चों ने अपनी पहल से यही संदेश दिया कि परंपराओं को निभाने के लिए प्रकृति की अनदेखी करना जरूरी नहीं है।

आज जब कचरे का बढ़ता संकट और प्रदूषण समाज के सामने गंभीर चुनौती हैं, तब बच्चों की यह पहल एक बड़ा सबक देती है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल भाषण देना पर्याप्त नहीं, बल्कि अपनी आदतों और व्यवहार में बदलाव लाना जरूरी है।

गार्डिनिया स्क्वायर के बच्चों ने वेस्ट मटीरियल से रावण बनाकर साबित किया कि बदलाव की शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन उसका संदेश दूर तक जा सकता है। उनकी यह पहल विजयादशमी के पारंपरिक संदेश, बुराई पर अच्छाई की जीत, के साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने की सीख भी देती है।

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