ग्रेटर नोएडा के PNB में करोड़ों की कथित हेराफेरी! किसानों की जमा-पूंजी पर संकट, 16 शिकायतों पर FIR दर्ज
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किसी के खाते से 35 लाख, किसी के 40 लाख तो किसी के करीब एक करोड़ रुपये गायब होने का आरोप
पासबुक में रकम दर्ज, लेकिन खाते में नहीं मिली राशि
बैंक मैनेजर समेत पांच कर्मचारी निलंबित, पुलिस ने मांगी इंटरनल जांच रिपोर्ट
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
ग्रेटर नोएडा। बैंक में जमा रकम को लोग अपनी मेहनत की कमाई का सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते हैं। किसानों के लिए यह जमीन अधिग्रहण का मुआवजा है, तो मजदूरों और आम परिवारों के लिए जीवनभर की बचत। लेकिन ग्रेटर नोएडा के पीआई-1 सेक्टर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा से जुड़ा कथित हेराफेरी का मामला इसी भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि किसानों, मजदूरों और सोसाइटियों में रहने वाले लोगों के बैंक खातों तथा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में जमा करोड़ों रुपये उनकी जानकारी और सहमति के बिना दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।
मामले में 16 लोगों की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने बैंक से आंतरिक जांच रिपोर्ट मांगी है, जबकि बैंक मैनेजर समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब जांच का केंद्र यह है कि रकम कहां गई, लेनदेन कैसे हुए और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
चेक बाउंस होने पर खुली कथित हेराफेरी की परतें
मामले का खुलासा तब हुआ, जब कुछ खाताधारकों के चेक बाउंस हो गए। बैंक पहुंचकर खातों की जांच कराने पर कथित तौर पर पता चला कि खातों में दर्ज रकम के मुकाबले वास्तविक बैलेंस कम था।
खाताधारकों के मुताबिक, किसी के खाते से 35 लाख, किसी के खाते से 40 लाख तो किसी के खाते से करीब एक करोड़ रुपये तक ट्रांसफर किए जाने का आरोप है। कुछ लोगों का दावा है कि उनकी पासबुक में जमा रकम और लेनदेन की प्रविष्टियां दर्ज हैं, लेकिन खाते में उतनी राशि मौजूद नहीं है।
किस्तों में ट्रांसफर, मोबाइल नंबर बंद करने का भी आरोप
खाताधारकों का आरोप है कि बड़ी रकम एकमुश्त निकालने के बजाय 10 लाख, 15 लाख और 20 लाख रुपये की अलग-अलग किस्तों में दूसरे खातों में ट्रांसफर की जाती रही। यह भी दावा किया जा रहा है कि खातों से जुड़े मोबाइल नंबर बंद कर दिए गए, ताकि खाताधारकों को लेनदेन की जानकारी न मिल सके।
कुछ खाताधारकों के अनुसार, जब उन्हें रकम की जरूरत होती थी, तो उनके खाते में 10 से 15 लाख रुपये तक वापस जमा कर दिए जाते थे। आरोप है कि इससे खाते में पर्याप्त रकम होने का भरोसा बना रहता था और कथित लेनदेन पर संदेह नहीं होता था।
खाताधारकों ने यह भी आरोप लगाया है कि रकम ऐसे दूसरे खातों में भेजी गई, जिनके खाताधारकों के नाम समान बताए जा रहे हैं। जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि लेनदेन किस प्रक्रिया के तहत हुए और रकम किन खातों में पहुंची।
बैंक मैनेजर समेत पांच कर्मचारी निलंबित
मामले में शाखा प्रबंधक रानी और सफाईकर्मी के रूप में कार्यरत एक महिला कर्मचारी को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। बैंक प्रबंधन ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मैनेजर समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित किया गया है और शाखा के स्टाफ में बदलाव कर दूसरी शाखाओं से अधिकारी व कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
हालांकि, किसी कर्मचारी पर संदेह या उसका निलंबन दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। संबंधित लोगों की भूमिका जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।
किसानों के मुआवजे की रकम भी प्रभावित होने का दावा
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रभावित खाताधारकों में आसपास के गांवों के किसान भी शामिल बताए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनके खातों में जमीन अधिग्रहण के बदले मिले लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक जमा थे।
यह रकम उनके लिए केवल बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि जमीन के बदले मिली आर्थिक पूंजी है। इसके कथित अनधिकृत हस्तांतरण से प्रभावित परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। मामले की जानकारी मिलने के बाद किसान-मजदूर संगठन के पदाधिकारी और प्रभावित खाताधारक बैंक पहुंचे तथा रकम का हिसाब देने और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
16 शिकायतों पर FIR, पुलिस ने मांगी बैंक की रिपोर्ट
पुलिस ने 16 लोगों की शिकायतों के आधार पर FIR दर्ज कर बैंक से आंतरिक जांच रिपोर्ट मांगी है। अब जांच में यह पता लगाना होगा कि खाताधारकों की सहमति के बिना रकम ट्रांसफर हुई या नहीं, संबंधित लेनदेन किसने अधिकृत किए, मोबाइल नंबर बंद होने के आरोपों में कितनी सच्चाई है और बैंक की निगरानी व्यवस्था में कोई चूक हुई या नहीं।
