October 29, 2026
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नोएडा: IGRS निस्तारण में लापरवाही पर पुलिस कमिश्नर का बड़ा प्रहार, 12 चौकी इंचार्ज दारोगा सस्पेंड

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सेक्टर-63 कोतवाल पर भी गिर चुकी है गाज, बिसरख ACP को भी हटाया गया

पुलिस महकमे में जवाबदेही का सख्त संदेश

NEWS1UP

संवाददाता

नोएडा। जनता की शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही अब पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर भारी पड़ रही है। IGRS शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही के आरोप में नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने 12 चौकी इंचार्ज दारोगाओं को निलंबित कर दिया है। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने पुलिस महकमे में साफ संदेश दे दिया है कि शिकायतों के निस्तारण में ढिलाई को महज विभागीय चूक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

कार्रवाई का दायरा केवल चौकी प्रभारियों तक सीमित नहीं है। दो दिन पहले सेक्टर-63 के कोतवाल अमित काकरान को भी निलंबित किया गया था। वहीं, जांच में कथित हीलाहवाली के मामले में बिसरख के ACP को भी हटा दिया गया था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि शिकायतों और जांच की प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने पर जोर दिया जा रहा है।

निलंबित किए गए 12 चौकी प्रभारियों में राहुल त्यागी (ममूरा चौकी, थाना फेज-3), अमित कुमार (सेक्टर-22 चौकी, थाना सेक्टर-24), सचिन कुमार (सेक्टर-57 चौकी, थाना सेक्टर-58), विकास कुमार (बरौला चौकी, थाना सेक्टर-49), रिंकू कुमार (सर्फाबाद चौकी, थाना सेक्टर-113), गौरव सिंह (सोरखा चौकी, थाना सेक्टर-113), नितिन मलिक (गढ़ी चौखंडी चौकी, थाना फेज-3), नवीन कुमार (बहलोलपुर चौकी, थाना सेक्टर-63), सुधीर कुमार (सेक्टर-62 चौकी, थाना सेक्टर-58), रोहित तोमर (छिजारसी चौकी, थाना सेक्टर-63), सुमित कुमार (सेक्टर-11 चौकी, थाना सेक्टर-24) और विपिन कुमार (मोरना चौकी, थाना सेक्टर-24) शामिल हैं।

शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर सीधा एक्शन

IGRS यानी इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम के माध्यम से आम नागरिक अपनी शिकायतें शासन और संबंधित विभागों तक पहुंचाते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ऐसे में शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।

पुलिस कमिश्नर की ताजा कार्रवाई इसी जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 12 चौकी इंचार्ज दारोगाओं का निलंबन इस बात का संकेत है कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही को अब हल्के में लेने की गुंजाइश कम होती जा रही है।

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