October 15, 2026
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”रंगमंच” समाज का दर्पण, जनचेतना का माध्यम: योगी आदित्यनाथ

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मुख्यमंत्री ने भारतेंदु नाट्य अकादमी में 5 से 12 अप्रैल तक चलने वाले स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह का किया शुभारंभ

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

लखनऊ। भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह का रविवार को भव्य शुभारंभ करते हुए योगी आदित्यनाथ ने रंगमंच को समाज का दर्पण बताते हुए इसे जनचेतना का सशक्त माध्यम कहा। 5 से 12 अप्रैल तक चलने वाले इस आयोजन के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री ने कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं को राष्ट्रभक्ति आधारित नाटकों के सृजन के लिए प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि-

“जहां भावनाएं शब्द बनती हैं और शब्द अभिनय में ढलते हैं, वहीं से समाज को नई दिशा मिलती है।”

उन्होंने संवाद, संगीत, स्क्रिप्ट और भाषा की प्रभावशीलता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं।

इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रनायकों पर जोर

सीएम ने आनंदमठ और ‘वंदे मातरम्’ के संदर्भ में राष्ट्रभक्ति की भावना को रेखांकित किया। उन्होंने बंगाल अकाल और स्पेनिश फ्लू जैसी ऐतिहासिक त्रासदियों का जिक्र करते हुए ब्रिटिश शासन की संवेदनहीनता पर निशाना साधा, वहीं कोरोना काल में सरकार की सक्रियता को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि-

“जब सरकार संवेदनशील होती है, तो वह आपदा से भी लड़कर समाज की रक्षा करती है।”

भूले-बिसरे नायकों को मंच पर लाएं

मुख्यमंत्री ने महाराज सुहेलदेव, रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आज़ाद और रामप्रसाद बिस्मिल जैसे राष्ट्रनायकों पर लघु नाटक तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अतीत में समाज के नायकों को उपेक्षित किया गया, जबकि गलत चरित्रों को महिमामंडित किया गया, जिसका प्रभाव सामाजिक मूल्यों पर पड़ा।

सीएम ने विशेष रूप से महाराज सुहेलदेव के शौर्य का उल्लेख करते हुए कहा कि अब जनता का रुझान उनके स्मारकों की ओर बढ़ा है, जो ऐतिहासिक चेतना के पुनर्जागरण का संकेत है।

साहित्य और रंगमंच की विरासत पर गर्व

मुख्यमंत्री ने भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी का प्रणेता बताते हुए उनके नाटकों ‘अंधेर नगरी’ और ‘भारत दुर्दशा’ को जनजागरण का माध्यम बताया। साथ ही जयशंकर प्रसाद के ‘स्कंदगुप्त’ और ‘चंद्रगुप्त’ जैसे नाटकों का उल्लेख करते हुए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की परंपरा को याद किया।

युवाओं और लोकसंस्कृति पर फोकस

सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश कला, संगीत और रंगमंच की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने स्कूलों-कॉलेजों में नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लोककलाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही आगामी दिनों में रामधारी सिंह दिनकर की कृतियों पर आधारित विशेष आयोजन की भी जानकारी दी।

संस्कृति से समाज को जोड़ने का संदेश

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि “रंगमंच केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम है।” उन्होंने संस्थाओं से नई और पुरानी पीढ़ी को जोड़कर सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

इस दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, पर्यटन-संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक योगेश शुक्ल, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह समेत अनेक रंगकर्मी, पूर्व छात्र आदि मौजूद रहे।

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