UP में ‘गन कल्चर’ पर सख्त हाईकोर्ट, हर हथियार लाइसेंस का मांगा पूरा डेटा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार और पुलिस से तलब की विस्तृत रिपोर्ट, इंस्टाग्राम पर हथियार प्रदर्शन पर जताई सख्त आपत्ति, अफसरों से व्यक्तिगत हलफनामे मांगे
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विषेश संवाददाता
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ते “गन कल्चर” पर गंभीर चिंता जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य में जारी सभी हथियार लाइसेंसों का विस्तृत डेटा तलब कर लिया है और साफ कहा है कि बिना नियंत्रण के हथियारों की उपलब्धता समाज के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि लाइसेंसी हथियार अब सुरक्षा के बजाय “प्रभाव और दबदबा दिखाने” का माध्यम बनते जा रहे हैं, जिससे आम लोगों में भय का वातावरण बन रहा है।

सोशल मीडिया पर ‘हथियार प्रदर्शन’ पर भी कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
अदालत ने खास तौर पर इंस्टाग्राम रील्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हथियारों के खुले प्रदर्शन पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि यह खतरनाक प्रवृत्ति युवाओं के बीच “गन कल्चर” को ग्लैमराइज कर रही है और सामाजिक स्वीकृति पाने का जरिया बनती जा रही है, जो कानून के शासन को कमजोर करती है।
कोर्ट के अहम निर्देश: पूरे सिस्टम की होगी पड़ताल
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं-
राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) से पूछा गया कि क्या यूपी में आर्म्स लाइसेंस का केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार है
जिला मजिस्ट्रेटों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी आर्म्स पॉलिसी है या नहीं, इस पर जवाब मांगा गया
Arms Rules, 2016 के रूल 16 के पालन की स्थिति स्पष्ट करने को कहा
सभी जिलों के डीएम को जिला व थाना स्तर पर हथियारों का पूरा ब्योरा देने का निर्देश
एक ही परिवार के कई सदस्यों के पास लाइसेंस होने के मामलों की पहचान के आदेश
2 या अधिक आपराधिक मामलों वाले लाइसेंस धारकों की अलग सूची तैयार करने का निर्देश
इसके अलावा, सभी एसपी, एसएसपी और पुलिस कमिश्नरों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर विस्तृत जानकारी देने को कहा गया है।
‘अनियंत्रित विवेकाधिकार’ पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
अदालत ने साफ कहा कि हथियार लाइसेंस देने में “अनियंत्रित विवेकाधिकार” भ्रष्टाचार और दुरुपयोग को जन्म देता है, जो लोकतंत्र में कानून के शासन के लिए सीधा खतरा है।
एक याचिका से खुला बड़ा मुद्दा
यह पूरा मामला जौहरी जय शंकर उर्फ बैरिस्टर की याचिका से सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी आर्म्स लाइसेंस अर्जी को भदोही के जिला मजिस्ट्रेट ने करीब 4 साल तक लंबित रखने के बाद खारिज कर दिया।
2018 में पुलिस रिपोर्ट उनके पक्ष में थी
इसके बावजूद 2022 में आवेदन खारिज कर दिया गया
2025 में अपील भी बिना कारण बताए निरस्त कर दी गई
इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए डीएम और अपीलीय प्राधिकारी से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।
अगली सुनवाई 28 अप्रैल को
मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है। इस दौरान राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों को अपने जवाब और डेटा अदालत के सामने पेश करना होगा।
‘सुरक्षा’ से ‘शो-ऑफ’ तक का खतरनाक सफर
हाईकोर्ट की इस सख्ती से साफ संकेत मिल रहा है कि उत्तर प्रदेश में हथियार लाइसेंस व्यवस्था की गहन समीक्षा होने जा रही है। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि “गन कल्चर” को किसी भी कीमत पर सामाजिक स्वीकृति नहीं दी जा सकती।
