डीपीएसजी का ‘तुगलकी फरमान’! 8 घंटे स्कूल, शनिवार भी क्लास, भड़के पैरेंट्स, घेरा स्कूल !

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स्कूल का दावा ‘बच्चों की बेहतरी

अभिभावकों ने बताया ‘मनमानी

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद। मेरठ रोड स्थित डीपीएसजी स्कूल में शनिवार को उस वक्त हालात बेकाबू हो गए जब सैकड़ों की संख्या में अभिभावक स्कूल गेट पर इकट्ठा होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन करने लगे। मामला स्कूल प्रबंधन द्वारा अचानक और एकतरफा तरीके से बच्चों की क्लास टाइमिंग में करीब दो घंटे की बढ़ोतरी का है, जिसने अभिभावकों के सब्र का बांध तोड़ दिया।

सुबह से ही गेट पर जमा अभिभावकों ने जमकर नारेबाजी की और कई बार एनएच-58 को जाम करने का प्रयास किया। मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्कूल प्रबंधन और जिला प्रशासन की ओर से देर तक कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

स्कूल का तर्क बनाम अभिभावकों का गुस्सा

इस पूरे विवाद के बीच स्कूल प्रबंधन का दावा है कि बढ़ाई गई टाइमिंग बच्चों की “बेहतरी” के लिए है, ताकि उन्हें अधिक शैक्षणिक समय और गतिविधियों का लाभ मिल सके। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सैकड़ों की संख्या में सड़कों पर उतरे अभिभावक इस दावे को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना और सहमति के लिया गया यह फैसला न केवल मनमाना है, बल्कि बच्चों के हितों के खिलाफ भी है।

भीषण गर्मी में ‘लंबी कैद’, बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़

अभिभावकों का आरोप है कि जिस समय देश में भीषण गर्मी की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने वाला है, ऐसे में बच्चों की स्कूल टाइमिंग बढ़ाना सीधे-सीधे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।

एक आक्रोशित अभिभावक ने बताया कि उनकी चौथी कक्षा में पढ़ने वाली बेटी सुबह 7:50 बजे बस पकड़ती है और अब उसकी वापसी का समय 4:50 बजे कर दिया गया है। यानी लगभग 9 घंटे का लंबा स्कूल डे, जो छोटे बच्चों के लिए किसी सजा से कम नहीं।

शनिवार को भी स्कूल खोलने की तैयारी, और भड़का आक्रोश

विवाद को और हवा तब मिली जब स्कूल प्रबंधन की ओर से शनिवार को भी स्कूल खोले जाने की बात सामने आई। पहले से ही बढ़ी हुई टाइमिंग से परेशान अभिभावकों के लिए यह फैसला आग में घी डालने जैसा साबित हुआ। उनका कहना है कि सप्ताह में छह दिन लंबी अवधि तक स्कूल चलाना बच्चों पर अतिरिक्त मानसिक और शारीरिक दबाव डालने जैसा है।

तुगलकी फरमान” से फूटा गुस्सा

अभिभावक ईशा त्यागी ने स्कूल प्रबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा,

“यह फैसला पूरी तरह तुगलकी फरमान है। छोटे-छोटे बच्चों को आठ-आठ घंटे स्कूल में रोकना अमानवीय है। अब शनिवार को भी स्कूल खोलने की बात बच्चों के साथ अन्याय है।”

ट्रांसपोर्ट की अव्यवस्था का बोझ बच्चों पर ?

सूत्रों के मुताबिक, स्कूल में ट्रांसपोर्ट व्यवस्था की भारी अनियमितता के चलते यह निर्णय लिया गया है। आरोप है कि अपनी व्यवस्थागत खामियों को सुधारने के बजाय स्कूल प्रबंधन उसका बोझ सीधे मासूम बच्चों पर डाल रहा है।

यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या स्कूल प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए बच्चों को ‘प्रयोगशाला’ बना रहा है ?

फीस, किताब, ड्रेस के बाद अब समय पर भी कब्जा

दीपांशु मित्तल, सामाजिक कार्यकर्ता

सामाजिक कार्यकर्ता दीपांशु मित्तल ने इसे शिक्षा के नाम पर खुला शोषण बताया। 

उन्होंने कहा-

“स्कूल पहले ही फीस, किताबों और ड्रेस में अपनी मनमानी करता रहा है। अब ट्रांसपोर्ट की खामियों को छिपाने के लिए बच्चों का समय बढ़ाना साफ दिखाता है कि प्रबंधन को किसी कानून या प्रशासन का डर नहीं है।”

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

घंटों तक चले इस हंगामे के बावजूद जिला प्रशासन की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। अभिभावकों का कहना है कि यदि जल्द ही इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

शिक्षा या शोषण ?

यह पूरा मामला एक गंभीर बहस को जन्म देता है, क्या निजी स्कूल शिक्षा के नाम पर बच्चों और अभिभावकों पर मनमानी थोपने लगे हैं ?

विशेषज्ञों के अनुसार,

छोटे बच्चों के लिए अत्यधिक लंबी स्कूल टाइमिंग न केवल शारीरिक थकावट बढ़ाती है, बल्कि मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकती हैं।

अभिभावकों की चेतावनी

प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों ने साफ कहा है कि यदि स्कूल प्रबंधन ने जल्द ही यह फैसला वापस नहीं लिया और शनिवार को स्कूल खोलने का निर्णय भी रद्द नहीं किया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ने को मजबूर होंगे।

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