ब्राह्मण परिषद में नाराजगी के बाद बड़ा फैसला! कलराज मिश्र से बात, अब 11 सदस्यीय कमेटी करेगी संगठन का विस्तार
पिछली बैठक में उठे थे सवाल, मनमानी के आरोपों ने बढ़ाई थी हलचल
राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचा मामला, वार्ता के बाद बनी नई रणनीति
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भूमेश शर्मा
दादरी। विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद में पिछले दिनों उठे असंतोष और संगठन की कार्यशैली को लेकर सामने आए सवालों के बीच रविवार को दादरी में हुई महत्वपूर्ण बैठक ने नई दिशा तय कर दी। पिछली बैठक में जहां संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर खुलकर नाराजगी सामने आई थी, वहीं अब राष्ट्रीय नेतृत्व से बातचीत के बाद संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और जमीनी स्तर तक विस्तार देने की तैयारी शुरू हो गई है।
दुजाना निवासी रामेश्वर शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी पंडित पीतांबर शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
पिछली बैठक में उठी थी आवाज, राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचा मामला
दरअसल, पिछले रविवार को अंशु पब्लिक इंटर कॉलेज में हुई बैठक में परिषद की कार्यशैली और कार्यक्रमों को लेकर वक्ताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। बैठक में संगठन में एक व्यक्ति द्वारा मनमाने तरीके से निर्णय लिए जाने के आरोप भी लगाए गए थे।
मामला यहीं नहीं रुका। बैठक में मौजूद लोगों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि उनकी पीड़ा और संगठन से जुड़ी चिंताओं को सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष कलराज मिश्र तक पहुंचाया जाए। इसके लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र भेजा गया। पत्र मिलने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष कलराज मिश्र ने दूरभाष पर उसकी प्राप्ति की जानकारी दी और प्रतिनिधियों के साथ बैठकर बातचीत करने का आश्वासन दिया।

कलराज मिश्र से हुई वार्ता, कई अहम फैसलों पर बनी सहमति
इसके बाद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी पंडित पीतांबर शर्मा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष कलराज मिश्र से मुलाकात कर विस्तार से बातचीत की। इस वार्ता के बाद संगठन के विस्तार और पुनर्गठन को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी। इसमें जिले और मंडल के गठन के साथ वृत, प्रांत और बुंदेलखंड स्तर पर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर भी सहमति बनी।
रविवार की बैठक में पंडित पीतांबर शर्मा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ हुई बातचीत और उसमें बनी सहमति से उपस्थित लोगों को अवगत कराया।
अब 11 लोगों के हाथ में संगठन का नया खाका!
संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए बैठक में एक 11 सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया।
यह कमेटी तय करेगी कि-
जिले में कौन-कौन पदाधिकारी होंगे ?
नगर और ब्लॉक स्तर पर किसे जिम्मेदारी दी जाएगी ?
किन पदाधिकारियों को मंडल स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा ?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किन लोगों को जिम्मेदारी मिलेगी ?
प्रदेश स्तर पर संगठन में किन लोगों की भागीदारी होगी ?
यानी आने वाले दिनों में जिला, नगर, ब्लॉक से लेकर मंडल और प्रदेश तक संगठन का नया चेहरा इसी कमेटी के निर्णयों से तय होगा।
कमेटी में पंडित पीतांबर शर्मा, पंडित परमानंद शर्मा, मास्टर रामकुमार शर्मा, प्रधानाचार्य रविंद्र शर्मा, सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर हरिओम शर्मा, रविंद्र शर्मा, राजू पंडित, राजेश शर्मा, एडवोकेट रामवीर शर्मा और महिपाल शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ लोगों को शामिल किया गया।

सवाल सिर्फ कमेटी का नहीं, संगठन को घर-घर पहुंचाने का है
बैठक में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी भी सामाजिक संगठन की असली ताकत उसके पदाधिकारियों की संख्या नहीं, बल्कि उससे जुड़े समाज के लोगों की सक्रिय भागीदारी होती है। संगठन को मजबूत करने के लिए अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने, युवाओं को जिम्मेदारी देने, गांव-गांव संवाद बढ़ाने और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से परिषद की गतिविधियों को आम लोगों तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया गया।
वक्ताओं का कहना था कि अगर संगठन को वास्तव में मजबूत बनाना है तो पदों से पहले लोगों को जोड़ना होगा और नेतृत्व से पहले विश्वास पैदा करना होगा।
बैठक में गूंजा एकजुटता का संदेश
बैठक में अतुल शर्मा, राजू पंडित, रविंद्र शर्मा, महेश शर्मा, ज्ञानचंद शर्मा, एडवोकेट रामवीर शर्मा, सोनू भगत, एडवोकेट विश्वास, रामकुमार शर्मा और रत्नबीर शर्मा सहित कई लोगों ने अपने विचार रखे। सभी उपस्थित लोगों ने संगठन को मजबूत करने और अधिक से अधिक समाज के लोगों को परिषद से जोड़ने की दिशा में काम करने का संकल्प दोहराया।
बैठक में पंडित पीतांबर शर्मा द्वारा राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ हुई वार्ता के बाद लिए गए निर्णयों का सर्वसम्मति से समर्थन करने की बात भी कही गई।
असली चुनौती: संगठन को जमीन पर उतारना
रविवार की बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नई रणनीति परिषद को जमीनी स्तर पर पहले से ज्यादा मजबूत बना पाएगी ? पिछली बैठक में सामने आई नाराजगी के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व तक बात पहुंची, संवाद हुआ और अब संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से खड़ा करने की पहल शुरू हुई है।
अब 11 सदस्यीय कमेटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी, मतभेदों को पीछे छोड़कर लोगों को जोड़ना, युवाओं को आगे लाना और संगठन को गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक एक मजबूत, सक्रिय और भरोसेमंद मंच के रूप में स्थापित करना।
