[t4b-ticker]

16,754 फाइलें, 9 कर्मचारी और दो जिले: आखिर किस भरोसे चल रहा है डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय ??

0
DR

AOA-RWA की बढ़ती संख्या के बीच सरकारी व्यवस्था खुद संसाधनों के संकट में

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों से भी उठे सवाल

नोएडा शिफ्टिंग का आदेश, फिर भी जगह का इंतजार

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद/नोएडा। गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में हजारों हाईराइज सोसायटियां हैं। हर सोसायटी के साथ AOA, RWA, चुनाव, कार्यकारिणी, सदस्यता, ऑडिट रिपोर्ट और विवादों का एक अलग संसार है। इन सबकी निगरानी और वैधानिक कार्यवाही की जिम्मेदारी जिस कार्यालय पर है, उसकी अपनी स्थिति किसी बड़े सवाल से कम नहीं।

30 जून 2026 तक दोनों जिलों की 16,754 पंजीकृत पत्रावलियां, लेकिन उन्हें संभालने के लिए महज 9 कर्मचारी। इनमें पांच आउटसोर्स कर्मचारी हैं। यानी फाइलें बढ़ती गईं, सोसायटियां बढ़ती गईं, विवाद बढ़ते गए, लेकिन व्यवस्था उसी अनुपात में मजबूत नहीं हुई।

अब सवाल यह है कि इतने बड़े प्रशासनिक बोझ को आखिर किस भरोसे पर चलाया जा रहा है ?

16,754 फाइलें बनाम 9 कर्मचारी

डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय के 12 अगस्त के पत्र में 30 जून तक 16,754 पंजीकृत पत्रावलियों का आंकड़ा दिया गया है। पत्र में बढ़ती AOA, RWA और अन्य समितियों के साथ पत्रों और प्रपत्रों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में आ रही कठिनाइयों का भी उल्लेख है।

कार्यालय में चार नियमित/सम्बद्ध और पांच आउटसोर्स कर्मचारी हैं। पत्र में कम से कम छह कनिष्ठ एवं वरिष्ठ सहायकों की तैनाती या सम्बद्धता की जरूरत बताई गई है। यह आंकड़ा अपने आप में व्यवस्था की तस्वीर पेश करता है।

16,754 फाइलें और 9 कर्मचारी, क्या इसे किसी भी तरह पर्याप्त प्रशासनिक ढांचा कहा जा सकता है ?

दो जिले, एक व्यवस्था

गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर दोनों के लिए डिप्टी रजिस्ट्रार की साझा व्यवस्था है। शासन के अनुसार सप्ताह में तीन दिन गाजियाबाद और तीन दिन गौतमबुद्धनगर के लिए कार्यदिवस निर्धारित हैं। लेकिन रिकॉर्ड अब भी गाजियाबाद कार्यालय में है।

यानी अधिकारी दो जिलों में, फाइलों का मुख्य आधार एक जिले में। यह व्यवस्था उस दौर की हो सकती है जब सोसायटियों का दायरा सीमित था। लेकिन आज गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में दर्जनों नहीं, हजारों सोसायटियां और उनसे जुड़े संगठन हैं।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पुराना प्रशासनिक मॉडल नई जमीनी जरूरतों के साथ तालमेल बैठा पा रहा है ?

आदेश हो चुका, नोएडा में जगह अभी नहीं

विडंबना देखिए, इस समस्या का समाधान तलाशने की दिशा में शासन स्तर पर डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय को नोएडा शिफ्ट करने का आदेश पहले ही पारित हो चुका है। लेकिन आदेश के बावजूद नोएडा में कार्यालय के लिए जगह का निर्धारण अब तक नहीं हो सका है।

यानी फैसला हो चुका, लेकिन व्यवस्था जमीन पर नहीं उतरी।

इस देरी का सीधा असर गौतमबुद्धनगर की सोसायटियों पर पड़ता है, जिन्हें अपने ही जिले में संबंधित कार्यालय की सुविधा मिलनी चाहिए।

हाईकोर्ट की टिप्पणी ने बढ़ाया दबाव

कार्यालय की कार्यशैली पर उठते सवालों के बीच गाजियाबाद की एक सोसायटी से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियां भी सामने आ चुकी हैं। अदालत ने डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालयों की कार्यप्रणाली और सोसायटी चुनावों से जुड़े मामलों में नियमों के अनुपालन की समीक्षा की जरूरत पर गंभीरता जताई है।

यह सिर्फ किसी एक सोसायटी का विवाद नहीं है। जब एक ही तरह के मामले बार-बार न्यायिक जांच तक पहुंचते हैं, तो सवाल संबंधित आदेश से आगे बढ़कर पूरी कार्यप्रणाली पर जाता है।

डिप्टी रजिस्ट्रार का कार्यालय महज पत्राचार और फाइलों के आवागमन का केंद्र नहीं हो सकता। उसके पास वैधानिक जिम्मेदारियां हैं और उन्हीं के अनुरूप निर्णय और कार्रवाई अपेक्षित है।

रजिस्ट्रार ने भी माना, कर्मचारियों की कमी व्यापक है

डॉ अलका वर्मा (IAS), रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश

रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश डॉ. अलका वर्मा ने NEWS1UP से कहा कि कर्मचारियों की कमी सभी मंडलों में महसूस की जा रही है। इसके लिए शासन को लिखा गया है और जल्द ही नियमित अथवा सम्बद्ध कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी।

नोएडा कार्यालय के लिए स्थान के सवाल पर उनका कहना है कि डिप्टी रजिस्ट्रार वहां के शीर्ष अधिकारियों के संपर्क में हैं और इसका समाधान भी हो जाएगा। यह बयान साफ करता है कि समस्या केवल गाजियाबाद की नहीं, बल्कि विभाग के कई कार्यालयों में मानव संसाधन की चुनौती बनी हुई है।

लेकिन गाजियाबाद-गौतमबुद्धनगर का मामला ज्यादा गंभीर है, क्योंकि यहां फाइलें 16,754 हैं और जिम्मेदारी दो जिलों की।

सेक्टर-6 की खाली इमारत क्यों नहीं बन सकती अंतरिम समाधान ?

नोएडा में जगह तय होने का इंतजार कब तक चलेगा, इसका जवाब प्रशासन को देना होगा। इस बीच एक व्यावहारिक विकल्प पर विचार किया जा सकता है। नोएडा सेक्टर-6 स्थित प्राधिकरण की हाल ही में खाली हुई इमारत, यदि प्रशासनिक रूप से उपलब्ध और उपयुक्त हो, तो नई स्थायी इमारत तैयार होने तक डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय के लिए अंतरिम व्यवस्था के तौर पर इस्तेमाल की जा सकती है।

इससे शासन के शिफ्टिंग आदेश को जमीन पर उतारने में तेजी आ सकती है और गौतमबुद्धनगर की सोसायटियों को अपने जिले में ही कार्यालय उपलब्ध हो सकता है।

जब समाधान के लिए जगह मौजूद हो सकती है, तो फिर स्थायी व्यवस्था के इंतजार में अस्थायी समाधान क्यों नहीं तलाशा जाए ?

असली सवाल स्टाफ से बड़ा है

गाजियाबाद स्थित अव्यवस्थित ऑफिस की तस्वीर

छह कर्मचारी बढ़ा देना जरूरी है, लेकिन क्या इससे पूरी समस्या खत्म हो जाएगी ? शायद नहीं !  जरूरत है कि 16,754 पत्रावलियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो। लंबित मामलों की स्थिति स्पष्ट हो। आवेदन और शिकायतों के निस्तारण की समयसीमा तय हो। दोनों जिलों के रिकॉर्ड तक आसान पहुंच हो और महत्वपूर्ण आदेशों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

क्योंकि फाइलों की संख्या केवल एक आंकड़ा नहीं है। हर फाइल के पीछे एक संस्था, उसके सदस्य और उनके अधिकार जुड़े हैं।

अब फैसला व्यवस्था को करना है

आज स्थिति यह है कि 16,754 फाइलें हैं।, दो जिले हैं, 9 कर्मचारी हैं, रिकॉर्ड गाजियाबाद में है। नोएडा शिफ्टिंग का आदेश हो चुका है। जगह अब तक तय नहीं है। स्टाफ की कमी शासन के संज्ञान में है। और हाईकोर्ट कार्यप्रणाली की समीक्षा की जरूरत जता चुका है।

इसके बाद भी यदि व्यवस्था उसी पुराने ढर्रे पर चलती रहती है तो सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि कार्यालय पर काम कितना है। सवाल यह होगा कि क्या प्रशासन ने सोसायटियों की बदलती जरूरतों के अनुरूप अपनी व्यवस्था बदलने की जरूरत को गंभीरता से समझा है ?

गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर की सोसायटियां तेजी से बढ़ रही हैं। उनके विवाद बढ़ रहे हैं। इन सोसाइटियों के निवासियों के अधिकारों से जुड़े सवाल अदालतों तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में अब जरूरत एक और फाइल खोलने की नहीं, पूरी व्यवस्था खोलकर देखने की है।

16,754 फाइलें व्यवस्था के सामने खड़ा आंकड़ा नहीं, चेतावनी हैं।

और चेतावनी साफ है कि-

सोसायटियां 21वीं सदी में पहुंच चुकी हैं, लेकिन उन्हें संभालने वाली व्यवस्था अभी भी पुराने ढांचे में अटकी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!