राखी बांधते हुए बहनों की आंखें नम हुईं, डासना जेल में रिश्तों का भावुक दिन!
रक्षाबंधन पर भाइयों से मिलने पहुंचीं बहनें, राखी बांधकर गले लगीं तो आंखों से छलक पड़े आंसू
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। हाथों में राखी, आंखों में अपनों से मिलने की खुशी और दिल में बरसों की भावनाएं! रक्षा बंधन के पवित्र पर्व पर डासना जेल में भाई-बहन के मिलन का ऐसा ही भावुक दृश्य देखने को मिला। भाइयों की कलाई पर राखी बांधने पहुंचीं बहनें जैसे ही उनके सामने आईं, भावनाएं आंखों से छलक पड़ीं। किसी ने भाई को राखी बांधी, माथे पर तिलक लगाया तो किसी ने उसे गले लगाकर अपने आंसुओं को रोकने की कोशिश की। भाई भी बहनों को देखकर भावुक हो उठे।
रक्षा बंधन के लिए जेल परिसर में सभी के लिए खुले और व्यवस्थित स्थान पर विशेष इंतजाम किए गए थे, जहां बहनें अपने भाइयों से मिल सकीं और उन्हें राखी बांधी। मुलाकात के दौरान कहीं बहन भाई का हाथ थामे उसे हिम्मत देती नजर आई तो कहीं भाई अपनी बहन को गले लगाकर रोता दिखाई दिया। कुछ पलों के लिए हर तरफ सिर्फ रिश्तों की गर्माहट और भावनाओं की नमी नजर आई।

राखी में बंधी थी घर की याद और उम्मीद
इन बहनों के लिए यह सिर्फ राखी बांधने की रस्म नहीं थी। भाई की कलाई पर बंधा हर धागा अपने साथ घर की याद, बचपन की स्मृतियां और बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर आया था। कई बहनों ने भाइयों को हिम्मत दी और भरोसा दिलाया कि परिवार उनके साथ है।
जेल प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा के निर्देशन में रक्षा बंधन के अवसर पर बहनों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। प्रयास रहा कि पर्व के दिन बहनों को अपने भाइयों से मिलने और राखी बांधने में किसी तरह की परेशानी न हो। सुरक्षा और व्यवस्था के बीच मुलाकात का माहौल सहज और भावनात्मक बना रहा।
रक्षा बंधन का यह दृश्य एक बार फिर बता गया कि भाई-बहन का रिश्ता सिर्फ एक पर्व तक सीमित नहीं होता। मुश्किल परिस्थितियां चाहे कितनी भी हों, अपनों का प्यार इंसान को भीतर से मजबूत बनाता है।
