ग्रैंड ओमेक्स में कुत्ते का हमला: मालिक ही नहीं संभाल पाया अपना कुत्ता, तो बच्चों की सुरक्षा कौन करेगा ?
आधा दर्जन लोग भी ‘पग’ को नहीं बचा सके!
हाईराइज सोसाइटियों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल!!
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
नोएडा। सेक्टर-93बी स्थित ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी में एक बड़े कुत्ते के हमले में छोटे पालतू ब्लैक पग की मौत ने हाईराइज सोसाइटियों में सुरक्षा और पालतू पशुओं के मालिकों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुबह की सैर के दौरान रामपुर ग्रेहाउंड नस्ल के कुत्ते ने महिला और उसके पालतू पग पर हमला कर दिया। महिला जमीन पर गिर गई और बड़ा कुत्ता पग को जबड़े में दबोचकर बुरी तरह घायल करता रहा। वायरल वीडियो में आसपास मौजूद कई लोग उसे बचाने की कोशिश करते दिखाई देते हैं, लेकिन पग की जान नहीं बच सकी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मालिक ही अपने कुत्ते को नियंत्रित नहीं कर पाया और कई लोग मिलकर भी उसे नहीं छुड़ा सके, तो वहां मौजूद बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी ?
पग की जगह बच्चा होता तो ?

इस घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यही है कि अगर कुत्ते के जबड़े में पालतू पग की जगह कोई बच्चा होता, तो परिणाम कितने भयावह हो सकते थे। सोसाइटी के पार्क और रास्ते सभी निवासियों के साझा स्थान हैं। ऐसे में पालतू पशुओं को घुमाते समय केवल पट्टा पकड़ना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें नियंत्रित रखने और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी मालिक की है।
यह मामला किसी खास नस्ल के हर कुत्ते को खतरनाक ठहराने का नहीं, बल्कि मालिक के नियंत्रण, जरूरी सावधानियों और लागू नियमों के पालन की जांच का है। आरोप है कि बड़े कुत्ते के मुंह पर मजल यानी सुरक्षा कवच नहीं था। यह भी जांच का विषय है कि घटना के समय कौन-से नियम लागू थे और उनका पालन हुआ या नहीं।

सोसाइटी प्रबंधन और पुलिस की भूमिका पर सवाल
घटना ने सोसाइटी प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। क्या परिसर में पालतू कुत्तों को घुमाने के नियमों का प्रभावी पालन कराया जाता है ? क्या आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा कर्मी तैयार हैं ? इन सवालों के जवाब जरूरी हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
11 अक्टूबर की एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पग की मालकिन ने पहले डायल 112 पर संपर्क किया और बाद में थाने में लिखित शिकायत भी दी। पुलिस की कार्रवाई और जांच की स्थिति की ताजा पुष्टि जरूरी है!
मुद्दा कुत्ता पालने के अधिकार का नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी निभाने का है। जब किसी मालिक के लिए अपने पालतू को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाए, तो दूसरों की सुरक्षा खतरे में नहीं पड़नी चाहिए। आज एक पग की जान गई है; कल किसी बच्चे या बुजुर्ग के साथ ऐसा हादसा न हो, इसके लिए जवाबदेही तय करना और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
