October 13, 2026
[t4b-ticker]

गौर होम्स सोसाइटी: ऑडिट रिपोर्ट में गड़बड़ियों के आरोप, जांच अधूरी! हाईकोर्ट ने मांगा निष्कर्ष

0
FF

पुराने ऑडिट में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच अधूरी

डिप्टी रजिस्ट्रार को एक महीने के भीतर निष्कर्ष तक पहुंचने को कहा

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

प्रयागराज/गाजियाबाद। सोसाइटी के खातों में गड़बड़ी के आरोप लगें, ऑडिट रिपोर्ट सवाल खड़े करे और जांच सालों तक अधूरी रहे, तो जवाबदेही किसकी है ? गोविंदपुरम स्थित गौर होम्स सोसाइटी का मामला यही सवाल खड़ा करता है। वर्ष 2018 की ऑडिट रिपोर्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठने के बावजूद संबंधित कार्यवाही अब तक अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंची। दूसरी ओर, चुनाव प्रक्रिया पर भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने लंबित कार्यवाही जल्द पूरी करने और अधिमानतः एक महीने के भीतर निष्कर्ष तक पहुंचाने की अपेक्षा जताई। चुनाव की अनुमति देते हुए उसका परिणाम भी लंबित याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रखा। 

ऑडिट रिपोर्ट पर कार्रवाई अधूरी

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान 21 जून 2018 की ऑडिट रिपोर्ट का हवाला दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से बोर्ड के कुछ सदस्यों के कार्यकाल में कथित वित्तीय अनियमितताओं और गबन का मुद्दा उठाया गया। डिप्टी रजिस्ट्रार के 22 जनवरी 2020 के आदेश में वर्ष 2012-13, 2013-14, 2014-15 और 2017-18 की ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया था, ताकि अनियमितताएं मिलने पर संबंधित पदाधिकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर देकर उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम, 2010 के अनुसार कार्रवाई की जा सके।

सवाल है कि वर्षों बाद भी इस प्रक्रिया का अंतिम निष्कर्ष क्यों नहीं निकला ?

डिप्टी रजिस्ट्रार के पत्र में चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर शिकायतें

30 सितंबर 2026 को डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स ने गौर होम्स अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन की चुनाव समिति और निवर्तमान अध्यक्ष-सचिव को पत्र जारी किया। इसमें मुकेश पाल सिंह और तुषार देव की ओर से दी गई शिकायतों का उल्लेख है।

शिकायतों में आदर्श उपविधि, 2011 की धारा 26 के तहत चुनाव लड़ने की पात्रता, निर्धारित मत प्रतिशत के आधार पर मतदान और वैध जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) के जरिए चुनाव समिति नहीं गठित करने पर सवाल उठाए गए। 

पत्र में शिकायतों का संज्ञान लेकर उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम, 2010, आदर्श उपविधि, 2011 और पंजीकृत बायलॉज के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने तथा चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने को कहा गया।

याचिकाकर्ता ने मॉडल बायलॉज के नियम 26 का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि एक-तिहाई बोर्ड सदस्यों की वार्षिक सेवानिवृत्ति के नियम के विपरीत पूरी कमेटी का चुनाव कराया जा रहा है। नियम के अनुसार, कार्यकाल एक वर्ष है और कोई व्यक्ति लगातार दो वर्ष से अधिक एक ही पद पर नहीं रह सकता।

हाईकोर्ट ने लंबित कार्यवाही पूरी करने को कहा

प्रतीकात्मक फोटो

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की अदालत ने मुकेश पाल सिंह की रिट याचिका पर 9 अक्टूबर को आदेश दिया। अदालत के सामने आया कि डिप्टी रजिस्ट्रार के 22 जनवरी 2020 के आदेश और 30 सितंबर 2026 के नोटिस से जुड़ी कार्यवाही अब तक तार्किक निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है।

दोनों पक्षों की सहमति के बाद अदालत ने लंबित कार्यवाही पूरी करने और अधिमानतः एक महीने के भीतर निष्कर्ष तक पहुंचाने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने 11 अक्टूबर 2026 को चुनाव कराने की अनुमति दी, लेकिन उसका परिणाम लंबित याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रखा। संबंधित पक्षों को 15 अक्टूबर को सहायक रजिस्ट्रार के सामने उपस्थित होकर नोटिस पर जवाब दाखिल करने को कहा गया। मामले को 16 नवंबर 2026 को शीर्ष दस मामलों में सूचीबद्ध करने और इस याचिका को वर्ष 2020 की रिट याचिका संख्या 9163/2020 के साथ संबद्ध करने का आदेश भी दिया गया।

डिप्टी रजिस्ट्रार ने निखलेश राजन कहा कि-

गौर होम्स सोसाइटी से जुड़े मामले में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का समयबद्ध तरीके से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। ऑडिट रिपोर्ट और चुनाव प्रक्रिया से संबंधित लंबित मामलों में उपलब्ध अभिलेखों, शिकायतों और लागू नियमों के आधार पर दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अब जांच के निष्कर्ष पर निगाह

गौर होम्स सोसाइटी के मामले में दो सवाल सबसे अहम हैं, पुरानी ऑडिट रिपोर्ट में उठे वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच कब पूरी होगी और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों का निष्कर्ष क्या निकलेगा ? यदि जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं, तो कानून के अनुसार जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इसी तरह, चुनाव में नियमों के उल्लंघन की शिकायतों पर भी निष्पक्ष निर्णय जरूरी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

error: Content is protected !!