October 15, 2026
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काग़ज़ों पर छिड़का पानी, सड़कों पर उड़ती धूल: डीएम के आदेशों की हवा में उड़ान!

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छिड़काव के नाम पर झाड़ू, हवा में उड़ते वादे 

जनता पूछे, जवाब कौन देगा ?

NEWS1UP

संवाददाता

गाजियाबाद। बीती शाम जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने शहर की बिगड़ती हवा पर लगाम कसने के लिए ग्रैप-3 लागू करने के सख़्त आदेश जारी किए। लेकिन सुबह होते-होते यह आदेश उसी धूल में गुम हो गया, जिसे रोकने के लिए यह लागू किया गया था। सुबह-सुबह शहर के शास्त्री नगर और सीबीआई अकादमी क्षेत्र में नगर निगम के सफ़ाई कर्मी झाड़ू लेकर सड़कों पर धूल उड़ाते नज़र आए, बिना किसी पानी के छिड़काव के, बिना किसी रोक-टोक के, और मज़े की बात यह कि सुपरवाइजर साहब खुद मौके पर मौजूद थे।
यानी नियमों की धज्जियां उड़ाने का सरकारी “सुपरविज़न” भी पूरा था।

काग़ज़ों पर छिड़काव, ज़मीन पर झाड़ू

ग्रैप-3 का पहला सिद्धांत कहता है कि सड़कों की सफ़ाई या निर्माण स्थलों पर धूल उड़ने से बचाने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाए। लेकिन ग़ाज़ियाबाद नगर निगम ने इसे कुछ यूं लागू किया, “काग़ज़ों पर छिड़काव, ज़मीन पर झाड़ू।” शहर के कई इलाकों में हाल यह है कि लोग हवा में सांस नहीं, धूल पी रहे हैं।


एक स्थानीय निवासी ने ग़ुस्से में कहा-

“हर साल यही ढकोसला होता है। रिपोर्टें बनती हैं, फोटो खिंचते हैं, लेकिन काम सिर्फ़ फ़ाइलों में होता है। शायद अब धूल भी सरकारी योजना का हिस्सा बन गई है।”

मॉर्निंग वॉक करते एक व्यक्ति ने तंज़ कसा-

“निगम के पास शायद छिड़काव का ठेका सिर्फ़ अख़बारों और प्रेस रिलीज़ के लिए है। असली टैंकर तो कागज़ों में दौड़ते हैं।”

नींद में नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

सवाल यह है कि जब जिला प्रशासन खुद प्रदूषण के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है, तो नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसी एजेंसियां किस नींद में हैं ? क्या किसी विभाग ने इन कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की ? या फिर हर बार की तरह इस बार भी ‘सख़्त निर्देश’ की फाइल किसी धूलभरी दराज़ में सो जाएगी ?

शहर में हवा का हाल अब किसी से छिपा नहीं। एयर क्वालिटी इंडेक्स दिन-ब-दिन ख़तरनाक ज़ोन में जा पहुंचा है। स्कूलों के बच्चे मास्क लगाए हुए हैं, बुज़ुर्ग घरों में कैद हैं, लेकिन नगर निगम के पास अब भी “धूल उड़ाओ, काम दिखाओ” वाली नीति जारी है। कह सकते हैं कि इस शहर में आदेशों की उम्र अब सूरज से भी छोटी हो गई है, शाम को जारी हुए और सुबह तक उड़ गए। और जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होती, तब तक गाजियाबाद की हवा में आदेशों से ज़्यादा धूल उड़ती रहेगी।

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