दिल्ली ब्लास्ट: तीन घंटे, एक कार और तुर्की कनेक्शन, ‘उमर नबी’ की रहस्यमयी कहानी!
डीएनए ने खोला रहस्य: i20 कार चला रहा था उमर नबी
सवाल अब भी बाकी: कौन था ‘UKasa’ ?
NEWS1UP
स्पेशल रिपोर्ट
नई दिल्ली। राजधानी के दिल में गूंजे धमाके की गूंज अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रही। हर नए दिन के साथ जांच की रफ्तार तेज है, और अब एजेंसियों के हाथ कुछ ऐसे सुराग लगे हैं जो इस केस को भारत से तुर्की तक जोड़ते हैं। सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में ब्लास्ट को अंजाम देने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि उमर उन नबी था, वही युवक जो धमाके से ठीक पहले i20 कार चला रहा था। एनआईए और दिल्ली पुलिस की संयुक्त जांच ने अब पुष्टि कर दी है कि कार से बरामद हड्डियों, दांत और कपड़ों के टुकड़ों का डीएनए उमर के परिजनों से 100% मैच कर गया है।
तुर्की के अंकारा से चल रहा था रिमोट कंट्रोल!

जांच में यह भी सामने आया है कि उमर नबी भारत में नहीं, बल्कि तुर्की के अंकारा में बैठे एक ‘हैंडलर’ के संपर्क में था, जिसका कोडनेम था “UKasa”। सूत्रों के मुताबिक, उमर इस हैंडलर से Session ऐप के ज़रिए लगातार जुड़ा हुआ था, यह एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है, जिसका इस्तेमाल आतंकियों और क्रिप्टो नेटवर्क्स के बीच तेजी से बढ़ा है।
जानकारी यह भी मिली है कि मार्च 2022 में उमर और फरीदाबाद मॉड्यूल के कुछ अन्य संदिग्ध तुर्की गए थे, जहां उनकी मुलाकात जैश-ए-मोहम्मद के ऑपरेटिव्स से हुई। यहीं से शुरू हुआ उनका ‘मिशन’ और धीरे-धीरे एक पढ़ाकू छात्र से उमर, आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा बन गया।
सूत्र कहते हैं कि NIA अब तुर्की दूतावास से आधिकारिक सहयोग मांगने की तैयारी में है ताकि हैंडलर UKasa तक पहुंच बनाई जा सके।
लाल किले की पार्किंग में 3 घंटे की खामोशी

घटनास्थल के आसपास लगे CCTV फुटेज ने इस केस का सबसे अहम रहस्य खोला, उमर नबी धमाके से ठीक पहले तीन घंटे से ज्यादा लाल किले की पार्किंग में बैठा रहा। रिकॉर्ड्स बताते हैं कि वह दोपहर 3:19 बजे पार्किंग में दाखिल हुआ और शाम 6:28 बजे बाहर निकला, और इसके तुरंत बाद ब्लास्ट हुआ। दिलचस्प बात ये कि उन तीन घंटों में उमर अपनी कार से बाहर नहीं निकला, किसी से बात नहीं की और गाड़ी को भी लावारिस नहीं छोड़ा। इस दौरान वह पास की कमला मार्केट थाना इलाके की एक मस्जिद में भी गया, जहां करीब 10 मिनट तक रुका। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि यहीं से उसने ब्लास्ट के अंतिम सिग्नल की पुष्टि की होगी।
पढ़ाकू लड़का या रेडिकल प्लानर ?
परिवार के लिए उमर एक शांत, समझदार और पढ़ने-लिखने वाला लड़का था। मां बताती हैं कि “वह बच्चों के साथ क्रिकेट खेलता था, जब भी घर आता था तो कहता कि जरूरी काम कर रहा हूं। हमें नहीं पता था कि वो किस राह पर चला गया है।” पर जांच एजेंसियों के लिए अब वही “पढ़ाकू उमर” एक साइबर-स्मार्ट ऑपरेटिव साबित हो रहा है, जो तकनीक, एनक्रिप्शन और डार्क नेटवर्क्स की दुनिया में घुस चुका था।
अल फलाह यूनिवर्सिटी पर जांच एजेंसियों की नज़र

ब्लास्ट केस की तहकीकात अब सिर्फ उमर तक सीमित नहीं है। एजेंसियां अब फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल के लिंक खंगाल रही हैं। सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसियों ने अल फलाह यूनिवर्सिटी से कई अहम दस्तावेज मांगे हैं। मसलन, डॉ. उमर, डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन शाहिदा से जुड़े रिकॉर्ड, यूनिवर्सिटी की जमीन के कागजात, अल फलाह ट्रस्ट की फाइलें, सरकारी विभागों से मिली NOC, UGC और नेशनल मेडिकल कमिशन की रिपोर्ट्स, और यूनिवर्सिटी एक्ट की कॉपी।
जांच एजेंसि इस बात की पड़ताल कर रही है कि कहीं इस यूनिवर्सिटी के ज़रिए किसी मॉड्यूल को लॉजिस्टिक या फाइनेंशियल सपोर्ट तो नहीं मिल रहा था।
NIA की नज़र अब ‘डिजिटल ब्रेनवॉशिंग’ पर

जांचकर्ताओं का मानना है कि यह केस भारत में पनप रहे “डिजिटल रेडिकलाइजेशन” का ताजा और खतरनाक उदाहरण है, जहां सोशल मीडिया, चैट ऐप्स और गुप्त फोरम्स के ज़रिए युवाओं को धीरे-धीरे ‘मिशन’ की ओर धकेला जा रहा है। दिल्ली ब्लास्ट की यह गुत्थी अब भारत से निकलकर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती बन गई है। और इसके केंद्र में है, एक नाम, जो कभी अपने मोहल्ले में ‘क्रिकेट खेलने वाला लड़का’ कहलाता था, लेकिन अब जांच रिपोर्ट्स में दर्ज है उमर उन नबी, द अंकारा कनेक्शन।
