गौर होम्स AOA चुनाव: उच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी ? GDA ने DM को लिखा पत्र!
चुनाव, पारदर्शिता और जिम्मेदारियों पर
खड़ी हुई बड़ी बहस!
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। गोविंदपुरम स्थित गौर होम्स सोसाइटी में मात्र एक माह पूर्व हुए AOA चुनावों को लेकर उठा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) द्वारा जारी शिकायती निरीक्षण-पत्र ने यह साफ कर दिया है कि सोसायटी में हुए चुनाव न केवल प्रक्रियागत रूप से सवालों के घेरे में हैं, बल्कि इनमें उच्च न्यायालय के आदेश और उत्तर प्रदेश मॉडल बायलॉज़, दोनों का खुला उल्लंघन हुआ है। इससे अब पूरी निर्वाचन प्रक्रिया और निर्वाचन अधिकारी की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप: पात्रता पर सवाल!
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की पात्रता की विधिवत जांच नहीं की गई। ऐसे सदस्यों को भी चुनाव लड़ने का अवसर दे दिया गया जिन्हें बायलॉज़ के अनुसार चुनाव लड़ने का अधिकार ही नहीं था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नामांकन-पत्रों की वैधता की जांच में निर्वाचन अधिकारी ने गंभीर लापरवाही बरती।
यह चूक केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि वह खामी है जो सोसायटी के भविष्य को सीधे प्रभावित कर सकती है। क्योंकि अपात्र उम्मीदवार, यदि बोर्ड में पहुंच जाएं, तो वे बाद में लाखों-करोड़ों की वित्तीय योजनाओं और फैसलों पर नियंत्रण स्थापित कर लेते हैं, जो सोसायटी के लिए खतरनाक परिदृश्य है।
उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना ?
GDA के पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की रिट संख्या 17986/2015 एवं 35516/2025 का पालन नहीं किया गया। न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि सोसायटी के चुनाव पूर्ण पारदर्शिता और निर्धारित विधिक प्रक्रिया के अनुसार हों। लेकिन वास्तविकता में इन आदेशों को दरकिनार करते हुए चुनाव संपन्न कराए गए। शिकायत में निर्वाचन अधिकारी पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने चुनाव उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट अधिनियम 2010 की धारा 12 (1) (एफ), नियम 3, फॉर्म ‘ए’ के अनुसार वोट प्रतिशत के आधार पर न कराकर, ‘एक फ्लैट एक वोट’ के आधार पर कराया गया है। यह केवल तकनीकी उल्लंघन नहीं बल्कि एक गंभीर कानूनी अवमानना है।
मॉडल बायलॉज़ का खुलेआम उल्लंघन
उत्तर प्रदेश मॉडल बायलॉज़, 2010 के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया में सदस्यता और पात्रता की जांच सबसे महत्वपूर्ण चरण है। लेकिन गौर होम्स में आरोप है कि बिना पात्रता वाले व्यक्तियों को चुनाव में उतारा गया और बाद में प्रबंधन में पद भी सौंप दिए गए। यह सीधे-सीधे बायलॉज़ की मूल अवधारणा और प्रावधानों का उल्लंघन है। इसी आधार पर सोसायटी के मौजूदा AOA की वैधता अब गंभीर संदेह के दायरे में है।
अपात्र लोग वित्तीय फैसले ले रहे!

अपार्टमेंट्स एक्ट के विशेषज्ञ एडवोकेट गजेंद्र सिंह आर्य कहते हैं कि-
अपात्र सदस्यों का बोर्ड में प्रवेश सोसायटी के वित्तीय स्वास्थ्य, सुरक्षा और प्रशासनिक निर्णयों को जोखिम में डाल देता है। लिफ्ट सुरक्षा, मेंटेनेंस, पार्किंग, सुरक्षा गार्ड, सामुदायिक सुविधाएँ, इन सभी पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं और ऐसे निर्णय अपात्र व्यक्तियों के हाथों में नहीं होने चाहिएं।
कड़ी कार्रवाई के संकेत!
GDA ने डिप्टी रजिस्ट्रार को निर्देशित किया है कि पूरे मामले की पुनः जांच की जाए और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही भविष्य में इस तरह की प्रक्रियागत त्रुटियों को रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र लागू करने की भी सिफारिश की गई है।
GDA ने DM को लिखा पत्र

इस विवाद को और गंभीर बनाते हुए एक नया महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है, गौर होम्स के पूर्व AOA अध्यक्ष मुकेश पाल सिंह द्वारा दिए गए शिकायती पत्र पर GDA के संयुक्त सचिव ने जिलाधिकारी (DM) को औपचारिक रूप से पत्र लिखा है। पत्र में यह साफ तौर पर कहा गया है कि, डिप्टी रजिस्ट्रार ने इस गंभीर मामले में कोई संज्ञान नहीं लिया चुनाव प्रक्रिया से जुड़े गंभीर आरोपों पर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई इसलिए DM स्वयं हस्तक्षेप करें और डिप्टी रजिस्ट्रार को निर्देश जारी करें कि मामले का निस्तारण शीघ्रतम किया जाए। यह पहल साबित करती है कि मामला केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि उच्च स्तर पर भी इसे गंभीर अनियमितता के रूप में देखा जा रहा है।
उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना, मॉडल बायलॉज़ का खुला उल्लंघन और अब GDA द्वारा DM तक शिकायत भेजना स्पष्ट संकेत है कि मामला अत्यंत गंभीर है।
