2500 लोगों को क्यों निकाला ? TCS को श्रम आयुक्त का कारण बताओ नोटिस!
NITES की शिकायत के बाद TCS घिरा
IT सेक्टर में हलचल
NEWS1UP
Business Correspondent
पुणे। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) पर कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर कथित छंटनी को लेकर श्रम विभाग ने गंभीर रुख अपनाया है। नैसेंट इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉयीज सीनेट (NITES) की शिकायत के बाद श्रम आयुक्तालय ने कंपनी को ‘शो कॉज नोटिस’ जारी किया है और इस पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
NITES ने लगाया अवैध छंटनी का आरोप
कर्मचारी संगठन NITES ने जुलाई में दावा किया था कि TCS अपने कुल स्टाफ से 12,000 कर्मचारियों की कटौती करने की तैयारी में है, जिसमें पुणे स्थित 2,500 कर्मचारी भी शामिल बताए गए। संगठन का आरोप है कि TCS ने कर्मचारियों को बिना उचित प्रक्रिया और बिना वैध आधार के नौकरी से हटाया है। शिकायत मिलने के बाद श्रम विभाग ने मामले को तुरंत संज्ञान में लिया।
श्रम आयुक्त का हस्तक्षेप, TCS को नोटिस जारी
मामले की समीक्षा के बाद उप श्रम आयुक्त निखिल वालके ने TCS को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है।
नोटिस में कंपनी से यह पूछा गया है कि-
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कर्मचारियों की संख्या में इतनी बड़ी कटौती क्यों की गई ?
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क्या यह प्रक्रिया श्रम कानूनों के अनुरूप थी ?
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क्या जिन कर्मचारियों को हटाया गया, उन्हें पूर्व सूचना, नोटिस पीरियड या अन्य वैधानिक लाभ दिए गए ?
श्रम विभाग ने TCS से निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है।
यहाँ उल्लेखनीय है है कि भारत में कर्मचारियों को हटाने के लिए कंपनियों को नोटिस पीरियड, कारण, और सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। यदि TCS ने ऐसा नहीं किया, तो यह Industrial Disputes Act, 1947, Section 25F का उल्लंघन माना जाता है।
अभी तक TCS की ओर से कोई बयान नहीं
इस संवेदनशील मामले को लेकर TCS की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक या सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। IT सेक्टर में TCS की पहचान एक स्थिर रोजगार देने वाली कंपनी के रूप में रही है, ऐसे में इन आरोपों ने उद्योग जगत में चर्चा को और तेज कर दिया है।
मामले की निष्पक्ष जांच हो: कर्मचारी संगठन
NITES का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ नौकरी जाने का नहीं, बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों और पारदर्शिता का है। संगठन ने श्रम आयुक्त से मांग की है कि—
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छंटनी की पूरी प्रक्रिया की जांच हो,
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सभी प्रभावित कर्मचारियों को न्याय मिले,
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और भविष्य में इस तरह की अवैध छंटनी पर रोक लगे।
श्रम विभाग द्वारा नोटिस जारी होने के बाद अब TCS के जवाब पर सबकी निगाहें टिकी हैं। अगर कंपनी संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहती है, तो श्रम आयुक्तालय आगे की कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर सकता है।
